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Ramayana Facts: रावण ने माता सीता का हरण क्यों किया था? अनेक उत्तरों में से मिल गया आज सही जवाब

अक्सर लोग यह मानते हैं कि रावण ने केवल अपनी बहन शूर्पणखा के अपमान का बदला लेने के लिए सीता जी का अपहरण किया था, लेकिन इसके पीछे कई गहरे गूढ़ कारण छिपे थे।
Editorial
Updated:- 2026-01-06, 16:30 IST

रामायण की कथा में माता सीता का हरण एक ऐसी घटना है जिसने धर्म और अधर्म के बीच के महायुद्ध की नींव रखी। अक्सर लोग यह मानते हैं कि रावण ने केवल अपनी बहन शूर्पणखा के अपमान का बदला लेने के लिए सीता जी का अपहरण किया था, लेकिन इसके पीछे कई गहरे गूढ़ कारण छिपे थे। रावण एक महान पंडित और भविष्य का ज्ञाता भी था, इसलिए उसके इस कृत्य के पीछे केवल क्रोध ही नहीं बल्कि मोक्ष की इच्छा और अहंकार का मिश्रण भी था। वृंदावन के ज्योतिषाचार्य राधाकांत वत्स ने हमें आज एक ऐसा रहस्य बताया जिसके तहत रावण ने माता सीता का हरण क्यों किया था, इसका असल कारण पता। 

भगवान शिव ने दिया था रावण को वरदान

पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार रावण भगवान शिव से मिलने कैलाश पर्वत पर गया। जहां उसने भगवान शिव के साथ एक देवी को बैठे देखा और भगवान शिव से उनका परिचय पूछा। तब शिव जी ने बताया कि वह माता पार्वती हैं यानी कि जगत जननी हैं। यह सुन रावण ने भगवान शिव से भेंट की और कैलाश से लौट गया। 

ravan ne mata sita ka haran kyu kiya tha

इसके बाद रावण ने घोर तपस्या कर शिव जी को प्रसन्न किया और भगवान शिव से वरदान में माता पार्वती को मांग लिया। असल में रावण के मन में यह भाव था कि जगत पिता का वो प्रिय है ऐसे में जगत माता की सेवा कर उनका भी वह प्रिय होना चाहता था। रावण माता पार्वती को लंका ले जाकर उन्हें वहां स्थापित करना चाहता था।

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भगवान विष्णु ने किया रावण के साथ छल 

भगवान शिव वरदान देने के लिए वचन बद्ध थे, इसलिए उन्होंने माता पार्वती को रावण के साथ जाने के लिए कहा। माता पार्वती दुखी मन से रावण के साथ कैलाश से चल पड़ीं। हालांकि, माता पार्वती ने रावण को कई प्रकार से समझाने का प्रयास किया, लेकिन देवी को लंका में प्रतिष्ठित करने की धुन में वह कुछ भी नहीं समझना चाहता था।

जब सारे मार्ग बंद हो गए तब माता पार्वती ने भगवान विष्णु का स्मरण किया। भगवान विष्णु समझ गए कि मा पार्वती भगवान शिव के और भगवान शिव रावण के वरदान से बंधे हुए हैं। ऐसे में भगवान विष्णु रावण के पास भेंस बदल कर पहुंचे और रावण से कहा कि तुम जिसे ले जा रहे हो अगर वो सच में जगत जननी होती तो क्या भगवान शिव उन्हें इतनी सरलता से रावण को देते।

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यह सुन रावण के मन में भी संशय पैदा हुआ जिसके चलते उसने देवी को लौट जाने के लिए और पुनः कैलाश पहुंचा और शिव जी से असली देवी को मांगा। शिव जी ने रावण को बताया कि जिन्हें वह ले गया था वही असली देवी हैं, लेकिन भगवान विष्णु के छल के कारण रावण सत्य नहीं देख पाया। अंत में शिव जी ने रावण को एक छाया रूपी देवी पार्वती प्रदान की। 

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रावण ने क्रोध में लिया था भयंकर प्रण  

रावण जब उन देवी को लेकर लंका पहुंचा और रात के समय उनकी पूजा की तब जाकर रावण को समझ आया कि भगवान शिव ने सत्य कहा था कि वही असली देवी हैं क्योंकि अगर जो रावण के साथ लंका आई हैं वह असली होती तो रात्री में गायब नहीं हो जातीं। रावण को समझ आया कि उसके साथ छल हुआ है और उसने ध्यान लगाकर जान लिया कि यह छल भगवान विष्णु ने किया है।

इसके बाद, रावण ने क्रोध में आकर एक भयंकर प्रण लिया। रावण ने अपनी समस्त तपोबल की शक्ति का प्रयोग करते हुए यह प्रण लिया कि वह भगवान विष्णु के छल के कारण देवी शक्ति को तो अपनी लंका में स्थापित नहीं कर सका, लेकिन इस छल के उत्तर में भविष्य में देवी लक्ष्मी को लंका में स्थापित करेगा। ऐसे लक्ष्मी स्वरूप मां सीता कुछ दिनों तक रावण की लंका में विराजित रहीं।  

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image credit: herzindagi 

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