
हिंदू धर्म में महाशिवरात्रि का पर्व अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण माना जाता है। मान्यता है कि इसी दिन भगवान शिव और माता पार्वती का दिव्य विवाह हुआ था। इस शुभ अवसर पर शिव भक्त पूरे श्रद्धा भाव से व्रत रखते हैं, रात्रि जागरण करते हैं और चार प्रहर की पूजा करते हैं। वर्ष 2026 में महाशिवरात्रि का पर्व 15 फरवरी को मनाया जाएगा और व्रत का पारण 16 फरवरी को किया जाएगा।
मध्य प्रदेश, छिंदवाड़ा के ज्योतिषाचार्य एवं पंडित सौरभ त्रिपाठी के अनुसार, "जितना महत्व व्रत के संकल्प का होता है, उतना ही आवश्यक उसका सही समय पर विधिपूर्वक पारण करना भी होता है। पारण के कुछ नियम होते हैं, जिनका पालन करना जरूरी है।"
पंडित सौरभ त्रिपाठी के अनुसार, "16 फरवरी, सोमवार के दिन सुबह 6 बजकर 33 मिनट से लेकर दोपहर 3 बजकर 24 मिनट तक व्रत का पारण किया जा सकता है। व्रत का पारण करने से पहले आपको स्नान और शिव पूजा करनी चाहिए और भगवान को भोग लगाना चाहिए।"

पंडित सौरभ त्रिपाठी के अनुसार, 16 फरवरी 2026, सोमवार को सुबह 6 बजकर 33 मिनट से दोपहर 3 बजकर 24 मिनट तक व्रत पारण का शुभ समय रहेगा।
व्रत खोलने से पहले स्नान करना, भगवान शिव की पूजा करना और भोग अर्पित करना अत्यंत आवश्यक माना गया है। बिना पूजा किए सीधे भोजन करना उचित नहीं होता।
महाशिवरात्रि का व्रत श्रद्धा, संयम और नियमों का पर्व है। सही मुहूर्त में विधिपूर्वक पारण करने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख-शांति तथा समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है।
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