Sun Feb 15, 2026 | Updated 02:32 PM IST
will makar sankranti be celebrated on 15 january for next 56 years

क्या अगले 56 सालों तक 15 जनवरी को मनाई जाएगी मकर संक्रांति? ज्योतिष से जानें

मकर संक्रांति तब मनाई जाती है जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश करते हैं। चूंकि हिंदू कैलेंडर चंद्रमा की गति पर आधारित होता है और ग्रेगोरियन कैलेंडर (अंग्रेजी कैलेंडर) सूर्य पर, इसलिए इन दोनों के बीच समय का एक सूक्ष्म अंतर पैदा हो जाता है। 
Editorial
Updated:- 2026-01-15, 07:15 IST

मकर संक्रांति का त्योहार आमतौर पर हमारे मन में 14 जनवरी की तारीख के साथ बसा हुआ है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों से हम देख रहे हैं कि यह 15 जनवरी को मनाई जाने लगी है। इसके पीछे कोई सामाजिक बदलाव नहीं बल्कि पूरी तरह से ज्योतिषीय कारण हैं। मकर संक्रांति तब मनाई जाती है जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश करते हैं। चूंकि हिंदू कैलेंडर चंद्रमा की गति पर आधारित होता है और ग्रेगोरियन कैलेंडर (अंग्रेजी कैलेंडर) सूर्य पर, इसलिए इन दोनों के बीच समय का एक सूक्ष्म अंतर पैदा हो जाता है। यही कारण है कि हर कुछ दशकों में मकर संक्रांति की तारीख एक दिन आगे खिसक जाती है। आइये जानते हैं इस बारे में वृंदावन के ज्योतिषाचार्य राधाकांत वत्स से विस्तार में।

ज्योतिषीय गणना और अयन का प्रभाव

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, पृथ्वी अपनी धुरी पर घूमते समय बहुत धीमी गति से पीछे की ओर झुकती है जिसे 'अयन चलन' कहा जाता है। इस प्रक्रिया के कारण सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने का समय हर साल लगभग 20 मिनट बढ़ जाता है।

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हालांकि यह समय बहुत कम लगता है, लेकिन लगभग 72 से 80 साल के अंतराल में यह अंतर बढ़कर पूरा एक दिन हो जाता है। यही कारण है कि जो संक्रांति पुराने समय में 13 या 14 जनवरी को आती थी वह अब स्थाई रूप से 15 जनवरी की ओर शिफ्ट हो रही है।

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अगले 56 वर्षों का गणित

गणित और खगोलीय गणनाओं के अनुसार, वर्तमान में सूर्य का मकर राशि में प्रवेश अक्सर 14 जनवरी की देर रात या 15 जनवरी की सुबह हो रहा है। चूंकि हिंदू धर्म में 'उदया तिथि' यानी कि सूर्योदय के समय की तिथि का महत्व होता है, इसलिए पुण्यकाल 15 जनवरी को ही माना जाता है।

ज्योतिषियों का अनुमान है कि अगले 50 से 60 वर्षों तक सूर्य के राशि परिवर्तन का समय 14 और 15 जनवरी के बीच ही झूलता रहेगा। अधिकांश वर्षों में यह 15 जनवरी को ही मनाई जाएगी, हालांकि लीप ईयर के कारण कभी-कभी यह वापस 14 जनवरी को भी पड़ सकती है।

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क्या भविष्य में तारीख और आगे बढ़ेगी?

जी हां, यह खगोलीय सत्य है। ज्योतिषीय गणना कहती है कि लगभग साल 2100 के बाद मकर संक्रांति की तारीख 16 जनवरी हो जाएगी। इसी तरह सदियों पहले यानी महान गणितज्ञ आर्यभट्ट के समय में यह त्योहार दिसंबर के आखिर में या जनवरी के शुरुआती सप्ताह में मनाया जाता था।

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यह बदलाव बहुत धीमा होता है, इसलिए एक इंसान के जीवनकाल में हमें यह तारीख स्थिर ही लगती है, लेकिन ब्रह्मांडीय घड़ी के अनुसार यह निरंतर आगे बढ़ रही है। भले ही अंग्रेजी कैलेंडर की तारीख बदल जाए, लेकिन महत्व उस 'क्षण' का है जब सूर्य धनु से मकर राशि में कदम रखते हैं।

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image credit: herzindagi 

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