significance of virat ramayan mandir where worlds largest shivling installed

क्या है विराट Ramayan Mandir की मान्यता जहां स्थापित हुआ दुनिया का सबसे बड़ा शिवलिंग?

विराट रामायण मंदिर न केवल क्षेत्रफल में विश्व का सबसे बड़ा हिंदू मंदिर होने का गौरव प्राप्त करेगा बल्कि यहां हाल ही में दुनिया का सबसे बड़ा शिवलिंग स्थापित कर एक नया इतिहास रचा गया है।
Editorial
Updated:- 2026-01-19, 16:15 IST

बिहार के पूर्वी चंपारण में बन रहा विराट रामायण मंदिर केवल एक मंदिर नहीं बल्कि आधुनिक शिल्पकारी और अटूट श्रद्धा का जीता-जागता उदाहरण है। यह मंदिर न केवल क्षेत्रफल में विश्व का सबसे बड़ा हिंदू मंदिर होने का गौरव प्राप्त करेगा बल्कि यहां हाल ही में दुनिया का सबसे बड़ा शिवलिंग स्थापित कर एक नया इतिहास रचा गया है। 17 जनवरी 2026 को इस विशाल शिवलिंग की स्थापना की गई जिसने बिहार को वैश्विक मानचित्र पर एक नई धार्मिक पहचान दिलाई है। यह स्थल प्रभु राम और महादेव के अनन्य संबंध का प्रतीक है, जहां रामायण की गाथा के साथ शिव भक्ति का संगम देखने को मिलेगा। आइये जानते हैं वृंदावन के ज्योतिषाचार्य राधाकांत वत्स से विस्तार में।

विराट रामायण मंदिर में दुनिया का सबसे बड़ा शिवलिंग (सहस्त्र लिंगम)

विराट रामायण मंदिर में स्थापित यह शिवलिंग अपनी भव्यता और निर्माण शैली के कारण अद्वितीय है। इसकी विशेषताएं इसे दुनिया के अन्य सभी शिवलिंगों से अलग बनाती हैं। यह शिवलिंग 33 फीट ऊंचा और 33 फीट के घेरे वाला है। इसका कुल वजन लगभग 210 मीट्रिक टन है।

virat ramayan mandir

इसे तमिलनाडु के महाबलीपुरम में एक ही काले ग्रेनाइट पत्थर को तराश कर बनाया गया है। इसे बनाने में शिल्पकारों को लगभग 10 साल का समय लगा। इस एक विशाल शिवलिंग की सतह पर 1008 छोटे-छोटे शिवलिंग उकेरे गए हैं।

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शास्त्रों में इसे 'सहस्त्र लिंगम' कहा जाता है। माना जाता है कि इस एक शिवलिंग के दर्शन और जलाभिषेक से 1008 शिवलिंगों की पूजा के समान पुण्य फल मिलता है। इस शिवलिंग की स्थापना के लिए 17 जनवरी 2026 की तिथि चुनी गई जो धार्मिक दृष्टि से अत्यंत शुभ थी।

यह दिन माघ कृष्ण चतुर्दशी का था जिसे 'नरक निवारण चतुर्दशी' के रूप में मनाया जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन भगवान शिव पहली बार शिवलिंग के रूप में प्रकट हुए थे। यह मंदिर कंबोडिया के प्रसिद्ध 'अंकोरवाट' मंदिर से भी भव्य और ऊंचा बनाया जा रहा है।

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मंदिर का स्थापत्य अंकोरवाट मंदिर से प्रेरित है, लेकिन इसकी ऊंचाई उससे कहीं अधिक होगी। यहां केवल भगवान राम का मंदिर नहीं होगा बल्कि इस परिसर में कुल 22 मंदिर होंगे जिनमें से शिव मंदिर पहला माइलस्टोन है। यह वैष्णव और शैव परंपराओं के सुंदर मेल को दर्शाता है।

virat ramayan mandir ke bare mein

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