
तेजी से बढ़ता एयर पॉल्यूशन हमारी इम्यूनिटी के लिए बड़ी चुनौती बन चुका है। लंबे समय तक धूल, गाड़ियों के धुएं और इंडस्ट्रियल पॉल्यूशन के संपर्क में रहने से सिर्फ फेफड़ों में जलन ही नहीं होती, बल्कि शरीर की नेचुरल इम्यून सिस्टम भी कमजोर हो जाता है। इससे बार-बार इंफेक्शन, एलर्जी, लगातार थकान और शरीर में सूजन की समस्या बढ़ सकती है। इसलिए, आज के समय में इम्यूनिटी को मजबूत करना कोई विकल्प नहीं, बल्कि जरूरत बन चुका है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया की लगभग पूरी आबादी ऐसे इलाकों में रहती है, जहां एयर क्वालिटी तय मानकों से नीचे है। यह बताता है कि पॉल्यूशन
ग्लोबल समस्या बन चुका है। भारत में भी कई अध्ययनों में यह सामने आया है कि पॉल्यूशन और मौसम में बदलाव के कारण सांस से जुड़ी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं।
2024 में एक शहरी अध्ययन के अनुसार, करीब 18.3 प्रतिशत वयस्क हर साल सांस संबंधी बीमारियों से प्रभावित होते हैं, वहीं राष्ट्रीय स्तर पर माना जाता है कि लगभग हर 6 में से 1 व्यक्ति एलर्जिक राइनाइटिस से जूझता है। ये आंकड़े बताते हैं कि अब हमें अंदर से मजबूत और लंबे समय तक असर करने वाले उपायों की जरूरत है। इसलिए, इम्यूनिटी को मजबूत बनाने वाले उपायों के बारे में हमें डॉ. बत्रा हेल्थकेयर के फाउंडर-चेयरमैन एमेरिटस डॉक्टर मुकेश बत्रा बता रहे हैं।

पॉल्यूशन से होने वाले नुकसान से लड़ने में सही डाइट की भूमिका अहम है। ज्यादा पॉल्यूशन वाले महीनों में ऐसे फल और सब्जियां खानी चाहिए, जो एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर हों, जैसे संतरा, आंवला, बेरीज, पालक और चुकंदर। मौसमी चीजें शरीर को आसानी से अपनाने में मदद करती हैं और नेचुरल डिटॉक्स भी करती हैं।
सूप, काढ़ा, हल्दी वाला भोजन, अदरक, लहसुन और जीरा जैसी चीजें डाइजेशन को सुधारती हैं और इम्यूनिटी को मजबूत करती हैं। साथ ही, पर्याप्त पानी पीना जरूरी है ताकि पॉल्यूशन से शरीर में जमा टॉक्सिन्स बाहर निकल सकें।
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लाइफस्टाइल में छोटे-छोटे, लेकिन नियमित बदलाव बड़ा फर्क ला सकते हैं। प्राणायाम, ब्रीदिंग एक्सरसाइज और रोज हल्की-फुल्की एक्सरसाइज से फेफड़ों की क्षमता बढ़ती है और शरीर में ऑक्सीजन का सही इस्तेमाल होता है।
अच्छी नींद, कम स्क्रीन टाइम और तनाव को कंट्रोल करना भी उतना ही जरूरी है, क्योंकि लगातार तनाव इम्यूनिटी को कमजोर करता है। घर के अंदर हवा को साफ रखने के उपाय और नमक वाले पानी से नाक की सफाई (सलाइन रिंस) करने से सांस की नलियों पर पॉल्यूशन का असर कम होता है।

होम्योपैथी सिर्फ लक्षणों को दबाने पर नहीं, बल्कि शरीर की अंदरूनी इम्यूनिटी को मजबूत करने पर काम करती है। इसमें व्यक्ति की शारीरिक बनावट, मेडिकल हिस्ट्री, लाइफस्टाइल और मानसिक स्थिति को समझकर इलाज किया जाता है।
होम्योपैथिक दवाएं शरीर की इंफेक्शन से लड़ने की क्षमता बढ़ाने, एलर्जी की बार-बार होने वाली समस्या को कम करने और सांस से जुड़ी समस्याओं सही करती हैं। यह तरीका समय के साथ शरीर को पॉल्यूशन जैसे पर्यावरणीय तनावों के साथ बेहतर तरीके से ढलने में मददगार होता है। चूंकि होम्योपैथिक इलाज व्यक्ति विशेष पर आधारित होता है, इसलिए किसी अच्छे होम्योपैथिक डॉक्टर से सलाह लेकर ही दवा शुरू करनी चाहिए।
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आज के समय में पॉल्यूशन से पूरी तरह बच पाना मुश्किल है, लेकिन सही डाइट और बैलेंस लाइफस्टाइल अपनाकर इसके असर को काफी हद तक कम किया जा सकता है। आज इम्यूनिटी को मजबूत करना भविष्य की अच्छी सेहत, ऊर्जा और बेहतर जीवन के लिए अहम निवेश हो सकता है।
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