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Aap Beeti: भीड़ भरी ट्रेन में एक झटका और मोबाइल गायब, पुलिस ने भी नहीं सुनी मेरी आवाज; ट्रेन में ट्रेवल करते समय हुई इस घटना का जिम्मेदार कौन?

कई बार हम जब घर से निकलते हैं तो ये समझ भी नहीं पाते हैं कि रास्ते में क्या हो सकता है। ऐसे ही दिल्ली में नौकरी करने वाली एक लड़की के साथ हुआ, जो किसी काम से जयपुर जा रही थी। उसके साथ यात्रा के दौरान क्या हुआ और कैसे किसी परिस्थिति से बचा जा सकता है, इसके बारे में आप भी जानें सारिका बाजपेई की आप बीती से। 
Editorial
Updated:- 2026-01-23, 18:19 IST

रेलवे स्टेशन, ट्रेनों और सड़कों में लगे पोस्टर कहते हैं 'महिला सुरक्षा हमारी जिम्मेदारी है, लेकिन क्या ऐसा वास्तव में होता है?
उस रात ट्रेन में जो मेरे साथ हुआ, उसने इन दावों की हकीकत सामने रख दी। बात रात के लगभग साढ़े दस बजे की है। मैं गाजियाबाद रेलवे स्टेशन से जयपुर जाने के लिए ट्रेन में बैठी थी। जल्दबाजी में सीट कन्फर्म नहीं हुई तो हमने जनरल क्लास की टिकट ही ले ली।  मन में थोड़ा डर तो था, लेकिन ये भी लग रहा था कि आखिर जनरल डिब्बे में भी तो लोग ही सफर करते हैं। मैंने फोन पर पापा से बात की और उन्हें बताया कि ट्रेन बस थोड़ी देर में चलने ही वाली है। ट्रेन प्लेटफॉर्म में लगी हुई थी और डिब्बे में हमेशा की तरह भारी भीड़ थी। मैं अकेली यात्रा कर रही थी और मुझे ट्रेन की विंडो सीट में जगह मिली थी। भीड़ ज्यादा होने की वजह से मैंने अपना लैपटॉप बैग एक हाथ में लिया था और दूसरे हाथ में मोबाइल था। ट्रेन लगभग चल ही चुकी थी और प्लेटफार्म पीछे छूट रहा था। तभी मैंने मोबाइल घर पर कॉल करने के लिए अपने हाथ में पकड़ा और नंबर डायल करने लगी।

mobile snaching in train

अचानक भीड़ ट्रेन की खिड़की से मुझे किसी ने तेज झटका दिया और मैं समझ पाती इससे पहले मेरा मोबाइल मेरे हाथ से छिन गया। एक सेकंड से भी कम समय में मेरा मोबाइल मेरे हाथ से गायब हो गया। पहले तो यकीन ही नहीं हुआ। मैंने नीचे देखा, आसपास देखा, फिर तेजी से लोगों से पूछा कि किसी ने मेरा मोबाइल तो नहीं देखा। मैं जोर-जोर से चिल्ला रही थी "पकड़ो-पकड़ो कोई चेन पल करो !अरे कोई पुलिस को बुलाओ मेरा मोबाइल किस ने स्नैच कर लिया है।"
आस-पास बैठे यात्रियों ने ट्रेन रोकने की कोशिश की और कुछ लोगों ने उस व्यक्ति को तेजी से भागते हुए भी देखा जिसने मोबाइल खिड़की के पास से छीना था वो आदमी काले कपड़ों में था और चेहरा ढका हुआ था। बात दिसंबर के महीने की है, इसलिए हलकी ठंड की वजह से लोग अपना मुंह ढक लेते हैं। ऐसा सोचकर लोग उसे आम नज़रों से ही देख रहे थे।

शायद उस आदमी ने मुझे ट्रेन के भीतर बैठे ही देख लिए था, क्योंकि ट्रेन में बैठी एक महिला ने यह भी बताया कि उसने थोड़ी देर पहले एक संदिग्ध आदमी को यहां से बाहर निकलते हुए देखा था। कुछ लोग हेल्प की कोशिश कर रहे थे और कुछ बोल रहे थे 'मैडम, अब नहीं मिलेगा आपका फोन, यहां रोज यही होता है।

मैं आनन-फानन में ट्रेन से उतर गई और मदद की गुहार लगाने लगी। एक आंटी से मैंने मोबाइल मांगा और पापा को इस बारे में बताया कि मेरा मोबाइल ट्रेन में  छिन गया है और उसमें मेरे बैंक अकाउंट की डिटेल्स भी हैं। पापा ने कोशिश की और स्टेशन के पास रहने वाली मेरी एक रिश्तेदार को वहां पहुंचने का आग्रह किया।

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lady asking for help

मेरा मोबाइल सिर्फ एक गैजेट नहीं था। उसमें बैंक ऐप्स थीं, UPI, ऑफिस मेल, पहचान से जुड़ा डाटा और परिवार के सभी लोगों के नंबर मौजूद थे। किसी सहयात्री से फोन लेकर मैंने रेलवे हेल्पलाइन पर कॉल किया। जवाब औपचारिक ही था। कोई GRP (Government Railway Police) का नंबर दे रहा था, कोई RPF ( Railway Protection  Force) का, लेकिन कोई यह नहीं बता रहा था कि अकेली महिला यात्री इस स्थिति में क्या करे।

ट्रेन से उतरकर मैं GRP थाने पहुंची और मैं इस उम्मीद में थी कि कम से कम यहां मेरी बात सुनी जाएगी। लेकिन मुझे दूसरा झटका वहां तब मिला जब मैंने पूरी घटना बताई, समय, जगह, कोच नंबर और मोबाइल का पूरा डिटेल भी दिया और उस पुलिसकर्मी ने बिना कोई गंभीरता दिखाए कहा, "मैडम मोबाइल चोरी तो गजिबाद स्टेशन में आम बात है, आपका मोबाइल क्या बहुत महंगा वाला था?" अब जो भी था यहां से तो नहीं मिलने वाला। आप एक काम कर सकती हैं गजिबाद थाने पहुंच जाइए। हो सकता है FIR हो जाए, लेकिन FIR से भी कुछ होगा नहीं।" रेलवे पुलिस कर्मी ने हंसी उड़ाते हुए ऐसा बोला। मैं ये नहीं जाहति कि पुलिस के सभी अफसर ऐसे हैं, लेकिन मुझे बहुत ख़राब अनुभव का सामना करना पड़ा।

मेरी रिश्तेदार भी पहुंच चुकी थी और हमने गाज़ियाबाद थाने जाने का निर्णय लिया। बात सिर्फ ये नहीं थी कि मेरा मोबाइल आई फोन था और ये बहुत महंगा था, बल्कि ये भी बात थी कि कहीं कोई मेरे मोबाइल का गलत इस्तेमाल न कर ले। ये सोचकर मैं बहुत परेशान थी। हमने FIR करवाने के बारे में सोचा।
क्या FIR दर्ज करना पुलिस का कर्तव्य नहीं है? क्या अपराध दर्ज न करके उसे बढ़ावा नहीं दिया जा रहा? मेरे मन में कई ऐसे सवाल थे और सच में वही हुआ। जब मैं थाने पहुंची तो मुझसे पुलिस कर्मी ने कई सवाल किए। कहां रहती हो? कहां जा रही थी? अकेली जनरल डिब्बे में सफर क्यों कर रही थी? इतना महंगा फोन लेकर दूसरों को दिखाकर बात क्यों कर रही थी? इतने ज्यादा सवाल कि जैसे मैंने ही कोई अपराध किया हो।

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FIR नहीं लिखी गई और इस बात की सांत्वना देकर मुझे वहां से जाने के लिए कहा गया कि "मैडम आप अभी घर जाओ रात बहुत हो गई है, जैसे ही हमें कुछ पता चलेगा बताएंगे। जब मैंने FIR लिखने पर जोर दिया, तो जवाब और भी निराशाजनक आया। "इतनी रात में कुछ नहीं होगा जो होगा कल सुबह थाने आ जाना। "

यह वही सिस्टम है, जो CCTV, AI कैमरे और स्मार्ट निगरानी के दावे करता है। लेकिन जब जरूरत पड़ी, तो रेलवे स्टेशन के कैमरे भी काम नहीं कर रहे थे।  
थाने में बैठी मैं अकेली नहीं थी।
एक महिला अपनी चेन स्नैचिंग की शिकायत लेकर भी बैठी थी।

मैं परेशान होकर घर आ गई और पुलिस कर्मी का नंबर ले लिया। बार-बार फोन करने पर भी निराशाजनक उत्तर ही मिला कि जैसे ही कुछ पता चलेगा आपको बुला लिया जाएगा।

यह सिर्फ मेरी आपबीती नहीं है। यह हर उस महिला की कहानी है, जो ट्रेन में अकेले सफर करती है। मेरे साथ जो हुआ वो किसी के साथ भी हो सकता है। आपको अपनी मदद के लिए खुद ही कदम उठाने पड़ेंगे।

अगर आप ट्रेन में अकेली यात्रा कर रही हैं तो क्या करें

  • अगर कभी आप रात में अकेली यात्रा कर रही हैं तो सबसे पहली बात कि कोई भी कीमती सामान यात्रा के दौरान न ले जाएं।
  • अगर आप खिड़की की तरफ बैठी हैं तो मोबाइल में बात करते समय ध्यान रखें कि मोबाइल खिड़की की तरफ नहीं होना चाहिए।
  • यात्रा से पहले आपको ध्यान देने की जरूरत है कि ट्रेन की टिकट कन्फर्म हो तभी यात्रा की योजना बनाएं।

अगर यात्रा के दौरान आपका मोबाइल चोरी हो जाए तो क्या करें

  • अगर ट्रेन यात्रा के दौरान आपका मोबाइल चोरी हो जाए या खो जाए,  तो घबराने के बजाय तुरंत कोई एक्शन लेने की कोशिश करें।
  • सबसे पहले किसी करीबी के मोबाइल से रेल मदद (Rail Madad) ऐप पर शिकायत दर्ज करें या 139 हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करें।
  • यदि आप FIR दर्ज नहीं कराना चाहते, तो सीधे CEIR पोर्टल पर जाकर मोबाइल से जुड़ी जरूरी जानकारी डालें।
  • आपकी दी गई जानकारी के आधार पर संबंधित जोनल साइबर सेल शिकायत को सिस्टम में अपलोड करती है।
  • इसके बाद आपका मोबाइल ब्लॉक कर दिया जाता है, जिससे कोई और आपके मोबाइल या उसमें मौजूद इनफार्मेशन का गलत या अवैध इस्तेमाल न कर सके।

यह घटना केवल एक महिला की नहीं है बल्कि न जाने कितनी ऐसी घटनाएं आए दिन होती हैं और जिसकी सुनवाई भी नहीं होती है। आज भी ट्रेन, बस या किसी भी पब्लिक ट्रांस्‍पोर्ट पर ट्रेवल करते समय महिलाओं को ऐसी घटनाओं का सामना करना पड़ता है और उस पर कोई एक्शन भी नहीं लिया जाता है। ये थी मुंबई में रहने वाली सारिका बाजपेई की है जो दिल्ली में नौकरी करती हैं। ऐसी परिस्थितियों में सतर्क रहना, अपनी आवाज उठाना और तुरंत मदद लेना बहुत जरूरी है। अगर आपकी भी कोई आप-बीती है, तो हमें samvida.tiwari@jagrannewmedia पर शेयर करें। हम आपकी आप बीती को सबके सामने लाने की कोशिश करेंगे, जिससे सभी को इस बात की जानकारी हो सके कि सफर के दौरान होने वाली घटनाओं से कैसे बचा जा सकता है।

Images: Gemini, AI 

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