
आज शुक्रवार, 16 जनवरी 2026 का दिन शिव भक्तों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। आज शुक्र प्रदोष व्रत है। जब भी त्रयोदशी तिथि शुक्रवार को पड़ती है, तो उसे शुक्र प्रदोष कहा जाता है। यह व्रत जीवन में सौभाग्य, दांपत्य सुख, सौंदर्य और समृद्धि प्रदान करता है। साथ ही आज मूल नक्षत्र का प्रभाव भी रहेगा। मूल नक्षत्र को गंडमूल नक्षत्रों की श्रेणी में रखा जाता है, जिसके स्वामी केतु हैं। यह नक्षत्र जड़ों से जुड़ने और पुरानी समस्याओं को उखाड़ फेंकने के लिए शुभ है। साथ ही आज ध्रुव योग का अद्भुत संयोग बन रहा है। ध्रुव का अर्थ होता है स्थिर है। आज ध्रुव योग होने से आज की गई पूजा और उपाय जीवन में स्थायी सुख और सौभाग्य लाते हैं। यह योग रिश्तों में मजबूती और करियर में स्टेबिलिटी लाने के लिए श्रेष्ठ माना जाता है। आइए जानते हैं मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित सौरभ त्रिपाठी से आज का पंचांग, प्रदोष मुहूर्त और अचूक उपाय।
| तिथि | नक्षत्र | दिन/वार | योग | करण |
| पौष शुक्ल त्रयोदशी (रात 10:24 बजे तक) | मूल | शुक्रवार | ध्रुव | गर |

| प्रहर | समय |
| सूर्योदय | सुबह 06 बजकर 53 मिनट पर होगा। |
| सूर्यास्त | शाम 05 बजकर 46 मिनट पर होगा। |
| चंद्रोदय | रात्रि 05 बजकर 45 मिनट पर होगा। |
| चंद्रास्त | दोपहर 03 बजकर 28 मिनट पर होगा। |
| मुहूर्त नाम | मुहूर्त समय |
| ब्रह्म मुहूर्त | सुबह 05 बजकर 20 मिनट से 06 बजकर 08 मिनट तक |
| अभिजीत मुहूर्त | सुबह 11 बजकर 58 मिनट से 12 बजकर 41 मिनट तक |
| गोधुली मुहूर्त | शाम 05 बजकर 52 मिनट से 06 बजकर 19 मिनट तक |
| विजय मुहूर्त | दोपहर 02 बजकर 23 मिनट से 03 बजकर 06 मिनट तक |
| मुहूर्त नाम | मुहूर्त समय |
| राहु काल | सुबह 10 बजकर 58 मिनट से दोपहर 12 बजकर 19 मिनट तक |
| यमगंड | दोपहर 03 बजकर 10 मिनट से 04 बजकर 32 मिनट तक |
| गुलिक काल | सुबह 08 बजकर 19 मिनट से 09 बजकर 41 मिनट तक |

आज ध्रुव योग है जैसा कि नाम से स्पष्ट है, ध्रुव योग किसी भी कार्य में स्थिरता देता है। अगर आप चाहते हैं कि आपका प्रेम संबंध, विवाह या नौकरी लंबे समय तक टिके, तो ध्रुव योग में भगवान शिव की आराधना जरूर करें। यह योग घर बनाने की नींव रखने के लिए भी बहुत शुभ है। साथ ही साथ आज शुक्र प्रदोष है शुक्रवार का संबंध वैभव और आकर्षण से है। ऐसे में आज शुक्र प्रदोष का व्रत करने से कर्ज से मुक्ति मिलती है और घर में लक्ष्मी का वास होता है। इसके साथ ही आज मूल नक्षत्र है जो की पुरे दिन और पूरी रात रहने वाला है । इस नक्षत्र में शिवजी पूजन करने से पुराने और गंभीर रोगों में राहत मिलती है। शुक्र प्रदोष का वतत समस्त मनोकामनाओ को पूर्ण कर शिव लोक प्रदान करता है।
हिन्दू धर्म और ज्योतिष शास्त्र में शुक्र प्रदोष का स्थान अत्यंत विशिष्ट है। प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित है, और शुक्रवार का दिन शुक्र ग्रह सौंदर्य और धन के देवता को समर्पित है। जब त्रयोदशी तिथि शुक्रवार को पड़ती है, तो यह भोग और मोक्ष का अद्भुत संयोग बनता है। भगवान शिव वैरागी हैं, लेकिन शुक्र ग्रह लक्ज़री का प्रतीक है। शुक्र प्रदोष के दिन शिव जी की पूजा करने से व्यक्ति को संसार के सभी सुख प्राप्त होते हैं,जो स्किन प्रोब्लेम्स या शारीरिक कमजोरी से जूझ रहे हैं, उन्हें शुक्र प्रदोष का व्रत अवश्य करना चाहिए। यह व्रत व्यक्ति के पर्सनालिटी में निखार और आकर्षण लाता है।
स्थिर लक्ष्मी की प्राप्ति के लिए आज शाम को प्रदोष काल में शिवलिंग पर गन्ने का रस या चीनी मिश्रित दूध चढ़ाएं। क्यूंकि आज ध्रुव योग है, यह उपाय घर में धन को स्थिर करने में मदद करता है। वैवाहिक सुख की प्राप्ति के लिए पति-पत्नी को मिलकर आज शाम को भगवान शिव को इत्र और सफेद फूल अर्पित करने चाहिए साथ ही सिंगल लोग ये उपाय करते है उन्हें अच्छा लाइफ पार्टनर मिलता है। आज प्रदोष काल में बेलपत्र के पेड़ के नीचे घी का दीपक जलाएं। इससे सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। अगर किसी बच्चे का जन्म मूल नक्षत्र में हुआ हो, तो आज शिव जी को जल चढ़ाते समय उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करें।
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