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क्या आप जानती हैं भारत की स्वीट डिश मालपुआ का दिलचस्प इतिहास

मालपुआ का इतिहास काफी पुराना है और अलग-अलग जगहों पर इसे विभिन्न नामों से भी जाना जाता है। आइए जानते हैं इस स्वीट डिश से जुड़ी खास बातें।
Editorial
Updated:- 2021-12-07, 17:33 IST

पैनकेक की तरह दिखने वाला मालपुआ भारत का मशहूर स्वीट डिश में से एक है। बचपन में दादी-नानी अक्सर किसी खास ओकेजन पर इस डिश को बनाया करती थी। बच्चे और बड़े सभी आज भी इसे बेहद चाव से खाना पसंद करते हैं। समय के साथ इस डिश को बनाने में कई चीजों का इस्तेमाल किया जाने लगा है, लेकिन आप सिंपल आटे से इसे आसानी से बना सकती हैं। हालांकि, अब इसे मैदे से भी बनाया जाता है और चाशनी में डुबोने के बाद ड्राई फ्रूट्स से गार्निश किया जाता है। यही वजह है कि समय के साथ मालपुए का स्वाद बढ़ता ही चला गया।

त्योहारों के समय मालपुआ हर भारतीय घरों में बनाया जाता है। हालांकि, कई लोगों को लगता है कि मालपुआ सिर्फ भारत में ही बनाया जाता है, जबकि यह अन्य देशों में भी यह उतना ही मशहूर है। भारत के अलावा बांग्लादेश, नेपाल और पाकिस्तान जैसे देशों में मालपुआ बेहद पसंद किया जाता है। बता दें कि भारत का ये फेमस स्वीट डिश का इतिहास काफी पुराना है, तब इसे बनाने का तरीका भी अलग हुआ करता था। तो चलिए जानते हैं इसके इतिहास के बारे में और बताते हैं पहले उसे क्या कहा जाता था।

ऋग्वेद में सबसे पहले किया गया उल्लेख

malpua

चारों वेद में सबसे पुराना है ऋग्वेद, जहां सबसे पहले मालपुआ का उल्लेख 'अपुपा' के रूप में किया गया। शुरुआत में इसे जौ से बनाया जाता था। सबसे पहले घी में तलकर और फिर शहद में डुबोया जाता था। बता दें कि ऋग्वेद में भोजन एक महत्वपूर्ण पहलू हुआ करता था, जिसमें अपुपा का जिक्र किया गया। समय के साथ मालपुआ बनाने के तरीके में भी बदलाव आया। दूसरी शताब्दी में अपुपा को संशोधित किया गया था और उसे गेहूं के आटे, दूध, मक्खन, चीनी, इलायची जैसी चीजों को मिलाकर बनाया जाने लगा। दूसरी शताब्दी में इसका एक और नाम सामने आया। अब इसे 'पुपालिके' के नाम से परोसा जाने लगा। पुपालिके का अर्थ है गेहूं या चावल के आटे का एक छोटा केक जिसमें गुड़ भरकर घी में डीप फ्राई किया जाता है। कुछ स्थानों पर इसे 'भरवां अपुपा' भी कहा जाता था।

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मालपुआ की एक नहीं कई हैं वैरायटी

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जैसे-जैसे लोगों को मालपुआ का स्वाद मिलता गया, वैसे-वैसे इसमें कई वैरायटी भी देखने को मिली। यह भारतीय डिश जब दूसरे देशों में गया तो इसकी वैरायटी बदल गई। अंडे और मावा के साथ तैयार किया जाने लगा है। फेस्टिव सीजन और खास ओकेजन पर वहां मालपुआ अंडे और मावा तैयार कर परोसा जाता है। पाकिस्तान में मालपुआ खास कर इस तरीके से बनाया जाता है। वहीं बांग्लादेश में इस डिश को फल के साथ मैश करके बनाया जाता है। जब भी मालपुआ का बैटर तैयार किया जाता है तो उसके साथ केला या फिर अन्य फलों को मैश कर मिक्स किया जाता है। इसके अलावा नेपाल में भी मालपुआ बनाया जाता है। नेपाल में इसे 'मारपा' कहा जाता है, जिसे मैदा, केले, सौंफ के बीज, दूध और चीनी मिक्स कर बनाया जाता है। बता दें कि भारत में मालपुआ की लोकप्रियता किसी मिठाई से कम नहीं। खासकर दिवाली, ईद, होली पर यह हर घर में बनाया जाता है। यही नहीं पूरे भारत में इसे अलग-अलग नामों से जाना जाता है, लेकिन पकवान का स्वाद लगभग एक जैसा ही है।

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जगन्नाथ मंदिर का प्रसाद है मालपुआ

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भारत के मशहूर जगन्नाथ मंदिर में पुरी के साथ-साथ मालपुआ भी हर दिन सुबह सबसे पहले प्रसाद के रूप में चढ़ाया जाता है। वहां उसे अमालू के नाम से जाना जाता है। भगवान जगन्नाथ को चढ़ाए जाने वाले छप्पन भोग में से एक अमालू भी शामिल हैं। इसे शाम में पूजा के वक्त भी चढ़ाया जाता है। मालपुआ के अन्य वैरायटी में केले के अलावा अनानास या फिर आम जैसे फलों का भी उपयोग किया जाता है। बंगाली, मैथली और ओड़िसा में मालपुआ जब भी पारंपरिक रूप से तैयार किया जाता है तो उसमें केवल गाढ़े दूध और थोड़े से आटे को मिक्स कर बनाया जाता है।

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