
अगर आपके नए साल की शुरुआत उम्मीद के मुताबिक नहीं रही है और आप खुद को छोटी-बड़ी परेशानियों से घिरा हुआ महसूस कर रहे हैं तो निराश होने की जरूरत नहीं है। ज्योतिष और धर्म के अनुसार, जब जीवन में बाधाएं बढ़ने लगें तो भगवान कृष्ण की शरण लेना सबसे उत्तम माना जाता है। श्री कृष्ण न केवल 'सच्चिदानंद' हैं बल्कि वे हर मुसीबत को हरने वाले 'संकटनाशक' भी हैं। उनकी स्तुति के लिए विशेष रूप से रचे गए कृष्ण स्तोत्र का पाठ करने से मन को गजब की शांति मिलती है और अटके हुए काम बनने लगते हैं। यह पाठ आपके जीवन से नकारात्मकता को मिटाकर सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है जिससे आने वाला पूरा साल सुखद और मंगलमय बन सकता है। आइये जानते हैं इस बारे में वृंदावन के ज्योतिषाचार्य राधाकांत वत्स से।
श्री कृष्णाष्टकम आदि शंकराचार्य द्वारा रचित एक बहुत ही मधुर और शक्तिशाली स्तुति है। इसका नियमित पाठ करने से न केवल मानसिक शांति मिलती है बल्कि जीवन की कई जटिल समस्याओं का समाधान भी होता है।
भजेव्रजैकमण्डनंसमस्तपापखण्डनं,
स्वभक्तचित्तरञ्जनंसदैव नन्दनन्दनम्।
सुपिच्छगुच्छमस्तकं सुनादवेणुहस्तकं,
अनंगरंगसागरंनमामि कृष्णनागरम्॥ १ ॥
मनोजगर्वमोचनं विशाललोललोचनं,
विधूतगोपशोचनंनमामि पद्मलोचनम्।
करारविन्दभूधरं स्मितावलोकसुन्दरं,
महेन्द्रमानदारणंनमामि कृष्णवारणम्॥ २ ॥
कदम्बसूनकुण्डलंसुचारुगण्डमण्डलं,
जाङ्गनैकवल्लभंनमामि कृष्ण दुर्लभम्।
यशोदया समोदया सगोपया सनन्दया,
युतंसुखैकदायकं नमामि गोपनायकम्॥ ३ ॥
सदैव पादपङ्कजंमदीयमानसेनिजं
दधानमुत्तमालकं नमामि नन्दबालकम्।
समस्तदोषशोषणंसमस्तलोकपोषणं,
समस्तगोपमानसंनमामि नन्दलालसम्॥ ४ ॥
भुवोभरावतारकं भवाब्धिकर्णधारकं,
यशोमतीकिशोरकं नमामि चित्तचोरकम्।
दृगन्तकान्तभङ्गिनंसदासदालसङ्गिनं,
दिनेदिनेनवंनवंनमामि नन्दसंभवम्॥ ५ ॥

गुणाकरंसुखाकरंकृपाकरंकृपापरं,
सुरद्विषन्निकन्दनंनमामि गोपनन्दनम्।
नवीनगोपनागरंनवीनकेलिलंपटं,
नमामि मेघसुन्दरंतटित्प्रभालसत्पटम्॥ ६ ॥
समस्तगोपनन्दनंहृदंबुजैकमोदनं,
नमामि कुञ्जमध्यगंप्रसन्नभानुशोभनम्।
निकामकामदायकं दृगन्तचारुसायकं ,
रसालवेणुगायकं नमामि कुञ्जनायकम्॥ ७ ॥
विदग्धगोपिकामनोमनोज्ञतल्पशायिनं,
नमामि कु काननेप्रवृद्धवह्नि पायिनम्।
यदा तदा यथा तथा तथैव कृष्णसत्कथा,
मया सदैव गीयतांतथा कृपा विधीयताम्॥ ८ ॥
प्रमाणिका कद्वयंजपत्यधीत्य यः पुमान्।
भवेत्स नन्दनन्दनेभवेभवेसुभक्तिमान्॥ ९ ॥
ॐ नमो श्रीकृष्णाय नमः॥
ॐ नमो नारायणाय नमः॥
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मुसीबतों से मुक्ति के लिए 'श्री कृष्णाष्टकम' या 'अच्युताष्टकम' का पाठ करना सबसे प्रभावशाली माना जाता है। ये स्तोत्र सरल हैं और इनके जाप से भगवान की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
सुबह स्नान के बाद भगवान कृष्ण की मूर्ति या तस्वीर के सामने घी का दीपक जलाएं। साफ मन से स्तोत्र का उच्चारण करें। पाठ के अंत में अपनी परेशानी दूर करने की प्रार्थना करें।
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आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव और चिंता एक आम समस्या बन गई है। श्री कृष्णाष्टकम की लय और इसके शब्द मन पर गहरा सकारात्मक प्रभाव डालते हैं। जब आप 'भजे व्रजैकमण्डनं समस्तपापखण्डनम्' जैसे श्लोकों का उच्चारण करते हैं तो मस्तिष्क में सुखद तरंगें उत्पन्न होती हैं। यह पाठ मन के अनचाहे डर और घबराहट को दूर कर उसे स्थिर बनाता है जिससे आप कठिन परिस्थितियों में भी शांत रहकर सही निर्णय ले पाते हैं।

इस स्तोत्र के फलश्रुति में स्पष्ट कहा गया है कि जो व्यक्ति प्रतिदिन इसका पाठ करता है, उसके जन्म-जन्मान्तर के पाप नष्ट हो जाते हैं। आध्यात्मिक दृष्टि से यह आत्मा के शुद्धिकरण की प्रक्रिया है। यह हमारे भीतर के 'काम, क्रोध, लोभ और मोह' जैसे शत्रुओं को कम करने में मदद करता है और हमें एक बेहतर इंसान बनने की प्रेरणा देता है।
विद्यार्थियों और कार्यक्षेत्र में सक्रिय लोगों के लिए यह स्तोत्र बहुत फायदेमंद है। भगवान कृष्ण 'बुद्धि' के भी स्वामी हैं। उनके स्वरूप का ध्यान करते हुए इस स्तोत्र का पाठ करने से एकाग्रता बढ़ती है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इसके नियमित जाप से बुध और चंद्रमा जैसे ग्रह मजबूत होते हैं जिससे व्यक्ति की वाणी में मधुरता आती है और उसका आत्मविश्वास बढ़ता है।
भगवान कृष्ण को 'दुखभंजन' कहा जाता है। यदि आपके जीवन में अचानक कोई संकट आ गया है या कोई काम बनते-बनते बिगड़ रहा है, तो श्री कृष्णाष्टकम का पाठ एक सुरक्षा कवच की तरह काम करता है। यह भक्त को विपरीत परिस्थितियों से लड़ने की शक्ति देता है। श्रद्धापूर्वक पाठ करने से घर का वातावरण पवित्र होता है और नकारात्मक ऊर्जा दूर भागती है जिससे परिवार में सुख-समृद्धि का वास होता है।
किसी भी स्तोत्र का मुख्य उद्देश्य ईश्वर से जुड़ना होता है। श्री कृष्णाष्टकम के माध्यम से हम कृष्ण के दिव्य रूप उनके कानों के कुंडल, उनके मोर पंख और उनकी बांसुरी का मानसिक दर्शन करते हैं। यह निरंतर स्मरण भक्त के हृदय में प्रेम और भक्ति जगाता है, जो अंततः मोक्ष प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त करता है। संभव हो तो इसका पाठ प्रतिदिन करें और श्री कृष्ण को वस्तु अर्पित करने से बेहतर है प्रेम भाव अर्पित करें।
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