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डायरी के आखिरी पन्ने पर लिखा सच पढ़कर क्यों भर आईं सेजल की आंखें? मां का इतना बड़ा त्याग सिर्फ मजबूरी थी या कुछ और...

डायरी के आखिरी पन्ने पर ऐसा क्या लिखा था जिसे पढ़कर सेजल की आंखें भर आईं...मां ने अपने लिए कभी कुछ क्यों नहीं सोचा, क्या ये उनकी मजबूरी थी या कुछ और...आइए जानें एक मां के संघर्ष की अनोखी कहानी, जो त्याग से बढ़कर कुछ और ही है और बेटी को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती है।
Editorial
Updated:- 2026-01-09, 12:28 IST

ठिठुरन वाली ठंड के साथ बारिश की हल्की-हल्की बूंदें खिड़की के शीशे से टकरा रही थीं। कमरे में एक अजीब-सी नमी और सन्नाटा पसरा हुआ था। सेजल ठंड को भुलाकर मां की अलमारी की सफाई करने लगी। मां को गुजरे हुए आज पूरे 13 दिन हो चुके हैं, लेकिन घर अब भी उनकी मौजूदगी से भरा हुआ लगता है। घर का हर कोना, हर चीज मानो मां की मुस्कुराहट से भरी हुई दिखती है। हर एक चीज में मां की यादें बसी थीं बस...सेजल ने अभी सफाई शुरू ही की थी और मां की पसंद की चीजें एक-एक कर नजर आने लगीं। सबसे पहले मां की वो गुलाबी साड़ी जिसे पहनकर वो पहली बार सेजल के स्कूल एनुअल फंक्शन में गई थी, उस दिन मां किसी खूबसूरत परी से कम नहीं लग रही थी।

story of a mother and daughter

तभी अलमारी के सबसे नीचे, पुराने कपड़ों के नीचे से एक भूरे रंग की डायरी निकली। डायरी के किनारे घिस चुके थे, जैसे किसी ने उसे सालों तक सीने से लगाए रखा हो। सेजल के हाथ उस डायरी को देख अचानक कांपने लगे।

'मां की डायरी…', लेकिन मां को मैंने कभी डायरी में कुछ भी लिखते हुए नहीं देखा, डायरी तो क्या मां तो एक लेटर तक नहीं लिखती थी और लिखती भी कैसे काम में इतनी उलझी जो रहती थी।
सेजल को सब एक आश्चर्य ही लग रहा था, क्योंकि... क्योंकि उसने कभी नहीं देखा था मां को डायरी लिखते हुए। मां तो हमेशा कहती थीं- ''मेरेपास अपने लिए सोचने का समय ही कहां है? फिर ये डायरी...''

सेजल ने कुछ पल सोचने के बाद कांपते हाथों से आखिरकार डायरी खोल ही ली। शुरुआती पन्नों पर घर-गृहस्थी की जिम्मेदारियों, खर्चों और रोजमर्रा की छोटी-छोटी चिंताओं का लेखा-जोखा था। कहीं पापा की नौकरी छूटने का जिक्र था-वो दौर जब घर में ऐसा सन्नाटा पसरा रहता था कि एक-दूसरे से नजरें मिलाने की हिम्मत भी नहीं होती थी। एक पन्ने पर मां ने लिखा था कि कैसे एक दिन घर में खाने के लिए कुछ भी नहीं बचा था और उन्होंने बिना बताए अपना हिस्सा छोड़ दिया था। डायरी के अगले पन्ने में सेजल की फीस का जिक्र था जब स्कूल से बार-बार रिक्वेस्ट की गई थी, लेकिन फीस माफ नहीं हुई। तब मां ने चुपचाप कपड़े सिलने का काम शुरू किया था।

mother daughter story

रात-रात भर जागकर सिलाई करना, आंखों की थकान और उंगलियों के छिलते दर्द को मुस्कान के पीछे छिपा लेना-सब कुछ डायरी के इन पन्नों में लिखा था।

सेजल का दिल भर आया। ''ओह मां… आप अकेली क्या-क्या करती रहीं और मुझे कुछ पता ही नहीं चला,'' उसने मन ही मन कहा। उसे एहसास हुआ कि मां ही नहीं, पापा भी अपने दर्द और असफलताओं को भीतर ही भीतर दबाए बैठे रहे होंगे, जिससे उसकी दुनिया अच्छी बनी रहे।

डायरी के कुछ ही पन्ने पलटे थे, लेकिन हर पन्ना मां के मौन संघर्ष और निस्वार्थ प्रेम की गवाही दे रहा था। सेजल की आंखें एक बार फिर डबडबा उठीं।

पन्ने पलटते-पलटते सेजल अतीत में डूबती चली गई। उसे याद आया वो पल जब वह 10 साल की थी और स्कूल की टॉप स्टूडेंट थी और उसका चयन इंटरनेशनल ओलंपियाड में हुआ था। फीस बहुत ज्यादा थी और सेजल ने रोते हुए कहा था, ''मां, रहने दो… मुझे नहीं जाना और मां ने सेजल के गाल पर हल्की थपकी देते हुए कहा था कि मेरी बेटी जरूर प्रतियोगिता में हिस्सा लेगी। मां ने मुस्कराकर सेजल के सिर पर हाथ रखा और कहा था कि बेटी, सपनों से समझौता नहीं किया जाता है।''

कुछ ही दिनों बाद मां ने अपनी पसंद की अंगूठी बेच दी थी और सेजल तो क्या पापा को भी नहीं बताया था, आज इस डायरी ने मां के उस त्याग को भी सेजल के सामने रख दिया था।

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डायरी के पन्ने आगे बढ़ते जा रहे थे और मां का त्याग हर एक पन्ने के साथ-साथ सेजल के आगे आ रहा था। एक जगह मां ने लिखा था ''आज सेजल ने पहली बार मुझे ‘मां’ नहीं, ‘दोस्त’ कहा है। शायद उसे अंदाजा नहीं है कि आज मैं कितनी खुश हूं आज पहली बार मेरी बेटी ने अपने कॉलेज के उस लड़के की बात मुझे बताई है जिसे वो पसंद करती है, एक दोस्त से ही ऐसी बातें कोई शेयर कर सकता है।''

ये पढ़कर एक बाद फिर सेजल की आंखें भर आईं। सेजल उस दिन की यादों में पीछे चली गई जब उसने सच में मां को दोस्त की तरह से गले लगाया था।
डायरी के पन्ने एक के बाद एक करके पलट रहे थे फिर एक पन्ना आया, जो बाकी सबसे अलग था। उस पर कोई तारीख नहीं लिखी थी। स्याही थोड़ी फैली हुई थी, जैसे लिखते समय शायद मां के हाथ कांप रहे हों या फिर शायद मां की आखों से आंसू छलक उठे हों।

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सेजल ने पढ़ना शुरू किया- '''अगर मेरी सेजल कभी यह डायरी पढ़े…”सेजल का दिल ज़ोर से धड़कने लगा, तो शायद वह समझ पाएगी कि मां का त्याग सिर्फ मजबूरी नहीं होता। लोग सोचते हैं कि हालात हमें त्याग करना सिखाते हैं, लेकिन सच्चाई यह है कि बच्चों का प्यार हमें त्याग करना सिखाता है।

सेजल की आंखों से आंसू टपकने लगे और डायरी में आगे लिखा था- “सेजल, तुम्हें शायद याद हो कि जब तुम कॉलेज में थीं, मैंने अचानक सिलाई का काम छोड़ दिया था। सबको लगा था कि शायद मेरा अब काम करने का मन नहीं करता होगा, पापा की कमाई ठीक थी और सच यह था कि डॉक्टर ने मुझे आराम करने की सलाह दी थी… क्योंकि मेरे अचानक मुझे कई हेल्थ इशू होने लगे थे”... सच कहूं तो मैं हमेशा से ही सेल्फ डिपेंडेंट होकर रहना चाहती थी तभी पापा की मदद करने के लिए अपना बुटीक शुरू किया था, लेकिन अब शायद मुझे भी थोड़ा आराम चाहिए था...

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सेजल के हाथ कांपने लगे और चेहरे का रंग पीला पड़ने लगा। मां ने कभी अपनी किसी बीमारी का जिक्र क्यों नहीं किया, आखिर क्यों उन्होंने पापा को भी इसके बारे में नहीं बताया कि शायद उसका इलाज महंगा था.. डॉक्टर ने बताया था कि मां की किडनी में कोई परेशानी है और उसके इलाज का खर्च बहुत ज्यादा है। मां उस समय सोच में पड़ गई थी क्योंकि सेजल को भी आगे की पढ़ाई के लिए विदेश जाना था जिसका खर्चा बहुत ज्यादा था। मां ने डायरी में लिखा था कि “अगर मैं इलाज कराती, तो तुम्हारी पढ़ाई रुक जाती। तुम्हारे सपनों को कभी उड़ान नहीं मिलती, एक मां के लिए इससे बड़ा डर कुछ नहीं होता कि उसकी वजह से बच्चे को कोई परेशानी हो।”

सेजल की सांसें तेज थीं और आंखें भरी हुई थीं...

मां ने लिखा था कि “मैंने उस समय तय किया कि बीमारी से लड़ने से पहले, तुम्हारे भविष्य को मजबूत बनाउंगी। मैं चाहती थी कि तुम अपने पैरों पर खड़ी हो जाओ, ताकि मेरी गैरमौजूदगी भी तुम्हें कभी कमजोर न बना दे।”

डायरी के पन्नों पर सेजल के आंसुओं की कुछ बूंदें गिर पड़ीं। सेजल को अचानक वो रात याद आई, जब मां ने तेज बुखार में भी उसके प्रोजेक्ट में मदद की थी और वो प्रोजेक्ट ही इंटरनेशनल कम्पटीशन के लिए सेलेक्ट हुआ था।

डायरी का आखिरी पन्ना थोड़ा मुड़ा हुआ था। “सेजल, अगर तुम यह पढ़ रही हो, तो समझ लो कि मैंने हार नहीं मानी। मैंने उस समय जानबूझकर पीछे हटना चुना। मजबूरी में नहीं, बल्कि प्यार में।”

”मेरा त्याग इसलिए नहीं था कि मेरे पास कोई विकल्प नहीं था, बल्कि इसलिए था क्योंकि मेरा सबसे बड़ा विकल्प तुम थीं।”

सेजल फूट-फूटकर रो पड़ी। वह डायरी को सीने से लगाकर फर्श पर बैठ गई।

''मां… आपने मुझे कभी बताया क्यों नहीं…आपने पापा से भी कभी अपनी किसी परेशानी के बारे में नहीं बताया। आप पूरे परिवार के लिए एक ढाल बनकर खड़ी रहीं- उसी पल सेजल को एहसास हुआ कि मां ने उसे सिर्फ जन्म नहीं दिया था, बल्कि उसे जीना सिखाया था, मजबूत बनना सिखाया था। बिना शोर किए, बिना कोई शिकायत किए और बिना आंखों में आंसुओं के।”

story of a mother

शाम को सेजल ने मां की तस्वीर के सामने दीपक जलाया। आंखें लाल थीं, लेकिन चेहरे पर एक अजीब-सा सुकून था।

'”मां,' उसने धीमे से कहा, 'अब समझ आया… आपका त्याग मजबूरी नहीं था। वो तो परिवार के लिए सबसे बड़ा प्यार था।” सेजल ने पापा को आवाज लगाई और मां की डायरी के पन्ने पलटते हुए पापा के गले लग गई।

खिड़की के बाहर बारिश थम चुकी थी। बादलों के बीच से चांद की हल्की-सी रोशनी नजर आ रही थी, मानो मां चांद के पीछे से मुस्कुरा रही हो और बेटी पर गर्व कर रही हो।

सेजल ने खुद से ही एक वादा किया कि वो अपनी जिंदगी कुछ इस तरह जिएगी कि मां का हर त्याग, हर चुप्पी, हर दर्द… सब सार्थक हो जाए।

यह कहानी पूरी तरह से कल्पना पर आधारित है और इसका वास्तविक जीवन से कोई संबंध नहीं है। यह केवल कहानी के उद्देश्य से लिखी गई है। हमारा उद्देश्य किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं है। ऐसी ही कहानी को पढ़ने के लिए जुड़े रहें हरजिंदगी के साथ।

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