
होली एक ऐसा पर्व है जो न सिर्फ रंगों का त्योहार माना जाता है बल्कि इसकी धूम चारों दिशाओं में दिखाई देती है। होली का पर्व लोगों के बीच मेलजोल बढ़ाता है और एक-दूसरे को पास लाता है। खासतौर पर मथुरा और वृंदावन में होली अलग-अलग रूपों में मनाई जाती है। यह सिर्फ रंगों का उत्सव नहीं माना जाता है बल्कि भक्ति, परंपरा और राधा-कृष्ण के शाश्वत प्रेम का जीवंत महोत्सव भी होता है। ब्रज की पावन भूमि में, होली का उत्सव मथुरा, वृंदावन, बरसाना और नंदगांव में मंदिरों में भी देखने को मिलता है। चारों ओर फूलों की वर्षा, संगीत और सदियों पुरानी परंपराओं को जागृत करते हुए होली मनाई जाती है। ब्रज में होली का उत्सव बसंत पंचमी से ही शुरू हो जाता है और यह पूरे 40 दिनों तक चलता है। इस दौरान लट्ठमार होली, फूलों की होली, लड्डू होली और पूरा रंगोत्सव खास होता है। आइए ज्योतिर्विद पंडित रमेश भोजराज द्विवेदी से जानें ब्रज की होली के पूर्ण कैलेंडर के बारे में।
धार्मिक मान्यता के अनुसार ब्रज में होली का आरंभ बसंत पंचमी के दिन से ही हो जाता है और इसके पीछे एक मान्यता है। ऐसा कहा जाता है कि द्वापर युग में भगवान श्री कृष्ण ने सबसे पहले माघ माह की शुक्ल पक्ष की पांचवीं तिथि को ही राधा रानी के साथ होली खेली थी, उसी दिन बसंत पंचमी का पर्व भी मनाया जाता है। उसी समय से आज भी ब्रज में होली का आरंभ बसंत पंचमी के साथ ही आरंभ हो जाता है। इस दिन समस्त देवी-देवताओं को गुलाल चढ़ाया जाता है और होली के पर्व की शुरुआत होती है। इस पर्व का समापन 40 दिनों के बाद रंग पंचमी के दिन से होता है। इन सभी दिनों में ब्रजवासी अलग-अलग रीति-रिवाजों से होली का जश्न मनाते हैं।
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हिंदू पंचांग के अनुसार ब्रज में होली का शुभारंभ बसंत पंचमी के दिन से होता है और इस साल यह पर्व 23 जनवरी को था, इसलिए ब्रज में होली की शुरुआत हो चुकी है।
| तिथि | होली का पारंपरिक नाम | स्थान |
| 25 फरवरी 2026 (बुधवार) | लड्डू होली |
बरसाना |
26 फरवरी 2026 (गुरुवार) |
बरसाना लठ्ठमार होली | बरसाना |
27 फरवरी 2026 (शुक्रवार) |
लठ्ठमार होली | नंदगांव |
28 फरवरी 2026 (शनिवार) |
फूलों की होली | वृंदावन |
28 फरवरी 2026 (शनिवार) |
विधवाओं की होली | वृंदावन |
1 मार्च 2026 (रविवार) |
छड़ी-मार होली | गोकुल |
2 मार्च 2026 (सोमवार) |
रमण रेती होली | गोकुल |
3 मार्च 2026 (मंगलवार) |
होलिका दहन | मथुरा और वृंदावन |
4 मार्च 2026 (बुधवार) |
रंगवाली होली / धुलंडी | मथुरा और वृंदावन |
5 मार्च 2026 (गुरुवार) |
हुरंगा होली (दाऊजी का हुरंगा) | दाऊजी मंदिर |
| 6 मार्च 2026 (शुक्रवार) | बलदेव हुरंगा | बलदेव |
ब्रज में वैसे तो होली का आरंभ बसंत पंचमी से ही हो जाता है, लेकिन हिंदू पंचांग के अनुसार औपचारिक रूप से यह पर्व 24 फरवरी 2026, मंगलवार को आरंभ होगा। इस दिन ब्रज में लड्डू मार होली मनाई जाएगी। इस दिन नंदगांव में फाग आमंत्रण महोत्सव होता है, जिसमें नंदगांव के लोग बरसाना के लोगों को होली खेलने का न्योता देते हैं। इस दिन नंदगांव के श्री राधा रानी मंदिर में लड्डू होली मनाई जाती है। इस महोत्सव के दौरान लोग मंदिर परिसर में एक-दूसरे पर लड्डू बरसाते हैं। इसी दिन से पूरे ब्रज में होली का रंग चढ़ जाता है। इस साल 25 फरवरी, बुधवार को बरसाना के राधा रानी मंदिर में लड्डू होली मनाई जाएगी। इस दिन लड्डुओं की होली खेलने के साथ प्रसाद के रूप में भी लड्डू बांटे जाते हैं।

इस साल बरसाना में लट्ठमार होली का आयोजन 27 फरवरी 2026, शुक्रवार को होगा। ऐसी मान्यता है कि इस दिन नंदगांव के हुरियारे बरसाना पहुंचते हैं और बरसाने की गोपियां प्रेम और परंपरा के प्रतीक रूप में उनके ऊपर लाठियां चलाती हैं। यह होली हंसी, ठिठोली और लोक परंपरा का अनोखा रूप प्रस्तुत करती है। इस होली में गोलियां लाठियां चलाती हैं और हुरियारे ढाल से अपना बचाव करते हैं। इस दौरान नगर के लोग होली के रंगों में डूबकर एक अनोखे रूप में होली का उत्सव मानते हैं।
इस साल ब्रज में फूलों की होली 28 फरवरी, शनिवार को मनाई जाएगी और इस दौरान गांवों में फाग उत्सव और रंगों की होली का आयोजन भी होगा। वृंदावन में इस दिन फूलों की होली मनाई जाएगी। यह होली वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर में मुख्य रूप से खेली जाती है और यह ब्रज की परंपराओं का प्रतीक मानी जाती है। इस दिन यहां गुलाल की जगह फूलों की पंखुड़ियों की वर्षा होती है और भक्त इस तरह की अनुभूति करते हैं मानो ठाकुर जी स्वयं फूलों से होली खेलने आए हों।

वृंदावन में विधवा महिलाओं की होली मनाने की अनोखी परंपरा है और ये सामाजिक बदलावों का प्रतीक मानी जाती है। वृंदावन में इस दिन वो विधवा महिलाएं होली खेलती हैं जिन्हें लंबे समय से होली के रंगों से दूर रखा जाता रहा है। इस दिन वृंदावन की समस्त विधवा महिलाओं द्वारा होली खेलना एक सामजिक परंपरा के सकारात्मक स्वरूप को दिखाता है।
ब्रज के गोकुल में 1 मार्च 2026, रविवार को छड़ी-मार होली का आयोजन होगा। यह परंपरा भगवान कृष्ण के बाल रूप से जुड़ी मानी जाती है। यहां पुजारी प्रतीकात्मक रूप से छड़ी से होली की रस्म निभाते हैं और इस दौरान भक्तों पर गुलाल उड़ाया जाता है। यह होली ब्रज में बड़े ही धूम-धाम से मनाई जाती है और चारों ओर होली की परंपरा मनाई जाती है।
गोकुल के रमण रेती क्षेत्र में होली इस साल 2 मार्च 2026, सोमवार को मनाई जाएगी। इस स्थान को कृष्ण की बाल लीलाओं से जुड़ा हुआ माना जाता है। यहां होली का स्वरूप अत्यंत आध्यात्मिक माना जाता है जहां होली का पारंपरिक रंगोत्सव बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है।
मथुरा और वृंदावन समेत पूरे देश में होलिका दहन 3 मार्च 2026, मंगलवार को मनाया जाएगा। इस दिन होलिका का दहन करने का मतलब होता है बुराई पर अच्छाई की जीत।
मथुरा और वृंदावन की गलियों समेत पूरे देश में रंगों की होली 4 मार्च 2026, बुधवार को मनाई जाएगी। इस दिन रंग, गुलाल खेलने की प्रथा है। वृंदावन में फाल्गुन पूर्णिमा के दिन पूरे ब्रज क्षेत्र में रंगों की होली मनाई जाती है।
इस साल 5 मार्च 2026, गुरुवार को दाऊजी मंदिर, बलदेव में हुरंगा होली मनाई जाएगी। इस दिन की परंपरा के अनुसार महिलाएं पुरुषों के कपड़े फाड़ने की परंपरा निभाई जाती है।
बलदेव में हुरंगा का उत्सव इस साल 6 मार्च, शुक्रवार के दिन मनाया जाएगा। यह हुरंगा होली के अगले दिन मनाया जाता है और इसी दिन के साथ ब्रज की होली का समापन भी होता है।
होली का उत्सव बड़े ही धूमधाम से पूरे देश में मनाया जाता है और इस दौरान पूरे देश में रंगों की धूम होती है। रंगोत्सव के इस कैलेंडर से आप भी सभी तिथियों की टांकरी ले सकती हैं और होली के पर्व की खुशियां मना सकती हैं।
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