
How To Spot Fake News: अगर किसी के गुमशुदा होने की खबर सुनते हैं, तो उसके लिए बुरा और डर लगने लगता है कि कहीं यह घटना किसी अपनों के साथ न हो जाए। बीते दिन दिल्ली से आई खबर जिसमें जनवरी में 15 दिन के अंदर 800 से ज्यादा लोगों के लापता हुए। साथ ही इससे जुड़े कई वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल भी हो रही थी। इस न्यूज को पढ़ने के बाद न केवल जहां के रहने वाले लोग बल्कि दूसरे शहर में रहने वाले, जिनके बच्चे यहां रहते हैं वह भी डर गए, जिसके बाद वह फोन पर सही से रहने और इधर-उधर न जाने की हिदायत दी। बीती रात लापता लोगों की खबर पर एक वीडियो और पोस्ट सामने आई, जिसमें यह आया कि यह न्यूज पूरी तरह झूठी और भ्रामक है।
अब ऐसे में हमें यह समझना होगा कि इंटरनेट पर दिखने वाली हर जानकारी सच नहीं होती और बिना जांचे-परखे किसी भी मैसेज को शेयर करना गलत हो सकता है। आज के इस लेख में हम आपको बताने जा रहे हैं कि अफवाह की खबरों की जांच कैसे करें?
हम यह स्पष्ट करना चाहते है कि गुमशुदगी, विशेषकर बच्चों के लापता होनें को लेकर फैलायी जा रही अफवाहों से घबराने की कोई आवश्यकता नहीं है।
— Delhi Police (@DelhiPolice) February 5, 2026
विगत वर्षों की तुलना में गुमशुदगी के मामलों में वृद्धि नहीं हुई है।
दिल्ली पुलिस त्वरित जांच व कार्रवाई के साथ नागरिकों की सुरक्षा के लिए… pic.twitter.com/WjV1MCoTEM
6 फरवरी को दिल्ली पुलिस ने अपने ऑफिशियल X हैंडल पर कहा कि कई सुरागों का पीछा करने के बाद, उन्हें पता चला कि लापता लड़कियों की कथित वृद्धि को पेड प्रमोशन के माध्यम से बढ़ाया जा रहा था।
पुलिस ने कहा कि पैसों के लालच में दहशत फैलाने की किसी भी कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी।
After following a few leads, we discovered that the hype around the surge in missing girls in Delhi is being pushed through paid promotion. Creating panic for monetary gains won't be tolerated, and we'll take strict action against such individuals.
— Delhi Police (@DelhiPolice) February 6, 2026
दिल्ली पुलिस और संबंधित अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि 15 दिन में 800 लोगों के गायब होने का आंकड़ा पूरी तरह गलत है। अक्सर पुराने आंकड़ों को तोड़-मरोड़ कर या किसी खास एजेंडे के तहत पेश किया जाता है।
पुलिस के अनुसार, गुमशुदगी के मामलों में दर्ज रिपोर्ट और उनके मिलने की दर पर लगातार काम किया जाता है, लेकिन सोशल मीडिया पर वायरल यह '800' की संख्या महज एक अफवाह है।
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इंटरनेट और व्हाट्सएप पर आने वाली जानकारियों को लेकर सतर्क रहना बहुत जरूरी है। यहां कुछ आसान तरीके दिए गए हैं जिनसे आप खुद को और दूसरों को सुरक्षित रख सकती हैं-
अगर आपको कोई डराने वाला मैसेज मिले, तो सबसे पहले देखें कि वह किस वेबसाइट या संस्था के नाम से है। क्या वह किसी भरोसेमंद समाचार चैनल या सरकारी हैंडल जैसे दिल्ली पुलिस का ट्विटर पर उपलब्ध है?
कई बार क्लिकबेट के चक्कर में सुर्खियां बहुत बनाई जाती हैं। पूरी खबर पढ़ें और देखें कि उसमें कोई ठोस सबूत या आधिकारिक बयान है या नहीं।
इंटरनेट पर कई ऐसी वेबसाइट्स हैं जो वायरल खबरों की सच्चाई बताती हैं। अगर कोई खबर संदिग्ध लगे, तो उसे गूगल पर सर्च करें और देखें कि क्या उसे किसी ने Fake करार दिया है।
जब आप किसी मैसेज को बिना जांचे फॉरवर्ड करते हैं, तो आप अनजाने में डर फैलाने के भागीदार बन जाते हैं। जब तक पुष्टि न हो जाए, शेयर का बटन न दबाएं।
अफवाहें झूठी हो सकती हैं, लेकिन सतर्कता हमेशा काम आती है। दिल्ली जैसे बड़े शहर में अपनी और अपनों की सुरक्षा के लिए इन बातों का पालन करें-
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