
सनातन धर्म में किसी भी अमावस्या तिथि का विशेष और आध्यात्मिक महत्व होता है। इस अमावस्या तिथि को पितरों से जोड़ा जाता है और ऐसा माना जाता है कि अमावस्या तिथि पर यदि आप पूर्वजों के लिए तर्पण करती है और दान आदि काम करती हैं तो आपके जीवन में इसके लाभ दिखाई देने लगते हैं। हर अमावस्या तिथि को पितरों को समर्पित माना जाता है, लेकिन फाल्गुन महीने की अमावस्या तिथि को विशेष रूप से पितृ शांति, कर्म शुद्धि और कुल कल्याण के लिए प्रभावशाली माना जाता है। इस दिन पीपल के पेड़ में जल चढ़ाने, पीपल में दीपक जलाने और पूजा करने से पुण्य की प्राप्ति होती है।
पीपल के पेड़ में जल चढ़ाने की परंपरा बहुत पुरानी है और पीपल में जल चढ़ाना अमावस्या तिथि के लिए बहुत शुभ माना जाता है। ज्योतिष और शास्त्रों के अनुसार, पीपल का पेड़ देवताओं और पितरों दोनों का प्रिय स्थान माना गया है। इसलिए फाल्गुन अमावस्या के दिन पीपल पूजन करने से पितृ दोष शांत होता है और जीवन में सकारात्मकता बढ़ती है। आइए ज्योतिषाचार्य सिद्धार्थ एस. कुमार से जानें फाल्गुन अमावस्या के दिन आपको पीपल में जल क्यों चढ़ाना चाहिए।
शास्त्रों में पीपल को दिव्य वृक्ष माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि पीपल में त्रिदेवों का वास होता है और इसकी जड़ में ब्रह्मा, तने में विष्णु और पत्तों में शिव का वास माना जाता है। इसी वजह से पीपल की पूजा करना अनेक देवताओं की पूजा के समान फलदायी माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान विष्णु का संबंध भी पीपल के वृक्ष से जोड़ा जाता है, जबकि न्याय और कर्मफल के देवता शनि देव को भी पीपल का वृक्ष अत्यंत प्रिय है। अमावस्या और शनिवार के दिन पीपल की पूजा का विशेष महत्व है और इसमें जल चढ़ाने से पूर्वजों का पूरा आशीर्वाद मिलता है।

फाल्गुन अमावस्या को पितरों की तृप्ति के लिए श्रेष्ठ माना गया है। ज्योतिष में मान्यता है कि अमावस्या के तिथि के दिन पितृ लोक और पृथ्वी लोक के बीच ऊर्जा का एक संबंध अधिक सक्रिय हो जाता है। इसी वजह से इस दिन किए गए तर्पण, दान, जप और पूजन सीधे रूप से पितरों तक पहुंचते हैं। जिन लोगों की कुंडली में पितृ दोष होता है या जिनके जीवन में बिना कारण बाधाएं, आर्थिक रुकावट, संतान कष्ट या मानसिक तनाव बना रहता है और उनके लिए यह दिन विशेष उपायों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन पीपल में जल चढ़ाने से पूर्वजों की विशेष कृपा दृष्टि बनी रहती है।
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पीपल का पेड़ पूर्वजों के आशीर्वाद का प्रतीक माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि पितृ ऊर्जा पीपल के माध्यम से आशीर्वाद प्रदान करती है। जब फाल्गुन अमावस्या के दिन पीपल में जल चढ़ाया जाता है, तो यह पितरों के प्रति सम्मान और स्मरण का संकेत होता है। पीपल में जल चढ़ाने का अर्थ केवल एक क्रिया नहीं, बल्कि कृतज्ञता का भाव भी होता है। ऐसा माना जाता है कि इससे पितरों की अतृप्त आत्माओं को शांति मिलती है और वो वंशजों को आशीर्वाद देते हैं। इससे परिवार में सुख-शांति और उन्नति के मार्ग खुलते हैं।

ज्योतिष के अनुसार पीपल का संबंध शनि, गुरु और राहु जैसे ग्रहों से होताजाता है। पीपल की पूजा करने से इन ग्रहों के अशुभ प्रभाव कम हो सकते हैं। फाल्गुन अमावस्या पर पीपल में जल चढ़ाने से कई लाभ हो सकते हैं। जैसे- पीपल में जल चढ़ाने से पितृ दोष शांत होते हैं और शनि दोष के प्रभाव को कम किया जा सकता है। इस उपाय से आपके रुके हुए कार्यों में भी गति आती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है।
यदि आप भी फाल्गुन अमावस्या के दिन पीपल के पेड़ में जल चढ़ाएंगी और पीपल के पेड़ के पास दीपक जलाएंगी तो आपके जीवन में सकारात्मकता का वास बना रहता है।
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