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क्या लड्डू गोपाल को गंगाजल से स्नान कराना सही है? ज्योतिष से जानें

लड्डू गोपाल की सेवा और पूजा का विशेष महत्व है, लेकिन उनकी पूजा के लिए कुछ विशेष नियमों का पालन जरूरी माना जाता है। वहीं एक सवाल यह भी आता है कि क्या लड्डू गोपाल को गंगाजल से स्नान कराया जा सकता है। आइए इसके बारे में जानें।
Editorial
Updated:- 2025-11-13, 21:47 IST

हिंदू धर्म में भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप लड्डू की सेवा का विशेष महत्व है। कई लोग घर में लड्डू गोपाल की मूर्ति रखते हैं और उनकी पूजा नियम से करते हैं। लड्डू गोपाल को प्रेम, स्नेह और भक्ति का प्रतीक माना जाता है। भक्तजन नियमित रूप से उनकी सेवा में स्नान, श्रृंगार और भोग के साथ पूरे नियमों का पालन करते हैं। ऐसे में एक सवाल अक्सर भक्तों के मन में यह भी आता है कि क्या लड्डू गोपाल को स्नान कराते समय उसमें गंगाजल मिलाना ठीक है?
गंगाजल को हमेशा से ही पवित्र, दिव्य और मोक्षदायिनी नदी माना जाता है, लेकिन क्या गंगाजल से लड्डू गोपाल को स्नान कराना ठीक है? आइए ज्योतिर्विद पंडित रमेश भोजराज द्विवेदी से जानें इस प्रश्न के सही जवाब के बारे में विस्तार से।

क्या लड्डू गोपाल को गंगाजल से स्नान कराना ठीक है

अगर हम ज्योतिष की मानें तो गंगा स्वयं भगवान विष्णु के चरणों से प्रकट हुई हैं, इसी वजह से किसी भी धार्मिक कार्य में गंगाजल का इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन जब बात स्वयं विष्णु जी के बाल स्वरुप लड्डू गोपाल की होती है तो शास्त्रों में इसका अलग दृष्टिकोण बताया गया है। ऐसा कहा जाता है कि जिस वस्तु की उत्पत्ति भगवान के चरणों से हुई हो, उसी चीज से लड्डू गोपाल को स्नान कराना ठीक नहीं माना जाता है। लड्डू गोपाल को गंगाजल से स्नान कराना केवल श्रद्धा का नहीं बल्कि धर्म और ज्योतिषीय दृष्टिकोण से भी शुभ नहीं माना जाता है। यदि आप भी गलती से लड्डू गोपाल को गंगाजल से स्नान कराती हैं तो आगे से ये गलती भूलकर भी न करें।

laddu gopal snan

शास्त्रों में गंगाजल का महत्व

हिंदू धर्म में गंगाजल को सबसे पवित्र और दिव्य जल माना गया है। शास्त्रों में उल्लेख मिलता है कि इसके स्पर्श मात्र से मन, शरीर और आत्मा शुद्ध हो जाते हैं। यही कारण है कि किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद भी गंगाजल की कुछ बूंदें उसके मुख में डाली जाती हैं, जिससे उसे मोक्ष प्राप्त हो सके। गंगाजल का प्रयोग हर धार्मिक अनुष्ठान, पूजा-पाठ और यज्ञ में शुभ और अनिवार्य माना जाता है, क्योंकि यह नकारात्मक ऊर्जा को दूर कर वातावरण को पवित्र बनाता है। हालांकि जब बात लड्डू गोपाल की आती है, तो शास्त्रों के अनुसार उन्हें गंगाजल से स्नान कराना उचित नहीं माना जाता है। इसका कारण यह है कि गंगा जी स्वयं भगवान विष्णु के चरणों से उत्पन्न हुई हैं।

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कैसे हुई है गंगा की उत्पत्ति

पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान विष्णु ने जब वामन अवतार लिया तब उन्होंने राजा बलि से तीन पग भूमि मांगी उनके पहले पग से पूरा ब्रह्मांड नाप लिया। उनका यह पग जब ब्रह्म लोक तक पहुंचा तो ब्रह्मा जी ने अत्यंत हर्षित होकर भगवान वामन के चरण धोए। इन्हीं चरणों को धोने से जो जल निकला, वही गंगा जी के रूप में प्रकट हुआ। इसी वजह से गंगा जी को विष्णु भगवान् के चरणों से निकली नहीं माना जाता है।

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लड्डू गोपाल को गंगाजल से स्नान क्यों नहीं कराना चाहिए

जिस प्रकार हम अपने चरणों से स्पर्श किए हुए जल से स्नान नहीं कर सकते हैं उसी प्रकार, भगवान श्रीकृष्ण के चरणों से उत्पन्न गंगाजल से स्वयं भगवान का स्नान कराना उचित नहीं माना जाता है।

गंगाजल अत्यंत पवित्र है, लेकिन यह ठाकुर जी के चरणों ही निकली है इसलिए उनके स्नान में इसका प्रयोग वर्जित माना गया है।
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