
भारतीय ग्रामीण परिवेश और लोक कथाओं में यह बात अक्सर सुनने को मिलती है कि सांप गर्भवती महिलाओं को नुकसान नहीं पहुंचाते या उन्हें देखकर अंधे हो जाते हैं। धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टिकोण से इस मान्यता का गहरा महत्व है। हिंदू शास्त्रों और पौराणिक कथाओं में सांपों को केवल एक जीव नहीं, बल्कि 'नाग देवता' के रूप में पूजनीय माना गया है। ज्योतिष शास्त्र में राहु और केतु का संबंध सर्प से जोड़ा जाता है जो जीवन के कर्मों और भाग्य को प्रभावित करते हैं। इसके अलावा, सनातन धर्म में मातृत्व को सर्वोच्च स्थान दिया गया है और माना जाता है कि एक गर्भवती स्त्री के भीतर पल रही नई आत्मा की सुरक्षा की जिम्मेदारी प्रकृति स्वयं उठाती है। ऐसे में वृंदावन के ज्योतिषाचार्य राधाकांत वत्स से आइये जानते हैं कि क्या वाकई गर्भवती महिलाओं को सांप नहीं काटते हैं?
हिंदू धर्म ग्रंथों के अनुसार, नागों का संबंध भगवान शिव और भगवान विष्णु से है। धार्मिक दृष्टि से यह माना जाता है कि जब कोई स्त्री गर्भवती होती है तो वह साक्षात 'शक्ति' का रूप होती है।
देवी भागवत और अन्य पुराणों में वर्णन मिलता है कि प्रकृति के सभी जीव जिनमें विषैले जीव भी शामिल हैं जननी यानी माता का सम्मान करते हैं। ऐसी मान्यता है कि नाग देवता उस स्त्री के भीतर पल रहे अंश को हानि नहीं पहुंचाते हैं।

ऐसा इसलिए क्योंकि एक गर्भवती महिला नई रचना की प्रक्रिया में होती है। कई क्षेत्रों में इसे 'नाग देवता' के आशीर्वाद के रूप में देखा जाता है जहां सांप को पितरों या रक्षक के रूप में पूजा जाता है।
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ज्योतिष शास्त्र में सांपों का सीधा संबंध राहु और केतु से माना जाता है। कुंडली में सर्प दोष या कालसर्प दोष की शांति के लिए नाग पूजा का विधान है। ज्योतिष शास्त्र में बताया गया है कि गर्भवती महिला के शरीर के चारों ओर एक विशेष सकारात्मक 'आभामंडल' यानी कि औरा विकसित हो जाता है।
शनि और राहु जैसे क्रूर ग्रह भी मातृत्व की ऊर्जा के सामने शांत पड़ जाते हैं। शास्त्रों के अनुसार, गर्भस्थ शिशु की अपनी एक नियति और भाग्य होता है। अगर उस शिशु के जीवन में सर्प दंश का योग नहीं है तो सांप उस महिला के पास आकर भी शांत बना रहता है।
भारत के ग्रामीण इलाकों में यह विश्वास बहुत गहरा है कि सांप गर्भवती महिला को देखते ही अपनी आक्रामकता खो देता है। कुछ समुदायों में तो यहां तक कहा जाता है कि सांप महिला के गर्भ में पल रहे जीव की आहट पाकर अपना रास्ता बदल लेता है।

इसे 'प्रकृति का नियम' माना जाता है कि एक जीव जो स्वयं जीवन देने वाली है, कोई दूसरा जीव उसके प्राण नहीं हर सकता। हालांकि, यह पूरी तरह से श्रद्धा और विश्वास का विषय है जिसका मुख्य आधार जीव-जगत के प्रति दया और मातृत्व के प्रति सम्मान है।
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शास्त्रों और ज्योतिष में श्रद्धा अपनी जगह है, लेकिन व्यावहारिक रूप से सांप एक जंगली जीव है जो खतरा महसूस होने पर अपनी रक्षा में काट सकता है। विज्ञान के पास इस बात का कोई प्रमाण नहीं है कि सांप गर्भवती महिलाओं को नहीं काटते।
इसलिए, धार्मिक आस्था का सम्मान करते हुए भी सुरक्षा को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। यदि घर या आंगन में सांप दिखे तो उससे उचित दूरी बनाए रखना और विशेषज्ञ की मदद लेना ही समझदारी है।
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