does a woman get the same husband for seven lives

क्या एक ही पति सात जन्मों तक मिलता है? प्रेमानंद जी महाराज से जानें इस प्रश्न का सही जवाब

शादी और सात जन्मों के रिश्ते को लेकर लोगों के मन में हमेशा कई सवाल रहते हैं। अक्सर ऐसा कहा जाता है कि जो जीवनसाथी इस जन्म में मिला है वही अगले सात जन्मों तक मिलेगा, लेकिन क्या यह सच है? इस प्रश्न का जवाब प्रेमानंद जी महाराज से जानें।
Editorial
Updated:- 2026-01-19, 18:54 IST

हमने कई बार लोगों को ऐसा कहते हुए सुना है कि शादी का रिश्ता स्वर्ग से ही बनकर आता है और इस जीवन में जो भी आपका जीवनसाथी होता है अगले सात जन्मों तक यह रिश्ता बना रहता है और आपको अगले 7 जन्मों में वही व्यक्ति जीवनसाथी के रूप में मिलता है। इसी सवाल का सही उत्तर जानने के लिए एक साधक ने प्रेमानंद ही महाराज से यह प्रश्न किया कि क्या सातों जन्म में मुझे जो भी पति मिले हैं वही मिल सकते हैं। इस प्रश्न का जवाब देते हुए प्रेमानंद जी महाराज ने कुछ ऐसी प्रक्रिया दी है कि ऐसा संभव नहीं है और एक ही पति आपको 7 जन्मों तक नहीं मिल सकते हैं। ऐसा किसी हाल में संभव ही नहीं है। प्रेमानंद जी इस बात पर गारंटी से कहते हैं कि ऐसा संभव नहीं है, लेकिन यदि आप भगवान की आराधना करके उन्हीं को अपने पति रूप में अगले जन्म में भी चाहें तो यह संभव हो सकता है। आइए आपको विस्तार से बताते हैं कि भक्त के इस प्रश्न का जवाब प्रेमानंद जी किस तरह से देते हैं कि 'क्या सात जन्मों तक एक ही पति मिल सकते हैं।'

क्या सच में सात जन्मों तक वह पति मिलता है?

प्रेमानंद जी महाराज के अनुसार, आम धारणा के विपरीत यह कोई फिल्मी या कल्पनात्मक सत्य नहीं है कि जो पति इस जन्म में मिला है, वही अगले सात जन्मों तक भी मिलेगा। महाराज जी साफ रूप से कहते हैं कि इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि आपको एक ही पति सात जन्मों तक मिलें। संसार कर्मों से चलता है और हर जीव के कर्म अलग-अलग होते हैं। इसलिए यह आवश्यक नहीं कि जो व्यक्ति आपको इस जन्म में पति रूप में मिले हैं, वही अगले जन्म में भी उसी रूप में मिले।

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कर्म, प्रारब्ध और संचित का खेल

प्रेमानंद महाराज जी बताते हैं कि हर व्यक्ति के कर्म, प्रारब्ध और संचित अलग-अलग होते हैं। ऐसा जरूरी नहीं है कि पति और पत्नी के कर्म एक जैसे ही हों। ऐसे में जब कर्म अलग हैं तो अगले जन्म में उनका फल भी अलग होगा। ऐसा भी हो सकता है कि इस जन्म में जो पति है वो अगले जन्म में पुरुष ही न हो और किसी और रूप में आए। यह भी हो सकता है कि पति का उस आत्मा के साथ रिश्ता ही अलग बन जाए। संसार का यही विचित्र और रहस्यमय नियम है। प्रेमानंद जी महाराज बताते हैं कि इस संसार में रिश्ते स्थायी नहीं होते हैं। आज कोई किसी का पति है, कोई पत्नी, कोई भाई, बहन, मां या पिता। वहीं अगले जन्म में वही आत्माएं अलग-अलग रिश्तों में बंध सकती हैं। जैसे हमें यह पता नहीं कि पिछले जन्म में हम क्या थे और किस परिवार में थे, वैसे ही अगले जन्म का भी हमें कोई ज्ञान नहीं होता।

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क्या ऐसा कोई उपाय है जिससे 7 जन्मों तक वह पति रूप में मिले?

प्रेमानंद जी महाराज कहते हैं कि ऐसा तभी संभव ही सकता है जब आप ईश्वर से प्रार्थना करें और भगवान से ये वरदान मांगें कि जो इस जन्म में आपके पति हैं वही अगले सात जन्मों में भी मिलें। यही नहीं ऐसा तभी हो सकता है जब भगवान आपको वरदान दे दें कि आपके वही पति अगले कई जन्मों में मिलें। भगवान यदि वरदान दे दें तो सात क्या सात सौ जन्म तक वह पति मिल सकते हैं। यह स्पष्ट है कि यह सब भगवान की इच्छा और कृपा पर निर्भर करता है, क्योंकि सृष्टि का विधान उन्हीं के हाथ में है।

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प्रेमानंद जी का यह जवाब कई लोगों की भ्रांतियों को कम करता है और वो यही बताते हैं कि ईश्वर के विधान के बिना कोई विधान नहीं है। अगर आपको यह स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।

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