why we should make food more than required at home

जरूरत से थोड़ा ज्यादा बनाना चाहिए घर में खाना, जानें क्यों शास्त्रों में कहा गया है इसे शुभ

अक्सर घरों में माताओं-बहनों को यह कहते सुना होगा कि खाना हमेशा गिनती से थोड़ा ज्यादा ही बनाना चाहिए। इसके पीछे केवल भूख मिटाना उद्देश्य नहीं है बल्कि शास्त्रों में छिपा एक गूढ़ रहस्य है।
Editorial
Updated:- 2026-01-13, 13:36 IST

हिंदू धर्म और भारतीय संस्कृति में भोजन को केवल पेट भरने का साधन नहीं बल्कि अन्नपूर्णा का स्वरूप माना गया है। शास्त्रों के अनुसार, रसोई घर में बरकत और सुख-शांति तभी आती है जब वहां अन्न का सम्मान होता है। अक्सर घरों में माताओं-बहनों को यह कहते सुना होगा कि खाना हमेशा गिनती से थोड़ा ज्यादा ही बनाना चाहिए। इसके पीछे केवल भूख मिटाना उद्देश्य नहीं है बल्कि यह हमारी प्राचीन परंपराओं अतिथि देवो भवः की भावना और आध्यात्मिक दृष्टिकोण से जुड़ा है। थोड़ा अतिरिक्त भोजन बनाना घर में समृद्धि लाने और नकारात्मकता को दूर करने का एक असरदार तरीका माना जाता है। ऐसे में आइये जानते हैं वृंदावन के ज्योतिषाचार्य राधाकांत वत्स से कि आखिर क्यों घर में हमेशा जरूरत से थोड़ा ज्यादा खाना बनाना चाहिए और क्या है इसके पीछे का महत्व?

जरूरत से ज्यादा खाना बनाने का महत्व 

शास्त्रों के अनुसार, जिस घर की रसोई में अन्न की कमी नहीं होती वहां माता लक्ष्मी और माता अन्नपूर्णा का वास हमेशा बना रहता है। यह माना जाता है कि भोजन बनाते समय वह केवल परिवार के सदस्यों के लिए ही नहीं, बल्कि उन अदृश्य शक्तियों और अचानक आने वाले मेहमानों के लिए भी होता है जिनका हमारे जीवन में महत्वपूर्ण स्थान है।

khana zarurat se zyada banane ka mahatva

अथिति देवो भवः के संस्कार हमें सिखाते हैं कि द्वार पर आए किसी भी व्यक्ति को खाली हाथ या भूखे पेट नहीं भेजना चाहिए। अगर भोजन जरूरत से थोड़ा ज्यादा होगा तो आप बिना किसी संकोच के किसी जरूरतमंद या अतिथि का स्वागत कर सकेंगे। इसके अलावा, हिंदू शास्त्रों में पंचयज्ञ का वर्णन है जिसमें से एक है भूत यज्ञ यानी पशु-पक्षियों और अन्य जीवों को भोजन कराना।

यह भी पढ़ें- क्या आप भी खिला देती हैं गाय को बासी या झूठा खाना? जानें इसके अशुभ प्रभाव

जब हम थोड़ा ज्यादा खाना बनाते हैं तो उससे गाय, कुत्ते, पक्षियों या चींटियों के लिए हिस्सा निकालना आसान हो जाता है। सनातन धर्म में भोजन की पहली रोटी गाय की और आखिरी रोटी कुत्ते की निकालने की परंपरा है। यह अतिरिक्त भोजन ही हमें इस योग्य बनाता है कि हम अपने साथ-साथ दूसरे जीवों का भी पेट भर सकें जिससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

khana zarurat se zyada banane ke labh

आध्यात्मिक दृष्टि से देखा जाए तो भोजन की अधिकता मन में 'संपन्नता' का भाव पैदा करती है। अगर खाना बिल्कुल नाप-तोलकर बनाया जाए और अंत में कम पड़ जाए तो बनाने वाले और खाने वाले दोनों के मन में संकुचित भावना या चिंता पैदा होती है। इसके विपरीत, थोड़ा अतिरिक्त भोजन इस बात का प्रतीक है कि घर में खुशहाली है और भंडार भरे हुए हैं।

यह भी पढ़ें- Expert Tips: भोजन से पहले भोजन मंत्र क्यों जरूरी है? क्या कहता है शास्त्र?

वास्तु शास्त्र के अनुसार, रसोई घर का सीधा संबंध घर की आर्थिक स्थिति से होता है। खाली बर्तन या बिल्कुल खत्म हो चुका भोजन दरिद्रता का संकेत माना जाता है। जब रसोई में थोड़ा अतिरिक्त अन्न बचता है तो वह घर की समृद्धि को खींचता है। यह भी कहा जाता है कि रात को रसोई में बिल्कुल भी अन्न न बचना शुभ नहीं होता, इसलिए थोड़ा अधिक भोजन बनाना चाहिए।

अगर आपको यह स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।

image credit: herzindagi 

यह विडियो भी देखें

Herzindagi video

Disclaimer

हमारा उद्देश्य अपने आर्टिकल्स और सोशल मीडिया हैंडल्स के माध्यम से सही, सुरक्षित और विशेषज्ञ द्वारा वेरिफाइड जानकारी प्रदान करना है। यहां बताए गए उपाय, सलाह और बातें केवल सामान्य जानकारी के लिए हैं। किसी भी तरह के हेल्थ, ब्यूटी, लाइफ हैक्स या ज्योतिष से जुड़े सुझावों को आजमाने से पहले कृपया अपने विशेषज्ञ से परामर्श लें। किसी प्रतिक्रिया या शिकायत के लिए, [email protected] पर हमसे संपर्क करें।

;