
आज सोमवार, 26 जनवरी 2026 आज माघ मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि है, जिसे भीष्म अष्टमी के नाम से जाना जाता है। शास्त्रों के अनुसार, महाभारत के भीष्म पितामह ने सूर्य के उत्तरायण होने की प्रतीक्षा की थी और आज ही के दिन उन्होंने अपनी देह का त्याग किया था। इसलिए आज का दिन पितृ दोष निवारण और योग्य संतान प्राप्ति के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। आज अश्विनी नक्षत्र प्रभावी रहेगा। अश्विनी नक्षत्र के देवता अश्विनी कुमार देवताओं के वैद्य हैं और स्वामी केतु हैं। यह नक्षत्र गंडमूल श्रेणी में आता है, लेकिन यह नई शुरुआत, ऊर्जा और उपचार के लिए बहुत शुभ है। सोमवार और अश्विनी नक्षत्र का योग मानसिक चंचलता दे सकता है, लेकिन शिव आराधना से इसे नियंत्रित किया जा सकता है। आइए जानते हैं मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित सौरभ त्रिपाठी से आज का पंचांग और भीष्म अष्टमी के उपाय।

| तिथि | नक्षत्र | दिन/वार | योग | करण |
| अष्टमी (रात्रि 09:20 बजे तक) | अश्विनी | सोमवार | शुभ | विष्टि |
| प्रहर | समय |
| सूर्योदय | सुबह 06 बजकर 56 मिनट पर होगा। |
| सूर्यास्त | शाम 06 बजकर 00 मिनट पर होगा। |
| चंद्रोदय | सुबह 11 बजकर 25 मिनट पर होगा। |
| चंद्रास्त | रात्रि 01 बजकर 38 मिनट पर होगा। |
| मुहूर्त नाम | मुहूर्त समय |
| ब्रह्म मुहूर्त (सूर्य पूजन का शुभ समय) | सुबह 05 बजकर 19 मिनट से 06 बजकर 07 मिनट तक |
| अभिजीत मुहूर्त (सूर्य पूजन का शुभ समय) | दोपहर 12 बजकर 00 मिनट से 12 बजकर 44 मिनट तक |
| विजय मुहूर्त | दोपहर 02 बजकर 30 मिनट से 03 बजकर 13 मिनट तक |
| गोधूलि मुहूर्त | शाम 05 बजकर 58 मिनट से 06 बजकर 25 मिनट तक |
| मुहूर्त नाम | मुहूर्त समय |
| राहु काल | सुबह 08 बजकर 19 मिनट से 09 बजकर 42 मिनट तक |
| यमगंड | सुबह 11 बजकर 05 मिनट से दोपहर 12 बजकर 28 मिनट तक |
| गुलिक | काल दोपहर 01 बजकर 51 मिनट से 03 बजकर 14 मिनट तक |
सोमवार को राहु काल सुबह 8:15 से 9:45 बजे के बीच होता है। इस दौरान शुभ कार्य टालें, लेकिन राष्ट्रीय ध्वजारोहण जैसे सार्वजनिक कार्यों पर इसका दोष मान्य नहीं होता।
आज भीष्म अष्टमी महाभारत के अनुसार, भीष्म पितामह ने इच्छा मृत्यु के वरदान के कारण माघ शुक्ल अष्टमी को शरीर त्यागा था। आज के दिन जो लोग भीष्म पितामह के निमित्त तर्पण करते हैं, उन्हें आज्ञाकारी संतान और पितृ दोष से मुक्ति मिलती है। मान्यता है कि आज का तर्पण उन लोगों के लिए भी शुभ है जिनके पिता जीवित हैं। आज अश्विनी नक्षत्र है जो की गंडमूल की श्रेणी में आता है यह नक्षत्र तेज गति और औषधि का प्रतीक है। आज वाहन चलाते समय सावधानी बरतें क्योंकि अश्विनी नक्षत्र में गति बढ़ जाती है और केतु अचानक दुर्घटना का भय देता है। लेकिन नई विद्या सीखने या यात्रा शुरू करने के लिए यह नक्षत्र ऊर्जावान है!
ज्योतिष शास्त्र में सोमवार और अश्विनी नक्षत्र का मिलन एक अत्यंत एनर्जेटिक और सीक्रेट संयोग माना जाता है। यह संयोग मन और गति का मिश्रण है। सोमवार के स्वामी चंद्रमा हैं, जो मन और भावनाओं के कारक हैं। अश्विनी नक्षत्र राशि चक्र का पहला नक्षत्र के स्वामी केतु हैं और इसके देवता अश्विनी कुमार जो की देवताओं के वैद्य हैं। यह मेष राशि में आता है। जब कोमल चंद्रमा, उग्र केतु के नक्षत्र और मंगल की राशि में आता है, तो इसका प्रभाव हमारे जीवन पर इस प्रकार पड़ता है यह संयोग स्वास्थ्य लाभ के लिए सर्वश्रेष्ठ है। यदि आप किसी पुरानी बीमारी से परेशान हैं, तो इस दिन नई दवा शुरू करना या डॉक्टर बदलना बहुत शुभ फल देता है। इस दिन शरीर में रिकवरी की स्पीड बहुत तेज होती है।
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