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पेरेंट्स और बच्चों के बीच का रिश्ता बेहद ही खूबसूरत रिश्ता होता है, लेकिन कभी-कभी उम्र का एक ऐसा पड़ाव भी आता है, जहां पर खामोशी आ जाती है। अक्सर पेरेंट्स की शिकायत होती है कि हमारा बच्चा अब हमसे कुछ शेयर नहीं करता और वो एकदम चुपचाप रहने लगा है। वहीं, बच्चों के मन में क्या चल रहा होता है यह माता-पिता को पता ही नहीं लगता। अगर आप भी इस तरीके की समस्या का सामना कर रही हैं तो यहां दिए गए कुछ तरीके आपके बेहद काम आ सकते हैं। आज का हमारा लेख आपके लिए है। आज हम आपको अपने इस लेख के माध्यम से बताएंगे यदि आपका बच्चा खामोश है और आप नहीं पता लगा पा रही हैं कि उसके मन में क्या चल रहा है तो किन तरीकों को अपनाएं। इसके लिए हमने कोच और हीलर, लाइफ अल्केमिस्ट, साइकोथेरेपिस्ट डॉ. चांदनी तुगनैत (Dr. Chandni Tugnait) से भी बात की है। पढ़ते हैं आगे...
जब बच्चा कुछ बताना शुरू करता है, तो हम तुरंत उसे सही-गलत का पाठ पढ़ाने लगते हैं या अपनी सलाह देने लगते हैं। इससे बच्चा अगली बार बात साझा करने से कतराता है। ऐसे में चुप्पी तोड़ने का पहला नियम है एक्टिव रूप से सुनें। जब बच्चा बोले तो अपना फोन एक तरफ रख दें, उसकी आंखों में देखें और उसे महसूस कराएं कि उसकी बात आपके लिए जरूरी है। जब उन्हें लगेगा कि उन्हें 'जज' नहीं किया जा रहा, तो वे खुलकर बोलेंगे।
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कभी-कभी पैरेलल कम्युनिकेशन ज्यादा काम करता है। जैसे साथ में वॉक करते समय, कार चलते समय, किचन में काम करते समय आप बच्चों से बात पूछें। जब सीधी नजर नहीं मिलती तो बच्चा कम दबाव महसूस करता है और अपनी भावनाओं को आसानी से व्यक्त कर पाता है।
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अगर बच्चों में सीधे सवाल पूछें जाएं कि तुम उदास क्यों हो या तो वो आपसे कह देगा, पता नहीं। ऐसे में आप पूछें कि आज स्कूल में तुम्हारा सबसे अच्छा पल क्या था या उस स्थिति में तुम्हें कैसा महसूस हुआ। खुले सवालों से बातचीत का दायरा भी बढ़ता है। कम्युनिकेशन कभी भी एक तरफा नहीं होती।
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अगर आप चाहती हैं कि बच्चा आपसे दिल की बात करे तो आप भी अपने दिन की छोटी-मोटी परेशानियां, अपनी बचपन की गलतियां उसके साथ शेयर करें। जब बच्चे देखते हैं कि उनके माता-पिता भी अपनी भावना व्यक्त करते हैं तो उन्हें अपनी बात कहना सुरक्षित और सामान्य लगने लगता है।
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