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अक्सर माता-पिता की यह शिकायत होती है कि उनका बच्चा रात को समय पर सो तो जाता है, लेकिन सुबह टाइम से नहीं उठता, उसे उठाने में उसे बहुत मशक्कत करनी पड़ती है। ऐसे में गहरी नींद के बावजूद सुबह की सुस्ती और चिड़चिड़ापन इस बात का संकेत होता है कि बच्चे की बायोलॉजिकल क्लॉक यानी शरीर की आंतरिक घड़ी सही तरीके से सेट नहीं हो पा रही है। ऐसे में एक स्वस्थ विकास के लिए केवल नींद की काफी नहीं है, बल्कि उसकी क्वालिटी और उसका सही समय पर आना भी बहुत मायने रखता है। ऐसे में अगर आप अपने बच्चे की बायोलॉजिकल क्लॉक को सेट करना चाहती हैं को यहां कुछ तरीके दिए गए हैं, जिनसे आप अपने बच्चे की दिनचर्या को सुधार सकती हैं। आज का हमारा लेख इसी विषय पर है। आज हम आपको अपने इस लेख के माध्यम से बताएंगे कि रात को जल्दी सुलाकर बच्चे को टाइम से कैसे जगाएं। इसके लिए हमने कोच और हीलर, लाइफ अल्केमिस्ट, साइकोथेरेपिस्ट डॉ. चांदनी तुगनैत (Dr. Chandni Tugnait) से भी बात की है। पढ़ते हैं आगे...
बच्चे के शरीर को डिसिप्लिन की आदत डालने के लिए सबसे जरूरी है कि उसके सोने और जागने का समय हर दिन एक ही हो। चाहे स्कूल की छुट्टी हो या वीकेंड, कोशिश करें कि इस समय में 15-20 मिनट से ज्यादा का अंतर न आए।

एक पैटर्न बनाना बेहद ही जरूरी होता है। जब बच्चा रोज एक ही समय पर उठता है, तो उसके मस्तिष्क को संकेत मिलता है कि अब एक्टिव होने का समय हो गया है। धीरे-धीरे उसका शरीर इस साइकिल का आदी हो जाता है और सुबह उठना उसके लिए बोझ नहीं रहता।
रात को सोने से कम से कम एक घंटा पहले फोन, टैबलेट या टीवी बंद कर देना चाहिए। इन प्रोडक्ट से निकलने वाली नीली रोशनी शरीर में मेलाटोनिन हार्मोन के लेवल को कम कर देती है, जो नींद के लिए जिम्मेदार होता है। इसके बजाय, कमरे में बिल्कुल अंधेरा न रखें और हल्की रोशनी जरूर रखें।
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सुबह होते ही खिड़कियों के पर्दे हटा दें। बता दें कि नेचूरल लाइट रोशनी शरीर को जगाने का सबसे बेहतरीन तरीका है। सूरज की रोशनी जैसे ही बच्चे के कमरे में आती है, उसकी बायोलॉजिकल क्लॉक को जागने का नेचुरल मैसेज मिल जाता है।

अपने बच्चों को सोने से कम से कम दो-तीन घंटे पहले रात का खाना खिला देना चाहिए। भारी या मीठा भोजन रात में बच्चे की एनर्जी बढ़ा सकता है, जिससे उसे गहरी नींद आने में समस्या होती है। ऐसे में आप सोने से पहले एक 'विंड-डाउन' रूटीन बनाएं, जैसे कि गर्म पानी से नहलाना, कोई कहानी पढ़कर सुनाना या हल्का संगीत सुनना। यह प्रोसेस बच्चे के दिमाग को शांत न केवल शांत कर सकता है बल्कि उसे गहरी नींद के लिए तैयार भी करता है।
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