
आज रविवार, 18 जनवरी 2026 का दिन सनातन धर्म में अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण माना गया है। आज माघ मास की अमावस्या है, जिसे मौनी अमावस्या कहा जाता है। आज रविवार भी है, इसलिए यह संयोग आदित्य अमावस्या का निर्माण कर रहा है। रविवार सूर्य देव का दिन है और अमावस्या पितरों की तिथि है। यह दुर्लभ संयोग पितृ दोष निवारण और सूर्य की कृपा प्राप्त करने के लिए वर्ष का सर्वश्रेष्ठ दिन माना जाता है। आज के दिन गंगा, यमुना या किसी पवित्र नदी में स्नान करने का महत्व अमृत स्नान के समान बताया गया है। आज के दिन वाणी पर संयम रखना या मौन व्रत हजारों यज्ञों के बराबर फल देता है। आज सुबह पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र रहेगा और बाद में उत्तराषाढ़ा नक्षत्र जो की सूर्य का नक्षत्र लगेगा, जो आज के दिन की शुभता को और बढ़ा रहा है। आइए जानते हैं छिंदवाड़ा, मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित सौरभ त्रिपाठी से आज का पंचांग, मौन का रहस्य और पितृ शांति के उपाय।
आज 18 जनवरी 2026, रविवार को माघ महीने की मौनी अमावस्या है, जो स्नान-दान और पितृ तर्पण के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती है। इस दिन सूर्य, अमावस्या और नक्षत्रों का विशेष संयोग आध्यात्मिक शुद्धि और पितृ दोष निवारण के लिए श्रेष्ठ फल प्रदान करता है।

| प्रहर | समय |
| सूर्योदय | सुबह 06 बजकर 53 मिनट पर होगा |
| सूर्यास्त | शाम 05 बजकर 21 मिनट पर होगा |
| चंद्रोदय | आज अमावस्या है, इसलिए चंद्रमा अदृश्य रहेंगे |
| चंद्रास्त | दोपहर 05 बजकर 21 मिनट पर होगा |
| मुहूर्त नाम | मुहूर्त समय |
| ब्रह्म मुहूर्त (सूर्य पूजन का शुभ समय) | सुबह 05 बजकर 20 मिनट से 06 बजकर 08 मिनट तक |
| अभिजीत मुहूर्त (सूर्य पूजन का शुभ समय) | सुबह 11 बजकर 58 मिनट से 12 बजकर 42 मिनट तक |
| विजय मुहूर्त | दोपहर 02 बजकर 23 मिनट से 03 बजकर 06 मिनट तक |
| गोधूलि मुहूर्त | शाम 05 बजकर 51 मिनट से 06 बजकर 19 मिनट तक |
| मुहूर्त नाम | मुहूर्त समय |
| राहु काल | शाम 04 बजकर 32 मिनट से 05 बजकर 54 मिनट तक |
| यमगंड | दोपहर 12 बजकर 25 मिनट से 01 बजकर 47 मिनट तक |
| गुलिक काल | दोपहर 03 बजकर 10 मिनट से 04 बजकर 32 मिनट तक |
रविवार को राहु काल शाम के समय होता है। इसलिए शाम 4:30 बजे के बाद कोई भी मांगलिक कार्य या यात्रा शुरू न करें।
मौनी शब्द मुनि से बना है। आज के दिन ऋषि-मुनियों जैसा आचरण करना चाहिए। आज अगर आप पूरे दिन मौन नहीं रह सकते, तो कम से कम भोजन करते समय और स्नान करते समय मौन अवश्य रहें। इससे वाणी के दोष मिटते हैं और मानसिक शक्ति बढ़ती है।
रविवार को अमावस्या होने से यह सूर्य और पितरों के मिलन का दिन है। आज के दिन किया गया तर्पण पितरों को सीधे प्राप्त होता है और पितृ दोष से मुक्ति मिलती है। शास्त्रों के अनुसार माघ महीने की अमावस्या को छोटा कुम्भ भी कहा जाता है। आज के दिन जल में गंगाजल मिलाकर नहाने से जाने-अनजाने में हुए पाप धुल जाते हैं।
रविवार के दिन मौनी अमावस्या का पड़ना एक अत्यंत दुर्लभ संयोग माना जाता है, जिसे शास्त्रों में आदित्य अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, रविवार भगवान सूर्य का दिन है जो आत्मा और पिता के कारक हैं, जबकि अमावस्या पितरों की तिथि है। जब ये दोनों एक साथ मिलते हैं, तो यह पितृ दोष निवारण और आत्म-शुद्धि के लिए साल का सबसे शक्तिशाली दिन बन जाता है। मान्यता है कि रविवार की अमावस्या पर किया गया स्नान और दान सीधे सूर्य लोक और पितृ लोक तक पहुँचता है। जिन लोगों की कुंडली में सूर्य कमजोर है, कॉन्फिडेंस की कमी है या पिता-पुत्र के संबंधों में वैचारिक मतभेद है, उनके लिए रविवार की मौनी अमावस्या शुभ फलदायक है। यह दिन शरीर , मन और आत्मा तीनों को एक साथ पवित्र करने का महा-पर्व है।
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