
हिंदू धर्म में मेष संक्रांति की तिथि का विशेष महत्व है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन सूर्य देव अपना राशि परिवर्तन करके मीन से मेष राशि में प्रवेश करते हैं जिससे नए सौर वर्ष का आरंभ होता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार यह समय ऊर्जा, परिवर्तन और सकारात्मक शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। मुख्य रूप से इस दिन किए गए कुछ उपाय घर में होने वाले पितृ दोषों को दूर करनेमें मदद करते हैं। ज्योतिष की दृष्टि से भी इस दिन का विशेष महत्व होता है। अगर आपकी कुंडली में भी पितृ दोष है और उसकी वजह से जीवन में बार-बार समस्याएं आ रही हैं, तो मेष संक्रांति के दिन कुछ खास उपाय करने से उन दोषों से बाहर निकलने में मदद मिल सकती है। इस साल मेष संक्रांति 14 अप्रैल को पड़ेगी। आइए ज्योतिर्विद पंडित रमेश भोजराज द्विवेदी से जानते हैं ऐसे 3 उपायों के बारे में जो आपके घर के पितृ दोष तो दूर कर ही सकते हैं और जीवन में सुख समृद्धि लाने में भी मदद करेंगे।

मेष संक्रांति का दिन दान-पुण्य करने के लिए बहुत शुभ माना जाता है। इस दिन यदि आप प्रातः स्नान आदि से मुक्त होकर पितरों के नाम से तर्पण करें और कुछ विशेष चीजों का दान करें तो आपकी कुंडली में मौजूद किसी भी प्रकार के पितृदोष को दूर करने में मदद मिल सकती है। मेष संक्रांति के दिन मुख्य रूप से काले तिल और चने या जौ के सत्तू का दान करना शुभ माना जाता है और इस दान से पितृदोष दूर हो सकते हैं। इसके साथ ही आपको इस दिन गरीबों को अन्न, वस्त्र या गुड़-चावल का दान भी करना चाहिए। इससे आपके पूर्वजों का आशीर्वाद मिलता है।
मेष संक्रांति के दिन यदि आप सुबह के समय पीपल के पेड़ पर जल चढ़ाएं और शाम को पीपल के पास सरसों के तेल का दीपक जलाएं, तो आपको कई प्रकार के पितृ दोषों से मुक्ति मिल सकती है। ज्योतिष में मान्यता है कि पीपल में देवताओं और पितरों का वास होता है। इसी वजह से मेष संक्रांति के दिन पीपल में जल चढ़ाना पूर्वजों को प्रसन्न करने का एक अच्छा उपाय माना जाता है। इस दिन प्रातः जल्दी उठकर स्नान के बाद पीपल के पेड़ पर जल अर्पित करें और उसकी सात परिक्रमा करें। इस दौरान आप 'ॐ पितृदेवाय नमः' मंत्र का जाप करें।

ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार मेष संक्रांति के दिन सूर्य देव मीन राशि से निकलकर मेष राशि में प्रवेश करते हैं। चूंकि इस दिन सूर्य का राशि परिवर्तन होता है, इसलिए सूर्य देव की पूजा विशेष रूप से फलदायी मानी जाती है। इस दिन सुबह तांबे के लोटे में जल, लाल फूल और अक्षत डालकर सूर्य देव को अर्घ्य दें। इससे आपको किसी भी पितृ दोष से मुक्ति मिल सकती है। सूर्य को अर्घ्य देते समय आप 'ॐ घृणि सूर्याय नमः' मंत्र का 11 या 21 बार जाप करें। इससे सूर्य देव की पूजा का फल दोगुना मिलता है और पितृ दोषों से मुक्ति के योग बनते हैं।
अगर आप भी मेष संक्रांति के दिन यहां बताए उपायों को आजमाएंगी तो घर से पितृ दोष दूर होंगे और आपके पूर्वज भी प्रसन्न होंगे। अगर आपको यह स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।
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