Tue Feb 17, 2026 | Updated 03:37 AM IST
food during solar eclipse

Surya Grahan 2026: ग्रहण के समय भोजन में डाली गई तुलसी खाना सही है या गलत, जानिए क्या कहता है शास्‍त्र?

सूर्य ग्रहण 2026 के दौरान भोजन में तुलसी डालने की परंपरा को लेकर लोगों में कई सवाल हैं। क्या तुलसी युक्त भोजन ग्रहण के बाद खाया जा सकता है? शास्त्रों और आयुर्वेद के अनुसार तुलसी भोजन को नकारात्मक ऊर्जा से बचाने और शुद्ध रखने में सहायक मानी गई है। जानें धार्मिक मान्यताओं, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और ग्रहण काल में भोजन से जुड़े नियमों की पूरी जानकारी इस लेख में।
Editorial
Updated:- 2026-02-16, 20:43 IST

सूर्य ग्रहण के दिन सूतक काल के लगने से पहले ही खाने में तुलसी डालने की रीत है। ऐसी मान्‍यता है कि अगर आप खाने में पहले ही तुलसी का पत्‍त डाल देती हैं, तो आपका खाना खराब नहीं होता है। ऐसा कहा जाता है कि जब ग्रहण लगता है, तो घर और खाने सभी में नकारात्‍मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ जाता है। इस प्रभाव को रोकने के लिए खाने में पहले ही तुलसी डाल देनी चाहिए। इस तुलसी को ग्रहण हटने के बाद खाना चाहिया या नहीं, इसे बात को लेकर लोगों में बहुत अधिक भ्रम है। इसलिए हमने छिंदवाड़ा, मध्‍यप्रदेश निवासी पंडित एंव ज्‍योतिषाचार्य सौरभ त्रिपाठी से बात की। वह कहते हैं, "शास्त्रों के अनुसार, सूर्य ग्रहण के दौरान भोजन में तुलसी के पत्ते डालना न केवल सही है, बल्कि आवश्यक माना गया है। मान्यता है कि ग्रहण की नकारात्मक ऊर्जा और कीटाणुओं से खाने-पीने की चीजों को शुद्ध रखने के लिए तुलसी से अच्‍छा विकल्‍प और कुछ भी नहीं है।"

सूर्य ग्रहण और तुलसी का सेवन: क्‍या कहता है शास्‍त्र?

  • धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ग्रहण काल में पके हुए भोजन और पानी में सबसे पहले नकारात्मक ऊर्जा प्रवेश करती है। ऐसे में ग्रहण के बार उस खाने को आप खा नहीं सकते हैं। भोजन और पानी खराब न हो, इसके लिए आपको पहले ही खाने में तुलसी डाल देनी चाहिए।
  • तुलसी को ग्रहण शुरू होने से पहले ही भोजन, दूध, दही और पानी के बर्तनों में डाल देना चाहिए। शास्त्रों में ग्रहण के दौरान भोजन पकाने और खाने पर रोक लगाई गई है। कहा जाता है कि, ग्रहण काल के समय अगर आप भोजन का सेवन करती हैं, तो किसी न किसी रोग की शिकार हो सकती हैं।
  • आयुर्वेद के अनुसार भी, तुलसी के पत्ते भोजन में बैक्टीरिया को बढ़ने से रोकते हैं और इम्यून सिस्टम को मजबूत रखने में मदद कर सकते हैं।

अत: आप ग्रहण के दौरान खाने में पड़ी तुलसी की पत्‍ती का सेवन कर सकती हैं और दूसरों को भी करा सकती हैं। यहां तक कि तुलसी पड़ी चीजों से आप भोग भी तैयार कर सकता हैं।

आयुर्वेद और वैज्ञानिक दृष्टिकोण

  • आयुर्वेद में तुलसी को औषधीय गुणों से भरपूर माना गया है। तुलसी के पत्तों में प्राकृतिक एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-ऑक्सीडेंट गुण पाए जाते हैं। माना जाता है कि यह भोजन में सूक्ष्म जीवाणुओं की वृद्धि को रोकने में सहायक हो सकती है। यही कारण है कि परंपरागत रूप से तुलसी को शुद्धिकरण का प्रतीक माना गया है।
  • हालांकि आधुनिक विज्ञान ग्रहण के दौरान भोजन के दूषित होने की अवधारणा को सीधे स्वीकार नहीं करता, लेकिन तुलसी के औषधीय गुणों को मान्यता देता है। इसलिए कई लोग इसे धार्मिक आस्था और परंपरा के साथ-साथ स्वास्थ्य की दृष्टि से भी उपयोगी मानते हैं।

इस प्रकार, सूर्य ग्रहण के दौरान तुलसी का उपयोग भोजन की शुद्धि और सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखने के उद्देश्य से किया जाता है। यह परंपरा आस्था और स्वास्थ्य दोनों पहलुओं से जुड़ी हुई है, और इसका पालन करना या न करना व्यक्ति की श्रद्धा और सुविधा पर निर्भर करता है। यह जानकारी आपको अच्‍छी लगी हो तो आर्टिकल को शेयर और लाइक जरूर करें। इसी तरह और भी आर्टिकल्‍स पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।

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