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hoax bomb threats

क्या है Hoax Bomb Threat मैसेज, जिसके कारण अपराधी लोगों के मन में बैठाता है डर?

मैसूरु के श्रीनिवास लुईस के मामले ने 'होक्स बम थ्रेट' की गंभीरता को उजागर किया है। बेरोजगारी और तनाव के कारण उन्होंने 1000 से अधिक फर्जी ईमेल भेजे। 'होक्स बम थ्रेट' जानबूझकर फैलाई गई झूठी बम की जानकारी है, जो दहशत और व्यवस्था में बाधा डालती है। 
Editorial
Updated:- 2026-03-30, 17:41 IST

हाल ही में दिल्ली पुलिस द्वारा मैसूरु से गिरफ्तार किए गए 47 वर्षीय श्रीनिवास लुईस के मामले ने देश को हिलाकर रख दिया है। बेरोजगारी और स्ट्रेस के चलते इस व्यक्ति ने देशभर के स्कूलों, अदालतों और सरकारी दफ्तरों को 1000 से अधिक फर्जी ईमेल और मैसेज भेजे। ऐसे में 'होक्स बम थ्रेट' (Hoax Bomb Threat) के बारे में पता होना जरूरी है। आज का हमारा लेख इसी विषय पर है। आज हम आपको अपने इस लेख के माध्यम से बताएंगे कि यह 'होक्स बम थ्रेट' (Hoax Bomb Threat) क्या है और इससे कैसे बचा जाए। पढ़ते हैं आगे... 

क्या होता है होक्स बम थ्रेट?

'होक्स' (Hoax) का अर्थ होता है 'छलावा' या 'मजाक'। जब कोई व्यक्ति जानबूझकर किसी स्थान पर बम होने की झूठी जानकारी फैलाता है, तो इसे 'होक्स बम थ्रेट' कहते हैं। अपराधी अक्सर ईमेल, फोन कॉल या सोशल मीडिया के जरिए ऐसी धमकियां देते हैं ताकि लोगों के बीच दहशत पैदा की जा सके और सेफ्टी व्यवस्था को अस्त-व्यस्त किया जा सके।

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अपराधी लोगों के मन में डर क्यों बैठाते हैं?

  • अपराधी का मुख्य उद्देश्य व्यवस्था को ठप करना और डर का माहौल बनाना होता है।
  • जैसा कि हाल के मामले में दिखाई पड़ा, बेरोजगारी या निराशा के चलते लोग ध्यान खींचने के लिए ऐसे गलत रास्ते चुनते हैं।
  • कभी-कभी पुलिस के रिस्पॉन्स टाइम को जांचने के लिए भी ऐसा करते हैं।

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इन संदेशों से कैसे हो रही है ठगी और नुकसान?

  • एक फर्जी कॉल के कारण पुलिस, बम निरोधक दस्ता और एम्बुलेंस को तैनात करना पड़ता है, जिससे लाखों का सरकारी पैसा बर्बाद होता है।
  • आम नागरिकों, स्कूली बच्चों और उनके माता-पिता के मन में गहरा डर बैठ जाता है।

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कई बार इन फर्जी मैसेजों में लिंक दिए होते हैं, जिन पर क्लिक करने से यूजर का डेटा चोरी हो सकता है।

होक्स मैसेज की पहचान कैसे करें?

  • अक्सर ये मैसेज मुफ्त या अस्थायी ईमेल डोमेन से भेजे जाते हैं।
  • इन मैसेज में अक्सर भाषा त्रुटिपूर्ण होती है और चेतावनी बहुत ही अलग अंदाज में दी जाती है।
  • यदि संदेश किसी अनजान नंबर या सोशल मीडिया हैंडल से आया है, तो वह फर्जी हो सकता है।

बचाव के तरीके

  • सबसे पहले शांत रहें। आपके डरने से अपराधी की जीत महसूस होती है।
  • किसी भी संदिग्ध मैसेज को डिलीट करने के बजाय तुरंत 112 या नजदीकी पुलिस स्टेशन को सूचित करें।

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Images: Freepik/shutterstock

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