
आज लोहड़ी का त्योहार है और सभी ने इसे धूम-धाम से मनाने की तैयारी कर ली होगी। बस अब इंतजार है शाम को लोहड़ी के जलने और नचने-गाने की महफिल सजने का। लोहड़ी को लेकर बहुत सारे पंजाबी गाने लोकप्रिय हैं, इनमें से एक है 'हुल्ले नई माई हुल्ले' लोहड़ी के दिन इस गाने पर डांस करना लोगों को बहुत पसंद होता है। मगर क्या आप इस पंजाबी गाने का मतलब जानते हैं। अगर नहीं जानते हैं, तो चली हम बहुत ही सरल भाषा में आपको इस गाने का मतलब बताएंगे, ताकि आप और भी अच्छे से डांस स्टेप्स तैयार कर सकें।
दे माई लोहड़ी, तेरी जीवे जोड़ी ,
दे माई पाथी तेरा पुत्त चढ़ेगा हाथी
हुल्ले नी माइ हुल्ले
दो बेरी पत्ता झुल्ले
दो झुल्ल पयीं खजूरां
खजूरां सुट्ट्या मेवा
एस मुंडे कर मगेवा
मुंडे दी वोटी निक्कदी
ओ खान्दी चूरी कुटदी
कुट कुट भरया थाल
वोटी बावे नंदना नाल
निनान ते वड्डी परजाई
सो कुड़मा दे घर आए !
अस्सी लोहरी लैन आए !
आया लोहड़ी दा त्यौहार

हुल्ले नी माई, हुल्ले,
ओ मां, खुशियां बरसें, मंगल हो।
दे माई लोहड़ी, तेरी जीवे जोड़ी,
हे मां, लोहड़ी दो, तुम्हारा दांपत्य सदा खुशहाल रहे।
दे माई पाथी, तेरा पुत्त चढ़ेगा हाथी,
हे मां, अनाज दो, तुम्हारा बेटा ऊंचाइयों तक पहुंचे, सम्मान पाए।
हुल्ले नी माई हुल्ले,
ओ मां, आनंद और उल्लास छा जाए।
दो बेरी पत्ता झुल्ले,
बेर के पेड़ पर पत्ते लहराएं, समृद्धि आए।
दो झुल्ल पईं खजूरां,
खजूरों के गुच्छे लटकें, धन-धान्य बढ़े।
खजूरां सुट्ट्या मेवा,
खजूरों से मेवे बरसें, घर में मिठास फैले।
एस मुंडे कर मगेवा,
इस लड़के के घर मांगलिक अवसर आए।
मुंडे दी वोटी निक्कदी,
लड़के की शादी हो जाए।
ओ खान्दी चूरी कुटदी,
वह मेहनत से खाना बनाए और घर संभाले।
कुट कुट भरया थाल,
थाली भर-भरकर पकवान सजें।
वोटी बावे नंदना नाल,
बहू अपने ससुराल वालों के साथ प्रेम से रहे।
निनान ते वड्डी परजाई,
ननद और बड़ी भाभी में प्रेम बना रहे।
सो कुड़मा दे घर आए,
सब रिश्तेदार खुशी-खुशी घर आएं।
अस्सी लोहरी लैन आए,
हम लोहड़ी लेने आए हैं।
आया लोहड़ी दा त्यौहार,
लोहड़ी का पावन त्योहार आ गया है।
'हुल्ले नी माई हुल्ले' यह पंजाबी लोहड़ी गीत केवल एक पंजाबी लोकगीत नहीं, बल्कि लोहड़ी के उत्सव को चार गुना बढ़ाने का जरिया है। इस गीत में खुशहाली, संतान की उन्नति, सुखी वैवाहिक जीवन और परिवार में प्रेम-समृद्धि की कामनाएं छिपी हैं। लोहड़ी की अग्नि के चारों ओर गाते-नाचते समय जब यह गीत बजता है, तो माहौल उल्लास, परंपरा और आपसी जुड़ाव से भर जाता है। इसके अर्थ को समझकर न सिर्फ लोहड़ी का आनंद दोगुना हो जाता है, बल्कि हमारी सांस्कृतिक विरासत से जुड़ाव भी और गहरा होता है। यह जानकारी आपको पसंद आई हो, तो लेख को शेयर और लाइक करें, इसी तरह और भी इंटरटेनमेंट आर्टिकल्स पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।
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