
31 जनवरी 2026 आज शनिवार, माघ मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि है। आज का दिन चतुर्दशी व्रत है । यह माघ पूर्णिमा की पूर्व संध्या है। आज पुनर्वसु नक्षत्र का प्रभाव रहेगा। पुनर्वसु का अर्थ है पुनः धनवान होना या रोशनी की वापसी । इसके स्वामी देवगुरु बृहस्पति हैं और देवता श्री राम की माता अदिति हैं। आज पुनर्वसु नक्षत्र जीवन में शांति, सुरक्षा और स्थिरता लेकर आया है। साथ ही आज विष्कुम्भ योग बन रहा है। शनिवार और पुनर्वसु का यह संयोग कर्म और ज्ञान के संतुलन के लिए उत्तम है, लेकिन विष्कुम्भ योग की शुरुआत थोड़ी कठिन मानी जाती है, इसलिए संयम जरूरी है।
आज के दिन का आध्यात्मिक महत्व- माघ शुक्ल चतुर्दशी को भगवान शिव की विशेष पूजा की जाती है। कल पूर्णिमा है, इसलिए आज से ही कल्पवास और गंगा स्नान का विशेष महत्व शुरू हो जाता है। पुनर्वसु नक्षत्र आज किसी पुराने रिश्ते/काम को दोबारा शुरू करने के लिए बहुत शुभ है। आज शनिवार है, इसलिए पीपल के वृक्ष में जल चढ़ाना और हनुमान चालीसा का पाठ करना शनि दोषों से मुक्ति दिलाएगा।
आज शनिवार है, इसलिए दिन की शुरुआत काल चौघड़िया से हो रही है। शनिवार की सुबह काल चौघड़िया से शुरू होती है। यह समय शुभ कार्यों के लिए वर्जित है। इस समय कोई भी नया काम, यात्रा या खरीदारी शुरू न करें। पुनर्वसु नक्षत्र का प्रभाव होते हुए भी, काल चौघड़िया में वेट एंड वॉच की नीति अपनाएं।
शुभ चौघड़िया सुबह का यह समय बहुत पॉजिटिव है। चतुर्दशी की पूजा, सत्यनारायण कथा की तैयारी या मंदिर दर्शन के लिए यह समय उत्तम है। पुनर्वसु नक्षत्र की सौम्यता इस समय मन को शांति देगी।
रोग चौघड़िया इस समय शारीरिक आलस्य या पुरानी बीमारी परेशान कर सकती है। शनिवार को रोग चौघड़िया में कर्ज लेने या देने से बचना चाहिए।
उद्वेग चौघड़िया ये समय में मन में चिंता या भविष्य का डर सता सकता है। विष्कुम्भ योग का प्रभाव इस समय रिश्तों में थोड़ी कड़वाहट ला सकता है, इसलिए मौन रहें और बहस न करें।
चल चौघड़िया यह समय स्थिति को सामान्य करेगा। यात्रा, मार्केटिंग या घर के रुके हुए कार्यों को निपटाने के लिए यह समय ठीक है।
लाभ चौघड़िया यह समय आर्थिक फैसलों के लिए बहुत अच्छा है। यदि आप कोई नया वाहन, मशीनरी या लोहे का सामान खरीदना चाहते हैं, तो यह समय चुनें। पुनर्वसु नक्षत्र इस समय लाभ को स्थायी बनाता है।
अमृत चौघड़िया यह आज का बहुत अच्छा समय है। शनिवार को अमृत चौघड़िया बहुत दुर्लभ और शुभ होता है। चतुर्दशी का व्रत पूजन, हवन या किसी बड़ी समस्या के समाधान के लिए यह समय सर्वश्रेष्ठ है।
काल चौघड़िया में शाम ढलने से पहले सतर्क हो जाएं। शनिवार की शाम को काल चौघड़िया दुर्घटना या विवाद का कारण बन सकता है। घर पर ही रहें।
| मुहूर्त का नाम | समय |
| चल | 06:53 बजे से 08:14 बजे तक |
| लाभ | 08:14 बजे से 09:35 बजे तक |
| अमृत | 09:35 बजे से 10:56 बजे तक |
| काल | 10:56 बजे से 12:17 बजे तक |
| शुभ | 12:17 बजे से 01:38 बजे तक |
| रोग | 01:38 बजे से 02:59 बजे तक |
| उद्वेग | 02:59 बजे से 04:20 बजे तक |
| चल | 04:20 बजे से 05:41 बजे तक |
| मुहूर्त का नाम | समय |
| रोग | 05:41 बजे से 07:20 बजे तक |
| काल | 07:20 बजे से 08:59 बजे तक |
| लाभ | 08:59 बजे से 10:38 बजे तक |
| उद्वेग | 10:38 बजे से 12:17 बजे तक |
| शुभ | 12:17 बजे से 01:56 बजे तक |
| अमृत | 01:56 बजे से 03:35 बजे तक |
| चल | 03:35 बजे से 05:14 बजे तक |
| रोग | 05:14 बजे से 06:53 बजे तक |
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