Fri Feb 13, 2026 | Updated 06:37 PM IST
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Aaj Ka Panchang 13 February 2026: विजया एकादशी का व्रत रखने के लिए जानें मुहूर्त, यहां देखें पंचांग

विजया एकादशी के मौके पर आप भी व्रत रखने के लिए पंचांग जरूर देखें, ताकि आप सही मुहूर्त में इस व्रत को रख सके।
Editorial
Updated:- 2026-02-13, 07:00 IST

आज शुक्रवार, 13 फरवरी 2026 का दिन विजय और सफलता का प्रतीक है। आज फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि है, जिसे  विजया एकादशी  के नाम से जाना जाता है। पद्म पुराण के अनुसार, भगवान राम ने लंका पर चढ़ाई करने से पहले सागर तट पर इसी एकादशी का व्रत किया था, जिससे उन्हें रावण पर विजय प्राप्त हुई थी। इसलिए यह व्रत कोर्ट-कचहरी, शत्रु नाश और कठिन कार्यों में जीत के लिए सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। आज दोपहर 04:13 बजे तक मूल नक्षत्र रहेगा, जो गंडमूल  श्रेणी का प्रमुख नक्षत्र है। मूल के स्वामी केतु हैं और देवी निरृति हैं। शुक्रवार  और एकादशी का संयोग  लक्ष्मी-नारायण योग बनाता है, लेकिन मूल नक्षत्र और व्यतिपात योग होने से आज विशेष सावधानी और सात्विकता की आवश्यकता है। आज चंद्रमा धनु राशि में रहेंगे। आइए जानते हैं मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित सौरभ त्रिपाठी से आज का पंचांग और उपाय।

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आज का पंचांग- 13 फरवरी  2026

तिथि नक्षत्र दिन/वार योग करण
एकादशी  (दोपहर 02:29 बजे तक)  मूल शुक्रवार वज्र बव

सूर्य और चंद्रमा की स्थिति 13 फरवरी  2026

 प्रहर   समय
सूर्योदय  सुबह 06 बजकर 44 मिनट पर होगा
सूर्यास्त शाम 06 बजकर 15 मिनट पर होगा
चंद्रोदय  रात  04 बजकर 26 मिनट पर होगा
चंद्रास्त सुबह 02 बजकर 11 मिनट पर होगा

आज का शुभ मुहूर्त और योग 13 फरवरी 2026       

मुहूर्त नाम   मुहूर्त समय
ब्रह्म मुहूर्त (सूर्य पूजन का शुभ समय) सुबह 05 बजकर 08 मिनट से 05 बजकर 56 मिनट तक
अभिजीत मुहूर्त (सूर्य पूजन का शुभ समय) दोपहर 12 बजकर 02 मिनट से 01 बजकर 47 मिनट तक
विजय मुहूर्त दोपहर 02 बजकर 43 मिनट से 03 बजकर 28 मिनट तक
गोधूलि मुहूर्त शाम 06 बजकर 15 मिनट से 06 बजकर 41 मिनट तक

आज का अशुभ मुहूर्त 13 फरवरी 2026

मुहूर्त नाम मुहूर्त समय 
राहु काल सुबह 11 बजकर 09 मिनट से दोपहर 12 बजकर 33 मिनट तक
यमगंड दोपहर 03 बजकर 23 मिनट से 04 बजकर 49 मिनट तक
गुलिक काल सुबह 08 बजकर 17 मिनट से 09 बजकर 39 मिनट तक

शुक्रवार को राहु काल सुबह 11:00 बजे से 12:00 बजे के बीच होता है। आज एकादशी व्रत है, इसलिए राहु काल में पूजा का संकल्प न लें।

आज के खास दिन का महत्व: विजया एकादशी

पद्म पुराण और स्कंद पुराण में स्पष्ट उल्लेख मिलता है कि फाल्गुन कृष्ण पक्ष की यह एकादशी भगवान विष्णु की विशेष कृपा दिलाने वाली मानी गई है और इसका प्रभाव उन लोगों पर अधिक पड़ता है जिनकी कुंडली में शनि, राहु-केतु या छठे-आठवें-बारहवें भाव से जुड़े कष्ट सक्रिय हों। पुराणों में वर्णन आता है कि इस एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति को शत्रु बाधा, मुकदमे, रोग, भय और मानसिक अस्थिरता से मुक्ति मिलती है, ज्योतिषीय दृष्टि से देखा जाए तो एकादशी तिथि चंद्रमा से जुड़ी होती है और चंद्रमा मन, भावनाओं और निर्णय क्षमता का कारक है, इसलिए विजया एकादशी का व्रत चंद्र दोष, मानसिक भ्रम और बार-बार लिए गए गलत निर्णयों से उबरने में सहायक माना गया है। यही कारण है कि युद्ध, प्रतियोगिता, कानूनी विवाद या जीवन के किसी लंबे संघर्ष से पहले इस एकादशी का महत्व बढ़ जाता है, क्योंकि यह मन को स्थिर और संकल्प को मजबूत करती है। पुराण यह भी साफ कहते हैं कि बिना आचरण सुधार के किया गया व्रत निष्फल हो सकता है, इसलिए झूठ, क्रोध, निंदा और अहंकार का त्याग इस दिन विशेष रूप से आवश्यक बताया गया है।

मूल नक्षत्र और शुक्रवार का संयोग:

ज्योतिष और शास्त्रों के अनुसार मूल नक्षत्र में शुक्रवार को पड़ने वाली विजया एकादशी का फल यह है कि यह पुराने कर्म, गलत निर्णय और मोह को तोड़कर वास्तविक विजय का मार्ग खोलती है। संयम और शुद्ध आचरण रखने पर शत्रु बाधा, भय और मानसिक उलझनों से मुक्ति मिलती है, जबकि भोग और दिखावे में रहने पर यही योग शुक्र और केतु से जुड़े कष्ट बढ़ा देता है।

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आज का विशेष उपाय:

  • विजया एकादशी के दिन सुबह स्नान के बाद भगवान विष्णु को तुलसी दल अर्पित करें और ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र 108 बार जप करें,
  • मूल नक्षत्र की कठोर ऊर्जा को संतुलित करने के लिए शाम को पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएँ और किसी से बहस या कटु वाणी से बचें।
  • आज वस्तु चावल, दूध, मिश्री या सफेद कपड़ा किसी जरूरतमंद को दान करें और स्वयं भोग-विलास से दूरी रखें।
  • आज के दिन झूठ, निंदा और अनैतिक संबंधों से सख्ती से बचें, क्योंकि मूल नक्षत्र में किया गया गलत कर्म कई गुना होकर लौटता है।
  • आज रात को सोने से पहले मन में किसी एक गलत आदत या संबंध को छोड़ने का संकल्प लें।

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Image Credit- Freepik

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