places where we should go even without being invited

शास्त्रों के अनुसार इन जगहों पर तो बिना बुलाए भी चले जाना चाहिए

हमारे नीति शास्त्रों में कुछ ऐसी विशेष जगहों और अवसरों का वर्णन किया गया है जहां निमंत्रण की प्रतीक्षा नहीं करनी चाहिए। इन स्थानों पर जाना न केवल पुण्य का काम माना जाता है बल्कि यह हमारे आत्मिक और सामाजिक कल्याण के लिए भी बहुत आवश्यक होता है।
Editorial
Updated:- 2026-02-07, 09:17 IST

भारतीय परंपरा में अतिथि सत्कार को बहुत ऊंचा स्थान दिया गया है। आमतौर पर मर्यादा यही कहती है कि बिना बुलाए किसी के घर नहीं जाना चाहिए क्योंकि इससे मान-सम्मान कम होने का भय रहता है, लेकिन हमारे नीति शास्त्रों में कुछ ऐसी विशेष जगहों और अवसरों का वर्णन किया गया है जहां निमंत्रण की प्रतीक्षा नहीं करनी चाहिए। इन स्थानों पर जाना न केवल पुण्य का काम माना जाता है बल्कि यह हमारे आत्मिक और सामाजिक कल्याण के लिए भी बहुत आवश्यक होता है। ऐसे में वृंदावन के ज्योतिषाचार्य राधाकांत वत्स से आइये जानते हैं कि किन स्थानों पर हमें बिना बुलाए चले जाना चाहिए? 

भगवान का दर और धार्मिक अनुष्ठान

शास्त्रों के अनुसार, भगवान के मंदिर या किसी भी तीर्थ स्थान पर जाने के लिए किसी विशेष निमंत्रण की आवश्यकता नहीं होती। मंदिर सभी के लिए हमेशा खुला रहता है।

इसी तरह अगर कहीं हरि कथा, सत्संग या कोई बड़ा धार्मिक अनुष्ठान हो रहा हो तो वहां बिना संकोच चले जाना चाहिए। ऐसी जगहों पर जाने से मन को शांति मिलती है और पुण्य की प्राप्ति होती है। 

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गुरु का आश्रम या घर

गुरु को साक्षात ईश्वर का रूप माना गया है। शास्त्रों में कहा गया है कि शिष्य को अपने गुरु के पास जाने के लिए किसी निमंत्रण की जरूरत नहीं होती। अगर आपको लगे कि आपको मार्गदर्शन की आवश्यकता है या आप बस अपने गुरु का आशीर्वाद लेना चाहते हैं तो आप कभी भी जा सकते हैं।

गुरु के द्वार पर जाने से ज्ञान की प्राप्ति होती है और जीवन की दुविधाएं दूर होती हैं। एक सच्चा शिष्य वही है जो समय-समय पर गुरु की शरण में जाकर अपनी ऊर्जा को सकारात्मक बनाए रखे।

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पिता और घनिष्ठ मित्र का घर

अपनी संतान के लिए पिता के द्वार हमेशा खुले रहते हैं। शास्त्रों के अनुसार, पिता के घर जाने के लिए औपचारिक निमंत्रण की कोई औपचारिकता नहीं होनी चाहिए। इसी तरह एक सच्चा और निस्वार्थ मित्र वही है जिसके घर जाने में आपको संकोच न हो।

अगर आपका मित्र किसी मुसीबत में है या उसे आपकी मदद की जरूरत महसूस हो रही है तो बिना बुलाए पहुंचाना ही सच्ची मित्रता का धर्म है। इन रिश्तों में प्रेम और अधिकार सर्वोपरि होता है न कि औपचारिकता।

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किसी की मदद या सेवा का अवसर

अगर आपको पता चले कि कहीं कोई व्यक्ति बहुत बीमार है, दुखी है या किसी संकट में फंसा है तो वहां बिना बुलाए तुरंत पहुंचना चाहिए। मानवता की सेवा करना सबसे बड़ा धर्म माना गया है।

ऐसी स्थिति में यह सोचना कि उसने मुझे याद नहीं किया या मुझे बताया नहीं, यह गलत है। निस्वार्थ भाव से किसी की मदद के लिए खड़े होना आपको समाज में सम्मान दिलाता है और आपके कर्मों को शुद्ध करता है।

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