the only kaurava who was not killed by pandavas during mahabharata

द्रौपदी के चीर हरण का किया था उस अकेले ने विरोध, जानें कौन था इकलौता कौरव जिसे पांडवों ने नहीं मारा था

जब भरी सभा में दुर्योधन और दुशासन द्रौपदी का अपमान कर रहे थे, तब भीष्म पितामह, द्रोणाचार्य और धृतराष्ट्र जैसे दिग्गज मौन थे। उस समय एक अकेले कौरव भाई ने अपनी आवाज उठाई थी।
Editorial
Updated:- 2026-02-07, 09:03 IST

महाभारत की कथा अधर्म पर धर्म की विजय का सबसे बड़ा उदाहरण है, जहां कुरुक्षेत्र के युद्ध में कौरवों के पूरे कुल का विनाश हो गया था, लेकिन सौ भाइयों की इस भीड़ में एक ऐसा नाम भी था जिसने अधर्म के बीच रहकर भी धर्म का साथ दिया। जब भरी सभा में दुर्योधन और दुशासन द्रौपदी का अपमान कर रहे थे, तब भीष्म पितामह, द्रोणाचार्य और धृतराष्ट्र जैसे दिग्गज मौन थे। उस समय एक अकेले कौरव भाई ने अपनी आवाज उठाई थी। इस साहस और न्यायप्रियता के कारण ही उस कौरव को पांडवों ने युद्ध में नहीं मारा था। आइये जानते हैं इस बारे में वृंदावन के ज्योतिषाचार्य राधाकांत वत्स से।

कौन था इकलौता कौरव जिसे पांडवों ने नहीं मारा था? 

वह कौरव भाई जिसने द्रौपदी के चीर हरण का विरोध किया था, उसका नाम विकर्ण था। विकर्ण धृतराष्ट्र के सौ पुत्रों में से एक था, लेकिन उसका चरित्र अपने अन्य भाइयों विशेषकर दुर्योधन से बिल्कुल अलग था। उसे महाभारत का 'न्यायप्रिय कौरव' कहा जाता है। जब द्युत क्रीड़ा के खेल में द्रौपदी को दांव पर लगाया गया और अपमानित किया गया तो विकर्ण ने इसे शास्त्रों और मानवता के विरुद्ध बताया था।

kis kaurav ko pandavo ne nahi mara tha

जब दुशासन द्रौपदी को सभा में खींचकर लाया तो द्रौपदी ने वहां उपस्थित सभी बड़ों से प्रश्न किया कि 'क्या उसे दांव पर लगाना उचित था?' उस समय सभी मौन रहे, लेकिन विकर्ण ने खड़े होकर साफ शब्दों में कहा कि 'यह पूरी तरह से अधर्म है।' उसने तर्क दिया कि युधिष्ठिर स्वयं को हारने के बाद अपनी पत्नी को दांव पर लगाने का अधिकार खो चुके थे।

यह भी पढ़ें: महाभारत युद्ध के बाद क्यों जल गया था अर्जुन का रथ?

विकर्ण की इस हिम्मत ने कर्ण और दुर्योधन को क्रोधित कर दिया था। फिर भी उसने अपने भाइयों की नाराजगी की परवाह किए बिना सच का साथ दिया। प्रचलित कथाओं के अनुसार, विकर्ण इकलौता ऐसा कौरव था जिसे पांडव मारना नहीं चाहते थे क्योंकि वे उसकी धार्मिकता का सम्मान करते थे। कुरुक्षेत्र के युद्ध में जब विकर्ण का सामना भीम से हुआ तो भीम बहुत दुखी थे।

kaun sa kaurav pandavo dwara nahi mara gya tha

भीम ने कहा, 'हे विकर्ण! मैं जानता हूं कि तुम धर्मात्मा हो, लेकिन मुझे अपनी प्रतिज्ञा पूरी करने के लिए तुम्हें मारना होगा।' युद्ध के मैदान में विकर्ण और भीम का बहुत भयंकर युद्ध छिड़ा लेकिन श्री कृष्ण ने इस युद्ध को रोक दिया। श्री कृष्ण के कहने पर विकर्ण ने महाभारत युद्ध को त्याग दिया था और वन में तपस्या करने के लिए चले गए थे। बाद में विकर्ण ने तपस्या के समय ही अपना शरीर त्याग दिया था।

यह भी पढ़ें: शकुनि की मृत्यु के बाद उसके पासों का क्या हुआ?

अक्सर लोग विकर्ण और युयुत्सु के बीच भ्रमित हो जाते हैं। विकर्ण वह था जिसने द्रौपदी का पक्ष लिया था जबकि युयुत्सु धृतराष्ट्र का वह पुत्र था जिसने युद्ध शुरू होने से ठीक पहले पाण्डवों का साथ देने का निर्णय लिया था। युयुत्सु ने अधर्म का त्याग कर धर्म की ओर से युद्ध लड़ा, इसलिए वह कुरुक्षेत्र के युद्ध में जीवित बचा। इसके अनुसार, 100 में से 98 कौरवों का वध पांडवों द्वारा हुआ था और बाकी 2 अन्य ने अपना शरीर स्वयं त्यागा था।

अगर आपको यह स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।  

image credit: herzindagi 

यह विडियो भी देखें

Herzindagi video

Disclaimer

हमारा उद्देश्य अपने आर्टिकल्स और सोशल मीडिया हैंडल्स के माध्यम से सही, सुरक्षित और विशेषज्ञ द्वारा वेरिफाइड जानकारी प्रदान करना है। यहां बताए गए उपाय, सलाह और बातें केवल सामान्य जानकारी के लिए हैं। किसी भी तरह के हेल्थ, ब्यूटी, लाइफ हैक्स या ज्योतिष से जुड़े सुझावों को आजमाने से पहले कृपया अपने विशेषज्ञ से परामर्श लें। किसी प्रतिक्रिया या शिकायत के लिए, [email protected] पर हमसे संपर्क करें।

;