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Kamada Ekadashi Katha And Mantra 2026: हर मनोकामना होगी पूरी, कामदा एकादशी के दिन जरूर सुनें पौराणिक व्रत कथा और करें इन मंत्रों का उच्चारण

कामदा एकादशी इस बार 29 मार्च को पड़ रही है। ऐसे में आप भी इस दिन की व्रत कथा को जरूर पढ़ें। साथ ही मंत्रों का उच्चारण भी जरूर करें। आइए बताते हैं इसके बारे में विस्तार से।
Editorial
Updated:- 2026-03-27, 18:48 IST

हिंदू धर्म में चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को कामदा एकादशी के नाम से जाना जाता है। कामदा का अर्थ है कामनाओं को पूर्ण करने वाला दिन। माना जाता है कि इस व्रत को करने से व्यक्ति के सभी पापों का नाश होता है। साथ ही जीवन की परेशानियां कम होती हैं। ऐसे में आप कामदा एकादशी के दिन व्रत कथा और मंत्रों का उच्चारण जरूर करें। आइए आपको बताते हैं इस दिन की व्रत कथा और मंत्र।

कामदा एकादशी का महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कामदा एकादशी का व्रत करने से समान फल प्राप्त होता है। यह व्रत न केवल इस जन्म के कष्टों को दूर करता है। साथ ही मोक्ष की प्राप्ति होती है।

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कामदा एकादशी की पौराणिक व्रत कथा

प्राचीन काल में भोगीपुर नामक नगर में पुण्डरीक नाम का राजा राज्य करता था। उस नगर में ललित नाम का एक गंधर्व और उसकी पत्नी ललिता रहा करते थे। दोनों के बीच अगाध प्रेम था। एक दिन राजा की सभा में ललित गान कर रहा था, लेकिन गाते समय उसका ध्यान अपनी पत्नी ललिता की ओर चला गया, जिससे उसकी लय बिगड़ गई। राजा पुण्डरीक को यह अपना अपमान लगा और उन्होंने क्रोधित होकर ललित को राक्षस बनने का श्राप दे दिया। श्राप के प्रभाव से ललित अत्यंत कुरूप और भयानक राक्षस बन गया। अपनी पति की यह दशा देख ललिता बहुत दुखी हुई। वह अपने पति के उद्धार का मार्ग खोजने लगी।

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विचरते हुए वह विंध्याचल पर्वत पर श्रृंगी ऋषि के आश्रम पहुंची। ऋषि ने उसकी व्यथा सुनकर उसे चैत्र शुक्ल पक्ष की कामदा एकादशी का व्रत करने की सलाह दी। ललिता ने पूर्ण श्रद्धा के साथ यह व्रत किया और इसका पुण्य अपने पति को अर्पित कर दिया। व्रत के प्रभाव से ललित पुनः अपने सुंदर गंधर्व रूप में वापस आ गया और अंत में दोनों विमान पर बैठकर स्वर्ग लोक को सिधार गए।

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कामदा एकादशी के विशेष मंत्र और उनका अर्थ

एकादशी के दिन भगवान विष्णु के इन मंत्रों का जाप करना अत्यंत कल्याणकारी होता है।

  • श्री विष्णु मूल मंत्र: "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" इसका अर्थ है, मैं भगवान विष्णु को नमन करती हूं, जो सर्वव्यापक हैं और समस्त जगत के आधार हैं।
  • मंगल मंत्र: "मंगलम् भगवान विष्णुः, मंगलम् गरुड़ध्वजः। मंगलम् पुण्डरीकाक्षः, मंगलाय तनो हरिः॥" इसका अर्थ है, भगवान विष्णु मंगलकारी हैं, जिनका ध्वज गरुड़ है वे मंगलकारी हैं। कमल के समान नेत्रों वाले भगवान पुण्डरीकाक्ष मंगलकारी हैं, वह श्रीहरि हमारा कल्याण करें।
  • शांति और सफलता के लिए मंत्र: "शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशं, विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्णं शुभाङ्गम्।" इसका अर्थ है, जिनकी आकृति परम शांत है, जो शेषनाग की शय्या पर लेटे हुए हैं, जिनकी नाभि में कमल है और जो देवताओं के भी ईश्वर हैं। उन भगवान विष्णु को मैं प्रणाम करती हूं।

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Image credit- Freepik

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