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स्पेस में 6 महीने से ज्यादा रहने पर बदल जाता है दिमाग के काम करने का तरीका...किसी एस्ट्रोनॉट को दिखाई देती हैं परियां तो किसी को सुनाई देती हैं अजीब आवाजें, जानें क्या है इसके पीछे की साइंस

Sunita Williams Return to Earth: सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर कल लगभग 9 महीने बाद स्पेस से धरती वापस आ रहे हैं। क्या आपको पता है कि जब कोई एस्ट्रोनॉट इतने लंबे वक्त के बाद स्पेस से धरती पर आता है, तो उसके दिमाग में क्या बदलाव होते हैं?
Editorial
Updated:- 2025-03-18, 23:00 IST

नासा की भारतीय मूल की अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स अपने सहयात्री बुच विल्मोर के साथ कल धरती पर वापसी कर रही हैं। वह अंतरिक्ष में 9 महीने और 13 दिवों का समय बिताकर लौट रही हैं। इन दोनों का यान भारतीय समयानुसार कल सुबह तड़के 3 बजकर 27 मिनट पर फ्लोरिडा के तट पर लैंड कर सकता है। सुनीता ने कुछ वक्त पहले बताया था कि वह चलना, बैठना और सोना भी भूल चुकी हैं। दरअसल, कोई भी एस्ट्रोनॉट जब अंतरिक्ष में लंबा समय बिताने के बाद धरती पर लौटता है, तो इसके शरीर पर कई प्रभाव पड़ते हैं। फिजिकली और मेंटली भी इसका बॉडी पर असर लंबे वक्त तक रहता है। दरअसल, स्पेस में ग्रेविटी नहीं है और लंबे समय तक जीरो ग्रेविटी में रहने के बाद जब कोई अंतरिक्ष यात्री धरती पर आता है, तो उसे कई तरह की चीजों का सामना करना पड़ता है। क्या आपको पता है कि जब कोई एस्ट्रोनॉट इतने लंबे वक्त के बाद स्पेस से धरती पर आता है, तो उसके दिमाग में क्या बदलाव होते हैं? इस बारे में स्पेस से वापिस आए कुछ एस्ट्रोनॉट्स से भी बताया है और कुछ रिसर्च में भी इस तरह की बातें सामने आई हैं। चलिए, आपको बताते हैं।

लंबे वक्त तक स्पेस में रहने के बाद एस्ट्रोनॉट्स के दिमाग में होते हैं ये बदलाव

astronauts brain have major changes when they return to earth

जब कोई एस्ट्रोनॉट 6 महीने से ज्यादा वक्त बिताकर लौटता है, तो उनके दिमाग में कई बदलाव देखने को मिलते हैं। एक रिपोज्ञट के मुताबिक, कुछ एस्ट्रोनॉट्स के दिमाग का स्पेस में जाने से पहले और बाद में एमआरआई किया गया। इसके बाद दोनों को तुलना की गई और उनके दिमाग के खास हिस्से पेरिवैस्कुलर स्पेस पर इसका असर नजर आया। स्पेस से लौटने के बाद एक अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री डोनॉल्ड पेटिट ने बताया कि उन्हें आंखें बंद करते ही परियां दिखाई देने लगती थीं और जागने पर उन्हें अजीब सी रोशनी नजर आती थी। उनके अलावा भी कई एस्ट्रोनॉट्स इस तरह की तेज रोशनी या आवाजों की शिकायत कर चुके थे। एक रिसर्च में यह बात भी सामने आई थी कि स्पेस में जाने के बाद अंतरिक्ष यात्रियों का दिमाग अलग तरह से काम करने लगता है। ऐसा स्पेस में मौजूद खतरनाक रेडिएशन के कारण होता है। इसे न्यूरोप्लासिसिटी कहा जाता है।

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कमजोरी और थकान का भी होता है अनुभव

Sunita Williams Return to Earth
इसके अलावा, कुछ अंतरिक्ष यात्रियों को स्पेस में वापिस लौटने के बाद, थकान और कमजोरी का अनुभव भी होता है। ऐसा ओटावा यूनिवर्सिटी की एक रिसर्च में भी सामने आया था। जमीन पर लौटने के बाद, एस्ट्रोनॉट्स को एनीमिया भी हो जाता है।


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