Tue Mar 3, 2026 | Updated 07:31 AM IST
image

Phalgun Purnima Vrat Katha 2026: फाल्गुन पूर्णिमा व्रत कथा के पाठ से मिलेगा माता लक्ष्मी का आशीर्वाद, यहां जानें पूजा की सही विधि समेत अन्य जरूरी बातें

Phalgun Purnima Vrat 2026: फाल्गुन पूर्णिमा का पर्व हिंदू दह्र्म में अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है। इस दिन माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा करने से धन, सुख और समृद्धि की प्राप्ति होती है। धार्मिक मान्यता है कि फाल्गुन पूर्णिमा की पूजा विधि विधान के साथ करने के साथ व्रत कथा का श्रद्धापूर्वक पाठ करने से जीवन में सदैव शुभता बनी रहती है।
Editorial
Updated:- 2026-03-03, 05:08 IST

हिंदू धर्म में किसी भी पूर्णिमा तिथि का विशेष महत्व है और पूरे साल में 12 पूर्णिमा तिथियां मनाई जाती हैं। इनमें से फाल्गुन पूर्णिमा का विशेष महत्व है। इस दिन माता लक्ष्मी का पूजन करने के साथ चंद्रमा की पूजा भी की जाती है। यदि आप भी इस दिन व्रत करती हैं और नियम से फाल्गुन पूर्णिमा की पूजा करने के साथ व्रत कथा का पाठ भी करती हैं तो आपके जीवन में आने वाली बाधाएं दूर हो सकती हैं। फाल्गुन पूर्णिमा के दिन ही होलिका दहन भी किया जाता है, इसलिए इस पूर्णिमा का महत्व और ज्यादा बढ़ जाता है। इस साल फाल्गुन पूर्णिमा 03 मार्च को मनाई जाएगी और इसका आरंभ 02 मार्च की शाम से ही हो जाएगा। आइए ज्योतिर्विद पंडित रमेश भोजराज द्विवेदी से जानें फाल्गुन पूर्णिमा की सही पूजा विधि और इसकी व्रत कथा के बारे में विस्तार से।

फाल्गुन पूर्णिमा पूजा विधि (Phalgun Purnima Puja Vidhi 2026)

phalgun purnima puja vidhi

  • फाल्गुन पूर्णिमा के दिन आप प्रातः जल्दी उठकर स्नान आदि से मुक्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • घर के मंदिर में दीप जलाकर व्रत का संकल्प करें और यदि आप इस दिन व्रत करती हैं तो भोजन में फलाहार का ही सेवन करें। व्रत करने वालों को इस दिन भोजन में नमक ग्रहण नहीं करना चाहिए।
  • पूर्णिमा तिथि पर पूजा शाम के समय की जाती है इसलिए आप पूजा से पहले पूजा की चौकी पर लाल या पीले कपड़े का आसन बिछाएं।
  • आप माता लक्ष्मी की मूर्ति को अक्षत के आसन पर स्थापित करें। चौकी पर लक्ष्मी-नारायण जी के साथ गणेश जी को भी विराजित करें।
  • इस दिन पूजा से पहले कलश की स्थापना भी की जाती है, इसलिए आप कलश पर कलावा बांधकर रोली-चंदन से स्वास्तिक बनाएं।
  • चौकी पर अक्षत से अष्टदल कमल बनाएं। उसके ऊपर जल से भरा कलश स्थापित करें, जिसमें गंगाजल भी मिलाएं।
  • कलह के भीतर सुपाड़ी, गांठ वाली हल्दी, एक सिक्का, अक्षत और पुष्प डालें।
  • कलश के ऊपर चावल से भरा पात्र रखें और उस पर दीपक जलाएं। आप कलश के ऊपर नारियल भी रख सकती हैं।
  • इस दिन सबसे पहले गणेश जी का पूजन करें उसके बाद माता लक्ष्मी और विष्णु जी का पूजन करें। माता लक्ष्मी को सिंदूर लगाएं और विष्णु जी को चंदन का से तिलक लगाएं।
  • भगवान विष्णु को पीला चंदन और तुलसी दल अर्पित करें। कलश और दीपक का भी पूजन करें।
  • फाल्गुन पूर्णिमा को रंगभरी पूर्णिमा भी कहा जाता है, इसलिए इस दिन भगवानों को गुलाल भी चढ़ाएं।
  • फाल्गुन पूर्णिमा के दिन व्रत कथा का पाठ करना अनिवार्य माना जाता है और इस दिन आप सत्यनारायण की कथा का पाठ भी कर सकती हैं।
  • पूजन समाप्त होने के बाद माता लक्ष्मी की आरती करें। माता की आरती कपूर या दीपक से करें।
  • पूर्णिमा तिथि पर माता लक्ष्मी के साथ चंदमा का पूजन करना भी फलदायी माना जाता है। इस दिन आप रात्रि में चंद्रमा को दूध मिश्रित जल से अर्घ्य दें।
  • उसके बाद ही आप भोजन या प्रसाद ग्रहण करें।

यह भी पढ़ें- Purnima Tithi 2026:मार्च में कब पड़ रही है फाल्गुन पूर्णिमा? यहां जानें पूरे साल की सभी पूर्णिमा तिथियों और पूजा के शुभ मुहूर्त के बारे में

फाल्गुन पूर्णिमा व्रत कथा (Phalgun Purnima Vrat Katha 2026)

phalgun purnima

एक बार की बात है होली का पर्व निकट था और भगवान जगन्नाथ जी के मन में भी भक्तों के संग रंग खेलने की इच्छा जाग उठी। फाल्गुन पूर्णिमा की मधुर बेला थी, नीलाचल की हवा में अबीर-गुलाल की सुगंध घुली हुई थी। मंदिर के गर्भगृह में प्रभु के अधरों पर अनोखी मुस्कान थी। उन्होंने बड़े भाई बलभद्र जी और बहन सुभद्रा जी से आग्रह किया कि 'ब्रज में तो मैंने बहुत होली खेली, पर नीलाचल के भक्तों संग कभी खुलकर रंग नहीं खेल पाया। इस बार भेष बदलकर उनके बीच चलें?'

बलभद्र जी हंस पड़े, 'कन्हैया, तुम्हारी आंखें ही तुम्हारी पहचान बता देंगी!' सुभद्रा जी ने भी कान्हा से सावधानी बरतने को कहा। उन तीनों ने योजना बनाई कि होली इस साल भक्तों के साथ मनाएंगे। ऐसे में जगन्नाथ जी साधारण कीर्तनिया बने और पीली पगड़ी, हल्का चंदन, और आंखों में काजल लगाकर चल दिए। बलभद्र जी हंसमुख ढोलकिया बने और सुभद्रा जी साधारण युवती का रूप धर पुष्पों की टोकरी ले ली। प्रभु ने अपनी योगमाया से दिव्य आभा मंद कर ली और प्रण किया कि होली पूरी होने तक कोई चमत्कार प्रकट नहीं करेंगे।

मंदिर के बाहर कीर्तन चल रहा था 'आओ रे आओ रंग बरसाने…' तीनों अजनबी बन मंडली में शामिल हो गए। जगन्नाथ जी के मधुर स्वर से सब झूम उठे, बलभद्र जी की ढोलक पर बच्चे-बूढ़े नाचने लगे और सुभद्रा जी फूलों व गुलाल से सबको रंगने लगीं। एक पंडित ने जगन्नाथ जी की अद्भुत आंखें देखकर शंका दिखाई, उस समय प्रभु ने हंसकर बात टाल दी।

उसी समय एक गरीब कन्या उदास खड़ी थी, क्योंकि उसके पास रंग नहीं था। सुभद्रा जी का हृदय पिघल गया, पर चमत्कार दिखाना वर्जित था। तब जगन्नाथ जी ने ढोल की ताल बदलवाई। ताल की कंपन से ऊपर रखी गुलाल की पोटली हिली और हवा संग उसका रंग उस कन्या पर बरस पड़ा। बालिका हर्ष से बोली, 'लगता है स्वयं जगन्नाथ जी ने मुझे रंग दिया!' तीनों ने एक-दूसरे की ओर देखकर मुस्कुरा दिया।

संध्या होते ही वे अपने स्थान पर लौट आए। गर्भगृह में प्रवेश करते ही उनका दिव्य स्वरूप प्रकट हो गया। अगले दिन जब पट खुले, तो भक्तों ने देखा कि प्रभु के चरणों में वही रंग सजा हुआ है। एक वृद्ध भक्त की आंखों से आंसू बह निकले और वो सोचने लगा कि क्या कल स्वयं प्रभु हमारे बीच थे?

जगन्नाथ जी बोले, 'प्रेम छिपता कहां हैं ? आनंद तो तब है जब भक्त हमें खोजते हैं और हम उन्हीं के बीच होते हैं। मंदिर में 'जय जगन्नाथ' के जयकारे गूंज उठे।
उसी समय से फाल्गुन पूर्णिमा के दिन इसी व्रत कथा का पाठ किया जाता है।

यदि आप भी यहां बताई पूजा विधि के साथ फाल्गुन पूर्णिमा की पूजा करें और व्रत कथा का पाते करेंगी तो आपके जीवन में खुशहाली बनी रहेगी। आपको यह स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।

Images: shutterstock.com

यह विडियो भी देखें

Herzindagi video

Disclaimer

हमारा उद्देश्य अपने आर्टिकल्स और सोशल मीडिया हैंडल्स के माध्यम से सही, सुरक्षित और विशेषज्ञ द्वारा वेरिफाइड जानकारी प्रदान करना है। यहां बताए गए उपाय, सलाह और बातें केवल सामान्य जानकारी के लिए हैं। किसी भी तरह के हेल्थ, ब्यूटी, लाइफ हैक्स या ज्योतिष से जुड़े सुझावों को आजमाने से पहले कृपया अपने विशेषज्ञ से परामर्श लें। किसी प्रतिक्रिया या शिकायत के लिए, [email protected] पर हमसे संपर्क करें।

;