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 legal rules for marital rape victims in India

'क्या शादी के बाद पत्नी के कंसेंट के कोई मायने नहीं...', वेब सीरीज चिरैया के बाद फिर उठे सवाल; भारत में मैरिटल रेप के बारे में क्या कहता है कानून?

चिरैया वेब सीरीज असल में रोंगटे खड़े करने वाली है और उस पुरानी सोच पर तमाचा है, जिसमें पत्नी की ना की कोई कीमत नहीं होती है और 'पत्नी धर्म' के नाम पर महिलाओं को ये सीख दी जाती है कि उनके शरीर पर पूरी तरह उनके पति का हक है और इस हक को जताने के लिए उसे किसी की सहमति की जरूरत नहीं है...यहां तक कि पत्नी की मर्जी भी कोई मायने नहीं रखती है। इसके बाद फिर से 'मैरिटल रेप' को लेकर सवाल उठने लगे हैं और सबसे बड़ा सवाल है कि क्या पत्नी की 'ना' का मतलब 'ना' नहीं होता है?
Editorial
Updated:- 2026-03-27, 16:35 IST

"मैंने उसे मना किया...लेकिन वो नहीं रुका...मेरी मर्जी के बिना उसने मेरे साथ...He Raped Me..."

"दिमाग तो खराब नहीं हो गया है तुम्हारा...वो पति है तुम्हारा, ये उसका हक है...ये रेप का तो सवाल ही नहीं उठता...आज बोल दिया है, दोबारा ये बात बोलना भी मत।"

कुछ इसी तरह की बातचीत वेब सीरीज चिरैया में सुनने में मिली थी, जब सीरीज में पूजा का किरदार निभा रही लड़की अपनी मां को जाकर बताती है कि शादी की पहली रात उसके पति ने उसके साथ रेप किया है। खैर, ये तो एक फिक्शन है, लेकिन असल में इस तरह की बातचीत से न जाने कितनी महिलाओं को गुजरना पड़ा है, जब उन्होंने अपनी मां या घर में किसी और को ये बताने की कोशिश की कि उनके पति ने उनके साथ जबरदस्ती की। कभी उन्हें पत्नी धर्म का ज्ञान दिया गया तो कभी पति के हक का पाठ पठाया गया, कुल मिलाकर उनकी आवाज को दबाया गया और उनकी बात सुनने की कोशिश ही नहीं की गई...उनके साथ रेप हुआ, लेकिन क्योंकि ये उनके पति ने किया था इसलिए इसे 'मैरिटल रेप' की जगह 'अधिकार' का जामा पहना दिया गया।

पीढ़ियों से महिलाओं को इसी तरह की बातें सिखाई जाती रही हैं कि शादी के बाद उन्हें 'तन-मन-धन' पति को अर्पित कर देना है और पुरुषों को ये सिखाया जाता रहा है कि पत्नी पर उनका पूरा अधिकार है...अब ये सोच इस हद तक कई लोगों के अंदर घर कर चुकी है कि वो समझना या बदलना भी नहीं चाहते हैं, लेकिन वास्तव में देखा जाए तो बदलने की जरूरत तो है। चिरैया वेब सीरीज कुछ ऐसे ही सवालों को संजीदगी से उठा रही है और शायद यही वजह है कि हम भी एक बार फिर ये पूछ रहे हैं कि 'क्या शादी के बाद पत्नी के कंसेंट के कोई मायने नहीं?' हमने न केवल इस बारे में कुछ ऐसी महिलाओं से बात की, जिन्हें इस दर्द को झेलना पड़ा, बल्कि इस विषय पर पूरी जानकारी के लिए एडवोकेट की भी सलाह ली।

'मैरिटल रेप' का दर्द झेल चुकी 3 महिलाओं के Confessions

marital rape victim confessions

'मैरिटल रेप' का दर्द झेल चुकी 3 महिलाओं के Confessions
"मेरी अरेंज मैरिज हुई थी, शादी से पहले बात होती थी, लेकिन शादी की पहली रात को मैं सेक्शुअल रिलेशन के लिए कम्फर्टेबल नहीं थी, मेरे पति रूम में आए, मैंने उनके सामने अपनी बात रखी और कहा कि अभी शायद मैं इसके लिए तैयार नहीं हूं, लेकिन उन्होंने मेरी एक नहीं सुनी और मेरे साथ शादी की पहली रात रेप हुआ लेकिन कमाल की बात ये है कि इस बारे में जब मैंने अपनी सास को बताया, तो उन्होंने मुझे शर्म करने की सलाह देकर चुप करवा दिया और तबसे पता नहीं कितनी बार ऐसा हो चुका है कि मेरी मर्जी बिना जाने मेरे पति मेरे साथ जबरदस्ती करते हैं और अब शायद उन्हें कोई फर्क भी नहीं पड़ता"- निधि, बरेली ( बदला हुआ नाम)

"मेरे पति शादी के बाद हर रात मेरे साथ जबरदस्ती करते थे और मना करने पर मारपीट किया करते थे, लगभग एक साल तक ये सब यूं ही चलता रहा, बहुत मुश्किल से मैंने अपनी मां को ये बात बताई, लेकिन उन्होंने मुझे शादी निभाने की सलाह दी। प्रेग्नेंसी के आखिरी हफ्तों में जब डॉक्टर ने इंटिमेट होने के लिए मना किया, तब मेरे पति ने मेरे साथ जबरदस्ती करने की कोशिश की पर उस दिन मैंने ठान लिया कि मैं इस व्यवहार को नहीं स्वीकार सकती, जहां मुझे पत्नी नहीं, बल्कि एक संपत्ति समझा जा रहा था, इसलिए मैंने अपने पति से अलग होने का फैसला लिया। आज मैं और मेरा बेटा साथ में खुश हैं।"- आरुषि, मुंबई (बदला हुआ नाम)

"मेरे पति और मेरे बीच शादी के कुछ दिन तक सब कुछ ठीक जा रहा था, लेकिन फिर एक दिन मैंने उन्हें इंटिमेट होने के लिए मना कर दिया पर वो रुकने के लिए तैयार ही नहीं थे, उन्होंने मेरे साथ जबरदस्ती सेक्शुअल रिलेशन बनाए और अगली सुबह ऐसे बर्ताव किया मानो कुछ हुआ ही नहीं। मैंने उन्हें समझाने की कोशिश की, कहा कि सेक्शुअल रिलेशन से पहले मेरा कंसेंट जरूरी है, पर उन्होंने कहा अगर मैं पत्नी होने का फर्ज नहीं निभा सकती, तो मैं घर छोड़कर जा सकती हूं।" अदिति, दिल्ली

पत्नी संपत्ति नहीं, जीवनसंगिनी है...

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"मैं पति हूं...अपनी पत्नी पर पूरा हक है मेरा, मैं चाहे उसके साथ कुछ भी करूं..." यही सोच मैरिटल रेप को जन्म देती है, जहां पत्नी को पत्नी नहीं, बल्कि संपत्ति माना जाता है। जहां पत्नी के हक और मर्जी की बात ही नहीं की जाती है और उसे अपने हिसाब से चलने के लिए मजबूर किया जाता है। असल में हमारे पुरुष प्रधान समाज के न जाने कितने पुरुषों की यही सोच है और ऐसे में सबसे पहले उन्हें ये समझाया जाना जरूरी है कि पत्नी संपत्ति नहीं, जीवनसंगिनी होती है।

'मैरिटल रेप' के बारे में क्या कहता है हमारा कानून?

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आज के समय में इस सवाल का जवाब देश और सरकार दोनों ही ढूंढ रहे हैं, क्योंकि भारत में कानूनी तौर पर वैवाहिक बलात्कार को अपराध नहीं माना जाता है, क्योंकि भारतीय न्याय संहिता (पहले -भारतीय दंड संहिता) की धारा 375 में छूट दी गई है। इस धारा के अनुसार, अगर पत्नी की उम्र 18 वर्ष से अधिक है, तो पति का उसके साथ शारीरिक संबंध बनाना बलात्कार नहीं माना जाता है, लेकिन पीड़िता के पास घरेलू हिंसा अधिनियम, 2005 के तहत वैवाहिक बलात्कार को यौन शोषण के कानूनी दायरे में शिकायत दर्ज करवाने का पूरा अधिकार है। इस अधिनियम के तहत, यौन शोषण को अपराध माना जाता है, जिसमें किसी भी प्रकार का यौन व्यवहार शामिल है, जो महिला के साथ दुर्व्यवहार, अपमान या उसकी गरिमा का उल्लंघन हो। वैवाहिक बलात्कार को अपराध बनाने के लिए कई बार मांग की गई है, लेकिन अभी तक इसे अपराध नहीं माना जाता है।

 

पत्नी की 'ना' का मतलब भी 'ना' ही है...

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हम अक्सर कहते-सुनते हैं कि No Means No...लड़की की 'ना' का मतलब 'ना' होता है। बेशक बात पूरी तरह सही भी है, लेकिन यहां ये समझना बहुत जरूरी है कि पत्नी की 'ना' का मतलब भी 'ना' ही है। भले ही वो लड़की आपकी पत्नी है या गर्लफ्रेंड, सेक्शुअल रिलेशन से पहले हर बार कंसेंट बहुत जरूरी है और अगर आपकी पत्नी आपसे ये कह रही है कि अभी वो ठीक महसूस नहीं कर रही है...उसका मन नहीं है या और भी वजह जिसके चलते वो 'ना' कहे....तो उसका मतलब 'ना' ही होता है। ये बहुत बेसिक है और काफी अजीब है कि 21वीं सदी में भी ये बात कहने और समझाने की जरूरत पड़ रही है। खैर, काश हम अब भी समझ जाएं और काश 'चिरैया' जैसी वेब सीरीज से कोई लड़की कभी रिलेट न कर पाए। 

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वेब सीरीज 'चिरैया' बेशक वो सवाल पूछ रही है, जो पूछा जाना चाहिए...दबी आवाज में नहीं खुलकर पूछा जाना चाहिए। शादी बेशक पति को ये लाइसेंस नहीं देती है कि वो अपनी पत्नी के कंसेट को अहमियत ही न दे। मैरिटल रेप भले के खिलाफ भले ही आज कानून न हो, लेकिन बनना जरूर चाहिए। इसके अलावा, पुरुषों को भी वो सोच बदलने की जरूरत है, जिसमें वो ये समझते और मानते आए हैं कि 'पत्नी' का दर्जा उनसे कमतर है या पत्नी की मर्जा जाने बिना भी उसके साथ इंटिमेट होना उनका हक है। अगर आपको यह स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।

 

 

 

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