how does living in low light affect personality

क्या आप भी कम रौशनी में रहना पसंद करते हैं? जानें कैसे आपकी पर्सनैलिटी हो रही है इससे प्रभावित

हम जिस तरह के वातावरण और प्रकाश में रहना चुनते हैं वह हमारे स्वभाव, भावनाओं और सोचने के तरीके से जुड़ा होता है। कम रौशनी में रहने की आदत आपकी पर्सनैलिटी के कई छिपे हुए पहलुओं को उजागर करती है जो आपकी कार्यक्षमता और सामाजिक व्यवहार को भी प्रभावित करते हैं। 
Editorial
Updated:- 2026-01-21, 14:37 IST

क्या आपने कभी गौर किया है कि कुछ लोग घर में घुसते ही सारी लाइटें जला देते हैं जबकि कुछ लोग हल्की और कम रौशनी में रहना पसंद करते हैं? आपकी यह पसंद सिर्फ आंखों के आराम या बिजली बचाने तक सीमित नहीं है बल्कि यह आपके गहरे व्यक्तित्व और मानसिक स्थिति का दर्पण है। मनोविज्ञान के अनुसार, हम जिस तरह के वातावरण और प्रकाश में रहना चुनते हैं वह हमारे स्वभाव, भावनाओं और सोचने के तरीके से जुड़ा होता है। कम रौशनी में रहने की आदत आपकी पर्सनैलिटी के कई छिपे हुए पहलुओं को उजागर करती है जो आपकी कार्यक्षमता और सामाजिक व्यवहार को भी प्रभावित करते हैं। आइये जानते हैं इस बारे में वृंदावन के ज्योतिषाचार्य राधाकांत वत्स से।

इंट्रोवर्ट स्वभाव और एकाग्रता

जो लोग कम रौशनी में रहना पसंद करते हैं वे अक्सर इंट्रोवर्ट स्वभाव के होते हैं। उन्हें शोर-शराबे और बहुत अधिक चकाचौंध वाली जगहों की तुलना में शांत और अंधेरे कोने ज्यादा सुकून देते हैं। ऐसे लोग बाहरी दुनिया के हस्तक्षेप से बचकर अपने भीतर की दुनिया में खोए रहना पसंद करते हैं। कम लाइट उन्हें गहराई से सोचने और किसी भी काम पर बेहतर तरीके से ध्यान केंद्रित करने में मदद करती है जिससे उनकी रचनात्मकता बढ़ती है।

kam roshani mein rehne se personality pr kya asar padta hai

संवेदनशीलता और भावनाओं की गहराई

डिम लाइट या कम रौशनी हमारी भावनाओं को अधिक स्थिर और गहरा बनाती है। जो लोग कम प्रकाश में रहते हैं वे आमतौर पर बहुत संवेदनशील और भावुक होते हैं। चमकदार रोशनी अक्सर तनाव या 'हाइपर' महसूस करा सकती है जबकि कम रौशनी मन को शांत रखती है। ऐसे लोग दूसरों की भावनाओं को जल्दी समझते हैं और उन्हें अकेले वक्त बिताना काफी पसंद होता है।

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रचनात्मकता और नए विचार

अंधेरे या कम रोशनी का सीधा संबंध कल्पनाशीलता से है। जब आंखें बहुत ज्यादा विजुअल डिटेल्स नहीं देख पातीं तो दिमाग अपनी खुद की कल्पनाओं का उपयोग करना शुरू कर देता है। यही कारण है कि कई लेखक, कलाकार और विचारक रात के समय या कम लाइट में काम करना पसंद करते हैं। यह माहौल उन्हें समाज के बनाए नियमों से हटकर कुछ 'आउट ऑफ द बॉक्स' सोचने के लिए प्रेरित करता है।

kam roshani mein rehne se personality pr kya prabhav padta hai

तनाव प्रबंधन और मानसिक शांति

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में कम रौशनी एक 'थेरेपी' की तरह काम करती है। जो लोग घर लौटकर लाइटें धीमी कर देते हैं वे असल में अपने दिनभर के तनाव को कम करने की कोशिश कर रहे होते हैं। कम लाइट शरीर में मेलाटोनिन हार्मोन के स्तर को संतुलित करने में मदद करती है जिससे नींद अच्छी आती है और चिड़चिड़ापन कम होता है। ऐसे लोग अक्सर बहुत धैर्यवान होते हैं और कठिन परिस्थितियों में शांत रहना जानते हैं।

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