
आधुनिक लाइफस्टाइल ने हमें चार दीवारों के बीच कैद कर दिया है, जिससे हम प्रकृति के सबसे बड़े वरदान सूर्य से दूर हो गए हैं। एक्सपर्ट का कहना हैं कि विटामिन D सिर्फ एक पोषक तत्व ही नहीं, बल्कि ऊर्जा है। जब इसकी कमी होती है, तब हड्डियां, दिल, ब्रेन और कोशिकाएं कमजोर पड़ने लगती हैं।
अच्छी बात यह है कि विटामिन D बढ़ाने के लिए हर बार दवाइयों या सप्लीमेंट्स की जरूरत नहीं होती। योग, सूर्य नमस्कार, प्राणायाम और सुबह की धूप, ये सभी तरीके शरीर को प्राकृतिक रूप से हेल्दी बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं।
अगर आपके मन में भी सवाल है कि
तो इन सभी सवालों के जवाब दे रहे हैं हिमालयन सिद्धा अक्षर (योग गुरु, लेखक और फाउंडर – अक्षर योग केंद्र)।
आज Urban India Vitamin D Deficiency गंभीर हेल्थ इश्यू बन चुका है। ऑफिस कल्चर, इंडोर लाइफस्टाइल, प्रदूषण और खुले स्थानों की कमी के कारण शरीर सूर्य-ऊर्जा को ठीक से ग्रहण नहीं कर पा रहा। योगिक विज्ञान में सूर्य को ऊर्जा, इम्यूनिटी और जीवन शक्ति का स्रोत माना गया है, लेकिन इससे दूरी शरीर को अंदर से कमजोर कर देती है।

हालांकि भारत में धूप पर्याप्त है, लेकिन
ये सभी कारण Vitamin D Synthesis को प्रभावित करते हैं और UV-B किरणों का असर कम कर देते हैं।
सूर्य नमस्कार सुबह उगते सूर्य के समय किया जाता है, जब सूर्य की किरणें सॉफ्ट और फायदेमंद होती हैं। इस समय शरीर सुरक्षित रूप से UV-B किरणें ग्रहण कर सकता है।
सूर्य नमस्कार करने का सबसे अच्छा समय सुबह 6 से 8 बजे के बीच होता है। इस दौरान सूर्य की किरणें सौम्य और प्राणयुक्त होती हैं। सामान्यतः 12 से 24 चक्र किए जा सकते हैं। शुरुआती लोग 4-6 चक्र से शुरुआत कर धीरे-धीरे संख्या बढ़ा सकते हैं।
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रेगुलर सूर्य नमस्कार और धूप शरीर की प्राकृतिक क्षमता को बढ़ाते हैं। लंबे समय में यह विटामिन D लेवल को संतुलित रख सकता है। हालांकि, गंभीर कमी की स्थिति में सप्लीमेंट बंद करने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।
जी हां, रेगुलर योग और सुबह की धूप शरीर की मेटाबॉलिक अग्नि को जाग्रत करती है। इससे शरीर सूर्य-ऊर्जा को बेहतर तरीके से ग्रहण करने लगता है और समय के साथ विटामिन D का लेवल सही होने लगता है।
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सूर्य-प्रकाश से सेरोटोनिन हार्मोन का स्राव होता है, जो खुशी, एकाग्रता और भावनात्मक स्थिरता बढ़ाता है। योगिक दृष्टि से यह तेजस को जाग्रत करता है, जो इम्यूनिटी और मूड से जुड़ा है।
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