अगर हार्मोनल असंतुलन का इलाज नहीं किया जाए तो क्या होता है?

हार्मोनल असंतुलन के कारण न सिर्फ चिन पर बाल आने लगते हैं, बल्कि समय पर पहचान करके ट्रीटमेंट ना करने से स्‍वास्‍थ्‍य से जुड़ी कई समस्‍याएं परेशान करने लगती हैं। आइए ऐसी ही कुछ समस्‍याओं के बारे में आर्टिकल में विस्‍तार से जानें।   
what happens if hormonal imbalance is not treated

क्‍या आपकी चिन पर बाल आने लगे हैं?
क्‍या आपको मूड स्विंग्स होते हैं?
क्‍या आपको घबराहट भी महसूस होती है?
ऐसा शरीर में एंड्रोजन (पुरुष हार्मोन) का लेवल बढ़ने से होता है। इससे न सिर्फ चिन पर बाल आने लगते हैं, बल्कि यह अन्य शारीरिक और मानसिक समस्याओं का भी कारण बन सकता है। यह समस्या खासतौर पर महिलाओं में तब देखने को मिलती है, जब शरीर में हार्मोनल असंतुलन होता है। जब हम इसे बैलेंस करने की कोशिश नहीं करते हैं, तब यह पूरे शरीर के कार्यों पर असर डालता है और कई समस्याओं का कारण बन सकता है। कुछ ऐसी समस्याओं की जानकारी Health Hatch की एक्‍सपर्ट निहारिका बुधवानी के इंस्‍टाग्राम अकाउंट से शेयर की है।

PCOS (पॉलीसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम)

pcos

यदि एंड्रोजन लेवल को ठीक नहीं किया जाता है, तो यह हार्मोनल साइकिल को असंतुलित कर सकता है, जिससे पीरियड्स अनियमित और ओवरीज में सिस्ट हो सकते हैं। इसके बाद, धीरे-धीरे PCOS की समस्‍या हो सकती है, जो महिलाओं में रिप्रोडक्टिव हेल्‍थ से जुड़ी समस्याओं का कारण बनती है।

फर्टिलिटी से जुड़ी समस्याएं

हार्मोनल के अंसतुलित लेवल से महिलाओं को फर्टिलिटी से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पडता है। विशेष रूप से, एंड्रोजन के बढ़ते लेवल से ओवरीज में सिस्ट्स बन सकते हैं, जिसका असर ओवुलेशन (एग्‍स का रिलीज होना) पर पड़ता है। यदि एग्‍स सही समय पर रिलीज नहीं होते हैं, तो कंसीव करने के चांस काफी कम हो जाते हैं। समय पर ओवुलेशन नहीं होने से प्रेग्‍नेंट होने में परेशानी आती है।

मूड स्विंग्स

mood swings

हार्मोनल असंतुलन के कारण मूड स्विंग्स, घबराहट और डिप्रेशन जैसी समस्‍याएं भी हो सकती हैं। साथ ही, अनचाहे बालों से ये सारी समस्‍याएं और भी बढ़ने लगती हैं, जिससे मानसिक तनाव होता है। हार्मोनल असंतुलन से जुड़े लक्षणों का असर मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ता है।

डायबिटीज

हार्मोनल असंतुलन से इंसुलिन रेजिस्टेंस भी हो सकता है। यह वह कंडीशन है, जिसमें शरीर के सेल्‍स इंसुलिन को सही तरीके से इस्तेमाल नहीं कर पाते हैं, जिससे ब्‍लड में शुगर का लेवल बढ़ जाता है। यदि इसे सही समय पर कंट्रोल नहीं किया जाता है, तो यह टाइप 2 डायबिटीज का कारण बन सकता है। इस समस्‍या से जूझ रही महिला को हाई ब्‍लड शुगर, वजन बढ़ने और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

दिल की बीमारियां

exercise for hormone

इंसुलिन रेजिस्टेंस के कारण दिल की बीमारियों का खतरा भी बढ़ सकता है। जब शरीर इंसुलिन को ठीक से उपयोग नहीं कर पाता है, तब इससे ब्‍लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल और ब्‍लड फैट (लिपिड) का लेवल बढ़ सकता है, जो दिल के रोगों का कारण बन सकते हैं। समय पर इस असंतुलन का इलाज न करने से दिल के रोग जैसे दिल का दौरा या स्ट्रोक का खतरा बढ़ सकता है।

हार्मोनल असंतुलन को कैसे ठीक करें?

हार्मोनल असंतुलन को ठीक करने के लिए सही डाइट और लाइफस्टाइल में बदलाव सबसे जरूरी कदम होता है।

तनाव कम करें

तनाव रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्‍सा बन चुका है। मानसिक तनाव हार्मोनल असंतुलन को बढ़ा सकता है। जब भी आप तनाव में होते हैं, तब शरीर में कॉर्टिसोल नामक हार्मोन का लेवल बढ़ जाता है, जिससे अन्य हार्मोन्स का संतुलन बिगड़ सकता है। इसलिए, मेडिटेशन, योगासन और डीप ब्रीदिंग जैसी तकनीक से तनाव कम करने की कोशिश करें।

नींद

हार्मोनल स्वास्थ्य के लिए अच्छी और पर्याप्त नींद लेना बहुत जरूरी है। 7-8 घंटे की नींद से शरीर और हार्मोनल सिस्टम को आराम मिलता है और इससे आपका स्वास्थ्य बेहतर रहता है।

हेल्‍दी डाइट

healthy diet

एंड्रोजन के लेवल को कम करने के लिए हेल्‍दी डाइट को फॉलो करना होगा। ऐसी डाइट, जिसमें फाइबर, विटामिन और मिनरल्स की ज्‍यादा मात्रा हो। इसके अलावा, फल, सब्जियां, साबुत अनाज और प्रोटीन युक्त डाइट का सेवन बढ़ाएं। प्रोसेस्ड और शुगर से भरपूर फूड्स से बचें, क्योंकि ये इंसुलिन रेजिस्‍टेंस को बढ़ा सकते हैं।

एक्‍सरसाइज

हेल्‍दी डाइट के साथ रोजाना हल्की-फुल्की एक्सरसाइज करें जैसे कि योगासन, वॉक या हल्की रनिंग करें। इससे आपके शरीर में हार्मोनल संतुलन बेहतर हो सकता है। ऐसा इसलिए क्‍योंकि एक्‍सरसाइज से शरीर में एंडोर्फिन्स और अन्य जरूरी हार्मोन्स का उत्पादन बढ़ता है, जो मूड को अच्छा रखने में मदद करता है।

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पर्याप्त पानी पिएं

पानी की कमी से भी हार्मोन्स का असंतुलन हो सकता है। पर्याप्त मात्रा में पानी पीने से शरीर में मौजूद टॉक्सिंस बाहर निकलते हैं और हार्मोन्स का संतुलन बना रहता है। दिन-भर में कम से कम 8-10 गिलास पानी जरूर पिएं। पानी आपको हाइड्रेटेड रखता है और शरीर काम भी सही तरीके से होता है।

हार्मोनल असंतुलन को जल्दी पहचान करके सुधारना संभव है। यदि आप समय पर अपने हार्मोनल चक्र को ठीक करने का प्रयास करेंगे, तो आप कई स्वास्थ्य समस्याओं से बच सकते हैं। सही डाइट और लाइफस्टाइल अपनाकर आप एंड्रोजन लेवल को कंट्रोल कर सकते हैं और अपनी सेहत को बेहतर बना सकते हैं।

अगर आपको स्वास्थ्य से जुड़ी कोई समस्या है, तो हमें आर्टिकल के ऊपर दिए गए कमेंट बॉक्स में बताएं। हम अपने आर्टिकल्स के जरिए आपकी समस्या को हल करने की कोशिश करेंगे। अगर आपको यह स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी।

Image Credit: Freepik & Shutterstock

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