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Maha Kumbh 2025: 144 साल बाद बन रहा है पूर्ण महाकुंभ का दुर्लभ संयोग, शाही स्नान से मिल सकता है अक्षय पुण्य

ज्योतिष की मानें तो हर 12 साल में महाकुंभ का आयोजन होता है, वहीं 144 सालों बाद पूर्ण महाकुंभ आता है। इसका महत्व बहुत ज्यादा होता है और ये कई दुर्लभ संयोग लेकर आता है।
Editorial
Updated:- 2024-12-18, 16:32 IST

महाकुंभ मेला 2025 एक ऐतिहासिक और दुर्लभ धार्मिक आयोजन के रूप में आने वाला है। इस बार का महाकुंभ मेला बहुत ख़ास है क्योंकि इस साल 144 साल के बाद एक दुर्लभ संयोग बनने वाला है। इस संयोग से लोगों के जीवन में शुभ फल तो मिलेंगे ही और जो लोग इस स्थान पर शाही स्नान करेंगे उनके जीवन में बहुत से शुभ फल मिलेंगे।

इस साल महाकुंभ का आयोजन प्रयागराज में होने जा रहा है जिससे त्रिवेणी के संगम में मेले का आयोजन किया जाएगा। यह आयोजन प्रयागराज में होता है और लाखों लोगों का इस स्थान पर जमावड़ा लगता है। इस साल 144 साल के बाद पूर्ण महाकुंभ का संयोग बन रहा है, इसलिए ये मेला और ज्यादा ख़ास होगा।

महाकुंभ की महिमा केवल भारत में ही नहीं, बल्कि पूरे विश्व में भी विख्यात है। यह ऐसा अवसर होता है है जहां धर्म, संस्कृति और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। महाकुंभ 2025 का यह दुर्लभ संयोग ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार अत्यंत शुभ है क्योंकि इस आयोजन में ग्रहों की विशेष स्थिति और धार्मिक मान्यताओं का अद्वितीय महत्व भी है।

ऐसा कहा जाता है कि इस दौरान शाही स्नान और अन्य पवित्र स्नान के माध्यम से श्रद्धालु अक्षय पुण्य और मोक्ष की प्राप्ति कर सकते हैं। आइए जानें इस संयोग के बारे में और यहां शाही स्नान के महत्व के बारे में ज्योतिर्विद पंडित रमेश भोजराज द्विवेदी जी से विस्तार से।

साल 2025 का महाकुंभ क्यों है ख़ास

mahakumbh significance

इस साल का महाकुंभ ख़ास है क्योंकि महाकुंभ हर 12 साल के बाद आता है और वहीं इस साल 12-12 के पूरे बारह चरण पूर्ण हो रहे हैं। जिसकी वजह से 144 साल के बाद ऐसा संयोग बन रहा है।

ज्योतिष की मानें तो जब 12-12 साल के बारह चरण पूर्ण होने पर महाकुंभ होता है तब इसे पूर्ण महाकुंभ कहा जाता है। यह महाकुंभ इसलिए ख़ास होता है क्योंकि इसमें ग्रहों की स्थिति, तिथि और हर एक गतिविधि अनुकूल होती है और एक दुर्लभ संयोग बनता है। प्रत्येक 12 वर्ष के बाद प्रयागराज में महाकुंभ, हर एक छठवें साल पर अर्द्धकुंभ का आयोजन होता है। वहीं 144 साल के बाद आने वाले महाकुंभ को पूर्ण महाकुंभ कहा जाता है।

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अंक ज्योतिष के अनुसार महाकुंभ में बन रहा है शुभ संयोग

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महाकुंभ 2025 का महत्व अंक ज्योतिष के अनुसार और भी बढ़ जाता है क्योंकि इस साल और 144 वर्षों बाद बनने वाले दुर्लभ संयोग का संबंध मूलांक 9 से है। साल 2025 की सभी संख्याओं (2+0+2+5) का योग 9 है, जो मंगल ग्रह का प्रतिनिधित्व करता है। मंगल को ऊर्जा, साहस, दृढ़ता और इच्छाशक्ति का कारक माना जाता है।

इसके अलावा, 144 वर्षों का योग भी 9 (1+4+4) है, जो इस संयोग को और अधिक विशेष बनाता है। अंक 9 का संबंध कर्म और आध्यात्मिक उन्नति से होता है। यह किसी व्यक्ति के जीवन में नई शुरुआत और आत्म-सुधार की ओर संकेत करता है।

महाकुंभ जैसे धार्मिक आयोजन में, जहां लाखों लोग मोक्ष प्राप्ति और आध्यात्मिक जागृति के लिए शामिल होते हैं, यह संख्यात्मक संयोग मंगल ग्रह की सकारात्मक ऊर्जा को और अधिक प्रभावशाली बनाता है। अंक ज्योतिष के अनुसार, यह समय भक्तों के लिए अपने कर्मों को सुधारने, साहसिक निर्णय लेने और जीवन में नई दिशा खोजने का उत्तम अवसर हो सकता है।

इस दुर्लभ संयोग के दौरान शाही स्नान या गंगा में डुबकी लगाने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति और जीवन में मंगलदायी परिवर्तन हो सकता है। यह समय आध्यात्मिक उन्नति और सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर होगा।

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साल 2025 के पूर्ण महाकुंभ का ज्योतिष महत्व

साल 2025 के महाकुंभ का आरंभ इस साल 13 जनवरी, पौष पूर्णिमा के दिन से हो रहा है और इसका समापन 26 फरवरी को होगा। इस दौरान जो भी भक्तजन प्रयागराज में महाकुंभ में शाही स्नान करेंगे उन्हें मोक्ष की प्राप्ति हो सकती है और उन्हें कई पापों से मुक्ति मिल सकती है।

पौष पूर्णिमा के दिन चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं से युक्त होता है, इसी वजह से इस दिन का महत्व और ज्यादा बढ़ जाता है। पूर्णिमा का पूर्ण चंद्रमा मन और आत्मा की शुद्धि का प्रतीक माना जाता है। इस दिन से शुरू होने वाला महाकुंभ आध्यात्मिक ऊर्जा और सकारात्मकता का अद्भुत संगम लेकर आएगा।

महाकुंभ में शाही स्नान का महत्व

shashi snan significance

महाकुंभ में शाही स्नान का अपना विशेष आध्यात्मिक और ज्योतिषीय महत्व है। इसे महाकुंभ के सबसे पवित्र और शुभ कार्यों में गिना जाता है।

ऐसी मान्यता है कि शाही स्नान के दौरान भक्त पवित्र नदियों, विशेष रूप से गंगा, यमुना और अदृश्य नदी सरस्वती के संगम में डुबकी लगाते हैं जिससे उनके सारे पाप नष्ट हो जाते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस दौरान होने वाले शाही स्नान का आरंभ अखाड़ों के संतों और महंतों द्वारा किया जाता है।

यह स्नान दिव्यता, तपस्या और आत्मिक शुद्धि का प्रतीक माना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, शाही स्नान के दौरान संगम में देवताओं का वास होता है और गंगा जल अमृत के समान पवित्र हो जाता है। शाही स्नान से व्यक्ति को न केवल आध्यात्मिक उन्नति मिलती है, बल्कि जीवन की सभी बाधाओं और दोषों से मुक्ति भी मिलती है।

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महाकुंभ 2025 में कई दुर्लभ योगों की वजह से इसका महत्व और ज्यादा बढ़ जाता है। इस दौरान शाही स्नान करने से लोगों को कई पापों से मुक्ति मिल सकती है। आपको यह स्टोरी अच्छी लगी हो तो इसे फेसबुक पर शेयर और लाइक जरूर करें। इसी तरह और भी आर्टिकल पढ़ने के लिए जुड़े रहें हरजिंदगी से। अपने विचार हमें कमेंट बॉक्स में जरूर भेजें।

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