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आज के दौर में 'जेंडर न्यूट्रल' पेरेंटिंग क्यों जरूरी है और इसकी शुरुआत कैसे करें? जानें एक्सपर्ट से

आज के दौर में यदि बच्चों की परवरिश न्यूट्रल तरीके से करना चाहते हैं तो आपको जेंडर न्यूट्रल पेरेंटिंग के बारे में भी पता होना जरूरी है। जानते हैं इस लेख के माध्यम से... 
Editorial
Updated:- 2026-01-15, 21:11 IST

हमारे समाज में बच्चों की परवरिश को लेकर कुछ दायरे तय किए गए हैं, जैसे उनसे हमेशा कहा जाता है कि लड़की रोती नहीं है और लड़कियों को पिंक कलर ही पसंद आता है, लेकिन जैसे-जैसे समय बदल रहा है बच्चों को इन रूढ़ियों से आजाद करना बेहद जरूरी हो गया है। इसी सोच को जेंडर न्यूट्रल पेंटिंग कहा जाता है। ऐसे में बता दें कि जेंडर न्यूट्रल पेरेंटिंग का मतलब यह नहीं होता कि आप बच्चों का जेंडर ही बदल दें बल्कि इसका अर्थ यह होता है कि आप एक इंसान को पाल रहे हैं ना कि लड़का या लड़की को। ऐसे में यह जानना तो बनता है कि आखिर आज के समय में क्यों जरूरी है जेंडर न्यूट्रल पेरेंटिंग और इससे क्या फायदा होता है। आज का हमारा लेख इसी विषय पर है। आज हम आपको अपने इस लेख के माध्यम से बताएंगे कि जेंडर न्यूट्रल पेरेंटिंग क्यों जरूरी है। पढ़ते हैं आगे... 

क्यों जरूरी है जेंडर न्यूट्रल पेंटिंग?

जब बच्चों पर यह दवाब नहीं होता कि उन्हें कैसा व्यवहार करना चाहिए तो वे अपनी पसंद नापसंद को और अच्छे से समझ पाते हैं। इससे उनका न केवल आत्मविश्वास बढ़ता है बल्कि उनकी स्किल्स को बढ़ाने में मदद में मिलती है।

gender nutrual parenting (2)

पेरेंट्स अक्सर लड़कों को बताते हैं कि उनके लिए भावनाओं को व्यक्त करना कमजोरी है। पेरेंटिंग उन्हें सेंसिटिव बनाना सिखाती है, जिससे वे भविष्य में बेहतर इंसान बन सकें और पार्टनर भी बन सकें। अगर बचपन से ये भेदभाव ना हो कि खाना केवल लड़कियां बनाती हैं और लड़की भी मशीन ठीक कर सकती हैं, तो ऐसे में वे अच्छा करियर चुन सकते हैं

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अपने बच्चों के लिए खिलौने कपड़े खरीदते समय रंगों के जाल से बाहर निकलें। जरूर नहीं कि लड़कों को नीला लड़कों को पिंक ही पसंद है। लड़के को किचन सेट से खेलने दें और लड़की को मशीनों कार से।

gender nutrual parenting (2)

अनजाने में हम ऐसी भाषा इस्तेमाल करते हैं जो भेदभाव पैदा करते हैं जैसे - बहादुर लड़का, सुंदर लड़की। इसकी वजह तुम बहुत साहसी हो या तुमने बहुत अच्छा काम किया जैसे शब्दों का प्रयोग करें। पेरेंट्स अपने माता-पिता को देखकर सीखते हैं।

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Images: Freepik/pinterest

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