
विद्या की देवी मां सरस्वती की उपासना का पावन पर्व 'बसंत पंचमी' पूरे भारत में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। हिंदू धर्म में इस दिन का विशेष महत्व है क्योंकि इसे नई शुरुआत और ज्ञान के प्रकाश का प्रतीक माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार, इस दिन दान-पुण्य करने से अक्षय फल की प्राप्ति होती है, लेकिन दान के भी कुछ नियम और मर्यादाएं होती हैं। अनजाने में गलत चीजों का दान करना आपके पुण्य को कम कर सकता है और जीवन में नकारात्मकता ला सकता है। इसलिए, बसंत पंचमी पर यह जानना बेहद जरूरी है कि किन चीजों के दान से बचना चाहिए ताकि मां सरस्वती की कृपा आप पर सदैव बनी रहे। आइये जानते हैं इस बारे में वृंदावन के ज्योतिषाचार्य राधाकांत वत्स से।
अक्सर लोग शुभ अवसरों पर पुराने कपड़े दान करते हैं, लेकिन बसंत पंचमी के दिन फटे हुए या अत्यधिक पुराने कपड़ों का दान करने से बचना चाहिए। मां सरस्वती स्वच्छता और सात्विकता की प्रतीक हैं। ऐसे में फटे कपड़ों का दान घर में दरिद्रता और दुर्भाग्य ला सकता है। यदि आप दान करना चाहते हैं तो साफ-सुथरे या नए वस्त्रों का ही चयन करें ताकि लेने वाले को भी खुशी मिले और आपको उसका शुभ फल प्राप्त हो।

बसंत पंचमी का दिन पीले रंग को समर्पित है जो सकारात्मकता और ऊर्जा का प्रतीक है। इस दिन भूलकर भी काले रंग के कपड़े, कंबल या अन्य किसी काली वस्तु का दान नहीं करना चाहिए। ज्योतिष शास्त्र में काले रंग को शनि और राहु से जोड़कर देखा जाता है जो इस सौम्य पर्व की ऊर्जा के विपरीत माना जाता है। इस दिन काले रंग के दान से मन में अशांति और कार्यों में बाधाएं उत्पन्न हो सकती हैं।
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दान हमेशा शुद्ध और ताजा होना चाहिए। बसंत पंचमी पर किसी जरूरतमंद को जूठा या बासी भोजन देना भारी पड़ सकता है। ऐसा करने से मां अन्नपूर्णा और मां सरस्वती दोनों रुष्ट हो सकती हैं। धार्मिक दृष्टि से बासी भोजन का दान करने से व्यक्ति के मान-सम्मान में कमी आती है और स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ता है। इस दिन पीले चावल या सात्विक ताजे भोजन का दान करना ही उत्तम माना गया है।

बसंत पंचमी के दिन प्लास्टिक का सामान या लोहे की तीखी चीजें जैसे चाकू, कैंची आदि दान करने की गलती न करें। इन चीजों का दान रिश्तों में खटास पैदा कर सकता है और परिवार में विवाद की स्थिति बना सकता है। चूँकि यह दिन कला और संगीत का है, इसलिए धारदार या हिंसक वस्तुओं का लेनदेन शुभ नहीं माना जाता। इनकी जगह किताबों या कलम का दान करना कहीं अधिक फलदायी होता है।
विद्या का दान सबसे बड़ा दान है, लेकिन बसंत पंचमी पर फटी हुई या ऐसी किताबें जिनमें से पन्ने गायब हों, उनका दान नहीं करना चाहिए। किताबों को मां सरस्वती का रूप माना जाता है, इसलिए उनका अनादर करना आपकी बुद्धि और शिक्षा में रुकावट पैदा कर सकता है। अगर आप शिक्षा से जुड़ी सामग्री दान कर रहे हैं तो सुनिश्चित करें कि वे अच्छी स्थिति में हों ताकि कोई उनसे सही ढंग से ज्ञान अर्जित कर सके।
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