
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, रत्न केवल सजावट की वस्तु नहीं होते बल्कि वे ब्रह्मांडीय ऊर्जा और ग्रहों की रश्मियों को हमारे शरीर में प्रवाहित करने के शक्तिशाली माध्यम होते हैं। जब हम कोई रत्न जैसे पुखराज, नीलम या माणिक आदि धारण करते हैं तो वह संबंधित ग्रह की सकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित कर हमारे जीवन के अवरोधों को दूर करने का प्रयास करता है, लेकिन रत्न विज्ञान में धारण करने की विधि जितनी महत्वपूर्ण है उससे कहीं अधिक महत्वपूर्ण है धारण करने के बाद बरती जाने वाली सावधानियां। अगर रत्न पहनने के बाद कुछ विशेष गलतियां की जाएं तो वह रत्न अपनी शुभता खो देता है और सकारात्मक की बजाय नकारात्मक परिणाम देने लगता है। इसी कड़ी में वृंदावन के ज्योतिषाचार्य राधाकांत वत्स ने हमें बताया कि किसी भी रत्न को धारण करने के बाद कौन से 5 काम बिलकुल भी नहीं करने चाहिए?
रत्न धारण करने के बाद सबसे पहली सावधानी यह है कि समय-समय पर उसकी जांच करते रहें। अगर आपका रत्न कहीं से चटक गया है, उसमें दरार आ गई है या उसका कोई कोना टूट गया है, तो उसे तुरंत उतार देना चाहिए। शास्त्रों के अनुसार, खंडित रत्न अपनी ऊर्जा खो देता है और उसमें नकारात्मक शक्तियों का वास होने लगता है। ऐसा रत्न पहनने से भाग्य साथ देना बंद कर देता है और जीवन में अचानक दुर्घटनाएं या मानसिक तनाव बढ़ सकता है।

रत्न का मुख्य कार्य उसकी ऊर्जा का आपके शरीर के साथ निरंतर संपर्क बनाए रखना है। कई लोग सोते समय, नहाते समय या किसी काम के दौरान बार-बार अंगूठी उतार देते हैं। ऐसा करने से उस ग्रह के साथ आपका ऊर्जा चक्र टूट जाता है। बार-बार रत्न उतारने और पहनने से उसकी प्रभावशीलता कम हो जाती है और वह आपको अपेक्षित लाभ नहीं दे पाता। इसे तभी उतारें जब वह क्रिया अनिवार्य हो जैसे कि सूतक के समय।
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रत्न एक व्यक्तिगत ऊर्जा कवच की तरह होता है। जब आप कोई रत्न पहनते हैं तो वह आपकी शारीरिक ऊर्जा और भाग्य के साथ जुड़ जाता है। अपना पहना हुआ रत्न किसी मित्र या रिश्तेदार को 'ट्रायल' के लिए देना या किसी दूसरे व्यक्ति का पहना हुआ रत्न खुद पहन लेना, दोनों ही स्थितियां ज्योतिषीय दृष्टि से हानिकारक हैं। इससे दूसरे व्यक्ति की नकारात्मक ऊर्जा आप तक पहुंच सकती है और आपके रत्न का प्रभाव दूषित हो सकता है।

विभिन्न रत्नों के लिए अलग-अलग नियम होते हैं। विशेष रूप से सात्विक रत्न जैसे पुखराज, मोती या माणिक पहनने के बाद मांस-मदिरा का सेवन या अनैतिक कार्यों में संलिप्त होना रत्न के शुभ प्रभाव को पूरी तरह नष्ट कर देता है। अशुद्ध अवस्था में रत्न को छूना या पहनकर रखना ग्रह दोष का कारण बन सकता है। अगर आप किसी ऐसी परिस्थिति में हैं जहां अशुद्धि अनिवार्य है तो रत्न को उतारकर पवित्र स्थान पर रख देना चाहिए।
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अक्सर लोग अनजाने में एक साथ ऐसे रत्न पहन लेते हैं जिनके ग्रहों की आपस में शत्रुता होती है। उदाहरण के लिए, शनि के रत्न (नीलम) के साथ सूर्य का रत्न (माणिक) पहनना या बृहस्पति के रत्न (पुखराज) के साथ शुक्र का रत्न (हीरा) पहनना जीवन में उथल-पुथल मचा सकता है। यह 'ग्रह युद्ध' की स्थिति पैदा करता है जिससे स्वास्थ्य हानि, आर्थिक नुकसान और रिश्तों में खटास आ सकती है।
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