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Gold-Silver ETF Update: गोल्ड-सिल्वर ETF में उतार-चढ़ाव पर लगाम, जानें SEBI के नए नियमों का आपके निवेश पर क्या होगा असर?

SEBI ने ETF सेगमेंट में बढ़ती अस्थिरता रोकने के लिए नए नियम प्रस्तावित किए हैं। 13 फरवरी 2026 के कंसल्टेशन पेपर में गोल्ड और सिल्वर ETF के लिए शुरुआती प्राइस बैंड ±6% और इक्विटी-डेट ETF के लिए ±10% रखने का सुझाव है, जिसे ±20% तक बढ़ाया जा सकेगा। 
Editorial
Updated:- 2026-02-16, 13:21 IST

SEBI अब ETF सेगमेंट में बढ़ती अस्थिरता को रोकने के लिए कई सख्त कदम उठा रहा है। बता दें कि 13 फरवरी 2026 को एक नया कंसल्टेशन पेपर जारी हुआ, जिसके जरिए SEBI ने एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ETF) के बेस प्राइस और प्राइस बैंड के मौजूदा नियमों की समीक्षा करने का प्रस्ताव रखा है। ऐसे में  वर्तमान नियम और नए नियम के बारे में पता होना जरूरी है। आज का हमारा लेख इसी विषय पर है। आज हम आपको अपने इस लेख के माध्यम से बताएंगे कि ईटीएफ के नए नियम क्या हैं। पढ़ते हैं आगे...

क्या है वर्तमान नियम? 

बता दें कि वर्तमान में, गोल्ड और सिल्वर ETF के लिए प्राइस बैंड के नियम सामान्य शेयरों की तरह ही काम करते हैं। अधिकांश ETF जो रोलिंग सेटलमेंट के तहत आते हैं, उन पर 20% का फिक्स्ड प्राइस बैंड लागू होता है। इसका मतलब यह होता है कि एक दिन में इनकी कीमत में 20% से अधिक का उतार-चढ़ाव नहीं हो सकता।

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इसके अलावा, बाजार की अत्यधिक अस्थिरता को नियंत्रित करने के लिए 10%, 15% और 20% के मार्केट-वाइड सर्किट ब्रेकर भी प्रभावी होते हैं। ये सेंसेक्स या निफ्टी के मूवमेंट के आधार पर पूरी ट्रेडिंग रोक देते हैं। हालांकि, डेरिवेटिव सेगमेंट वाले शेयरों पर ये नियम अलग हैं, लेकिन गोल्ड-सिल्वर ETF अभी सख्त निगरानी और इन निर्धारित सीमाओं के दायरे में ही ट्रेड होते हैं।

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इक्विटी और डेट ETF

इनके लिए शुरुआती प्राइस बैंड ±10% रखने का सुझाव है। बाजार की जरूरत के अनुसार इसे ±20% तक बढ़ाया जा सकेगा। इस प्रक्रिया के बीच 15 मिनट का कूलिंग-ऑफ पीरियड' अनिवार्य होगा, जिससे निवेशकों को सोच-समझकर निर्णय लेने का समय मिले। दिन भर में इस बैंड को अधिकतम दो बार बदला जा सकेगा।

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गोल्ड और सिल्वर ETF

ध्यान दें कि कीमती धातुओं के लिए नियम थोड़े अलग होंगे। यहां शुरुआती बैंड ±6% प्रस्तावित है, जिसे अधिकतम ±20% तक लचीला बनाया जा सकता है।

इंवेस्टर्स पर क्या पड़ेगा प्रभाव

इस नई व्यवस्था से बाजार की घबराहट पर लगाम लगेगी। सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि गोल्ड और सिल्वर ETF की बाजार कीमत उनके वास्तविक NAV (Net Asset Value) के करीब रहेगी। हालांकि, इंट्राडे या शॉर्ट-टर्म ट्रेडर्स को ट्रेडिंग रुकने के कारण कुछ असुविधा हो सकती है, लेकिन दीर्घकालिक सुरक्षा के लिहाज से यह एक सकारात्मक कदम है।

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Images: Freepik/shutterstock

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