
आज शनिवार, 31 जनवरी 2026 को माघ मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि है। शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को रिक्ता तिथि माना जाता है, जिसका अर्थ है खाली । इस तिथि की स्वामिनी माँ काली हैं और शनिवार के स्वामी शनि देव हैं। यह संयोग तंत्र साधना, शत्रुओं पर विजय और नेगेटिव एनर्जी को हटाने के लिए बहुत शक्तिशाली है। आज आकाश मंडल में पुनर्वसु नक्षत्र का प्रभाव रहेगा। पुनर्वसु का अर्थ है पुनः धनवान होना । यह भगवान राम का जन्म नक्षत्र है और इसके स्वामी देवगुरु बृहस्पति हैं। शनिवार और पुनर्वसु का संयोग धैर्य के साथ खोई हुई प्रतिष्ठा वापस पाने का संकेत देता है। ऐसे में आइए जानते हैं मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित सौरभ त्रिपाठी से आज का पंचांग और उपाय।

| तिथि | नक्षत्र | दिन/वार | योग | करण |
| त्रयोदसी (सुबह 08:28 बजे तक) | पुनर्वसु | शनिवार | विष्कुम्भ | गर |
| प्रहर | समय |
| सूर्योदय | सुबह 06 बजकर 50 मिनट पर होगा |
| सूर्यास्त | शाम 05 बजकर 56 मिनट पर होगा |
| चंद्रोदय | दोपहर 04 बजकर 18 मिनट पर हो |
| चंद्रास्त | सुबह 06 बजकर 19 मिनट पर होगा |
| मुहूर्त नाम | मुहूर्त समय |
| ब्रह्म मुहूर्त | (सूर्य पूजन का शुभ समय) सुबह 05 बजकर 18 मिनट से 06 बजकर 09 मिनट तक |
| अभिजीत मुहूर्त | (सूर्य पूजन का शुभ समय) बुधवार दोपहर 12 बजकर 01 मिनट से 12 बजकर 45 मिनट तक |
| विजय मुहूर्त | दोपहर 02 बजकर 33 मिनट से 03 बजकर 17 मिनट तक |
| गोधूलि मुहूर्त | शाम 06 बजकर 03 मिनट से 06 बजकर 30 मिनट तक |
| मुहूर्त नाम | मुहूर्त समय |
| राहु काल | सुबह 09 बजकर 43 मिनट से 11 बजकर 07 मिनट तक |
| यमगंड | दोपहर 01 बजकर 54 मिनट से 03 बजकर 17 मिनट तक |
| गुलिक काल | सुबह 06 बजकर 55 मिनट से 08 बजकर 20 मिनट तक |
| शनिवार को राहु काल | सुबह 9:30 से 11:00 बजे के बीच होता है। इस समय लोहा, तेल या मशीनरी खरीदने से बचें |
आज माघ मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि है जो की पूर्णिमा की पूर्व संध्या है। यह तिथि माँ काली को समर्पित है और आज शनिवार है, इसलिए यह दिन नजर दोष, ऊपरी बाधा और भय को दूर करने के लिए सर्वोत्तम है। आज के दिन हनुमान चालीसा का पाठ करने से शनि की साढ़ेसाती में तुरंत राहत मिलती है।आज पुनर्वसु नक्षत्र है जो किसी भी चीज़ की वापसी का होता है । यदि आपका कोई काम बिगड़ गया था, कोई रिश्ता टूट गया था या व्यापार बंद हो गया था, तो आज का दिन उसे रीस्टार्ट करने के लिए बहुत शुभ है। यह नक्षत्र रिपेयरिंग और कोम्प्रोमाईज़ का कारक है। जिसके प्रभाव से आज आप के पुराने पुराने रुके हुए काम बनेंगे।
ज्योतिष शास्त्र में शनिवार और पुनर्वसु नक्षत्र का संयोग एक क्रिएटिविटी और होपफ़ुल संयोग माना जाता है। शनिवार के स्वामी शनि हैं जो कर्म और विलंब के कारक हैं, जबकि पुनर्वसु के स्वामी गुरु हैं जो ज्ञान और विस्तार के देवता हैं। यदि आप किसी पुराने प्रोजेक्ट पर दोबारा काम करना चाहते हैं, या किसी रूठे हुए व्यक्ति को मनाना चाहते हैं, तो शनिवार का धैर्य और पुनर्वसु की पाजिटिविटी आपको सफलता दिलाएगी। यह संयोग टूटी हुई चीजों की जोड़ने के लिए साल के सबसे अच्छे दिनों में से एक है।

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