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हड्डियां नहीं, पूरा शरीर रोता है जब Vitamin D होता है कम, हिमालय सिद्धा अक्षर के टिप्‍स से बढ़ाएं

आधुनिक जीवनशैली से विटामिन D की कमी बढ़ रही है, जिससे हड्डियां, दिल और दिमाग कमजोर हो रहे हैं। आचार्य अक्षर बताते हैं कि सूर्य नमस्कार, प्राणायाम और सुबह की धूप प्राकृतिक रूप से विटामिन D बढ़ाती हैं। शहरी भारत में यह एक बड़ी समस्या है। नियमित योग और धूप शरीर की सूर्य-ऊर्जा ग्रहण करने की क्षमता बढ़ाते हैं, जिससे इम्‍यून सिस्‍टम और मूड बेहतर होता है। गंभीर कमी में डॉक्टर की सलाह जरूरी है।
Editorial
Updated:- 2026-01-22, 15:59 IST

आधुनिक लाइफस्‍टाइल ने हमें चार दीवारों के बीच कैद कर दिया है, जिससे हम प्रकृति के सबसे बड़े वरदान सूर्य से दूर हो गए हैं। एक्‍सपर्ट का कहना हैं कि विटामिन D सिर्फ एक पोषक तत्व ही नहीं, बल्कि ऊर्जा है। जब इसकी कमी होती है, तब हड्डियां, दिल, ब्रेन और कोशिकाएं कमजोर पड़ने लगती हैं।

अच्छी बात यह है कि विटामिन D बढ़ाने के लिए हर बार दवाइयों या सप्लीमेंट्स की जरूरत नहीं होती। योग, सूर्य नमस्कार, प्राणायाम और सुबह की धूप, ये सभी तरीके शरीर को प्राकृतिक रूप से हेल्दी बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं।

अगर आपके मन में भी सवाल है कि

  • क्या धूप से विटामिन D की कमी पूरी हो सकती है?
  • सूर्य नमस्कार विटामिन D कैसे बढ़ाता है?
  • क्या योग विटामिन D की गोलियों का विकल्प हो सकता है?

तो इन सभी सवालों के जवाब दे रहे हैं हिमालयन सिद्धा अक्षर (योग गुरु, लेखक और फाउंडर – अक्षर योग केंद्र)

शहरी भारत में विटामिन D की कमी क्यों बन चुकी है बड़ी समस्या?

आज Urban India Vitamin D Deficiency गंभीर हेल्थ इश्यू बन चुका है। ऑफिस कल्चर, इंडोर लाइफस्टाइल, प्रदूषण और खुले स्थानों की कमी के कारण शरीर सूर्य-ऊर्जा को ठीक से ग्रहण नहीं कर पा रहा। योगिक विज्ञान में सूर्य को ऊर्जा, इम्यूनिटी और जीवन शक्ति का स्रोत माना गया है, लेकिन इससे दूरी शरीर को अंदर से कमजोर कर देती है।

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जब धूप भरपूर है तो विटामिन D कम क्यों?

हालांकि भारत में धूप पर्याप्त है, लेकिन

  • ज्यादा समय घर के अंदर रहना
  • ढकी हुई गाड़ियों में सफर
  • जरूरत से ज्यादा सनस्क्रीन
  • शरीर को ढकने वाले कपड़े
  • वायु प्रदूषण

ये सभी कारण Vitamin D Synthesis को प्रभावित करते हैं और UV-B किरणों का असर कम कर देते हैं।

सूर्य नमस्कार से कैसे बढ़ता है विटामिन D?

सूर्य नमस्कार सुबह उगते सूर्य के समय किया जाता है, जब सूर्य की किरणें सॉफ्ट और फायदेमंद होती हैं। इस समय शरीर सुरक्षित रूप से UV-B किरणें ग्रहण कर सकता है।

  • ब्लड सर्कुलेशन बढ़ाता है।
  • मणिपूर चक्र को एक्टिव करता है।
  • शरीर को सूर्य-ऊर्जा ग्रहण करने के लिए तैयार करता है।

प्राणायाम कैसे बढ़ाता है इम्यूनिटी और ऊर्जा?

  • कपालभाति सौर ऊर्जा को एक्टिव करता है।
  • अनुलोम-विलोम इड़ा-पिंगला नाड़ियों को संतुलित करता है।
  • ऑक्सीजन और प्राण प्रवाह बढ़ाता है
  • इससे शरीर विटामिन D को बेहतर तरीके से उपयोग करने लगता है।

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सूर्य नमस्कार कब और कितनी देर करें?

सूर्य नमस्कार करने का सबसे अच्‍छा समय सुबह 6 से 8 बजे के बीच होता है। इस दौरान सूर्य की किरणें सौम्य और प्राणयुक्त होती हैं। सामान्यतः 12 से 24 चक्र किए जा सकते हैं। शुरुआती लोग 4-6 चक्र से शुरुआत कर धीरे-धीरे संख्या बढ़ा सकते हैं।

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क्या सूर्य नमस्कार विटामिन D सप्लीमेंट का विकल्प है?

रेगुलर सूर्य नमस्कार और धूप शरीर की प्राकृतिक क्षमता को बढ़ाते हैं। लंबे समय में यह विटामिन D लेवल को संतुलित रख सकता है। हालांकि, गंभीर कमी की स्थिति में सप्लीमेंट बंद करने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।

क्या रेगुलर योग और धूप विटामिन D बढ़ाते हैं?

जी हां, रेगुलर योग और सुबह की धूप शरीर की मेटाबॉलिक अग्नि को जाग्रत करती है। इससे शरीर सूर्य-ऊर्जा को बेहतर तरीके से ग्रहण करने लगता है और समय के साथ विटामिन D का लेवल सही होने लगता है।

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इम्यूनिटी और मूड के लिए क्यों जरूरी है सूरज की रोशनी?

सूर्य-प्रकाश से सेरोटोनिन हार्मोन का स्राव होता है, जो खुशी, एकाग्रता और भावनात्मक स्थिरता बढ़ाता है। योगिक दृष्टि से यह तेजस को जाग्रत करता है, जो इम्यूनिटी और मूड से जुड़ा है।

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