मंदिर से प्रसाद के रूप में मिले हुए फूलों का क्या करना चाहिए?

अक्सर जब लोग मंदिर जाते हैं उन्हें पुजारी भगवान के चढ़े हुए फूल प्रसाद के साथ दे देते हैं। लेकिन जब ये फूल सूख जाते हैं तो सबसे ज्यादा परेशानी इस बात की होती है कि अब उन फूलों का क्या किया जाए। 

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अक्सर जब हम मंदिर जाते हैं तो पुजारी हमें प्रसाद के साथ पूजा के कुछ फूल भी देते हैं। फूल हमेशा भगवान के चरणों में अर्पित करने के बाद आपको दिए जाते हैं, जिससे आपको भगवान का आशीर्वाद मिले।

जब हम इन फूलों को माथे से लगाकर अपने घर के किसी शुद्ध स्थान पर रखते हैं तो हमेशा सकारात्मक प्रभाव छोड़ते हैं। कई बार हम इन फूलों के सूखने के बाद घर से बाहर निकाल देते हैं और किसी कचरे वाले स्थान पर फेंक देते हैं।

हालांकि, ऐसा करना गलत है क्योंकि ज्योतिष के अनुसार ये फूल अपने साथ अच्छी ऊर्जाओं को घर में फैलाते हैं और जब हम इन्हें कूड़े में डाल देते हैं तो इसका प्रभाव जीवन में गलत पड़ता है और ये भगवान का अपमान करने के समान होता है। आइए ज्योतिर्विद पंडित रमेश भोजराज द्विवेदी से जानें कि आपको मंदिर से लाए हुए फूलों का क्या करना चाहिए जिससे इसके शुभ फल मिलें।

मंदिर से लाए हुए फूलों को घर की तिजोरी में रखें

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ऐसा माना जाता है कि यदि आप मंदिर से लाये हुए फूलों को घर की तिजोरी में रखती हैं तो धन लाभ के योग बनते हैं। आप इन फूलों को अच्छी तरह से सुखाकर किसी कागज में लपेटकर तिजोरी या किसी भी पैसों वाले स्थान पर रखें।

जिससे आपके घर में लक्ष्मी जी का आगमन होता है और ईश्वर का आशीर्वाद होने की वजह से ये आपके धन में वृद्धि करने का काम करते हैं। फूलों को हमेशा से एक शुभ संकेत के रूप में देखा जाता है और जब ये प्रसाद में मिलते हैं तो इन्हें और शुभ माना जाता है और धन का संकेत देते हैं। इसी वजह से इन फूलों को घर की तिजोरी में रखने की सलाह दी जाती है।

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मंदिर से मिले फूलों का पवित्र जल में विसर्जन करें

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यदि आप मंदिर से प्राप्त प्रसाद में शामिल फूलों को घर नहीं ले जा रहे हैं, तो उन्हें इधर-उधर फेंकने या कचरे में फेंकने की बजाय उन्हें किसी पवित्र नदी या जल के स्रोत में विसर्जित कर देना चाहिए। ऐसा विश्वास किया जाता है कि यदि आप फूलों को जल के स्रोत जैसे नदी में विसर्जित करते हैं तो इससे ईश्वर का अपमान नहीं होता।

जब आप इन फूलों को हाथों से जल में प्रवाहित करते हैं, तो इसे 'पुष्पांजलि' के रूप में जाना जाता है। पुष्पांजलि को एक शुभ काम माना जाता है और इससे शरीर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

मान्यता है कि फूलों का उपयोग पूजन के दौरान देवताओं को समर्पित करने में किया जाता है, जिससे उनका आशीर्वाद और कृपा प्राप्त होती है। जब इन फूलों को उनके धार्मिक उद्देश्य के लिए समुद्र या नदी के जल में विसर्जित किया जाता है, तो यह ईश्वर की प्रसन्नता के लिए एक समर्पित क्रिया होती है।

मंदिर से मिले फूलों से बनाएं खाद

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ऐसा माना जाता है कि यदि आप मंदिर में प्रसाद के रूप में मिले फूलों को श्रद्धा से घर लाती हैं और इसे घर में गमले या बागीचे की मिट्टी में दबा देती हैं तो ये कुछ दिनों में खाद का रूप ले लेते हैं।

इस खाद का इस्तेमाल आप किसी भी पौधे की उर्वरकता बढ़ाने में कर सकती हैं। धार्मिक परंपराओं में, मिट्टी को समृद्ध बनाने, उर्वरता और कृषि प्रयासों में प्रचुरता को बढ़ावा देने के लिए चढ़ाए गए फूलों को एकत्र किया जाता है और खाद बनाई जाती है।

यह पर्यावरण-अनुकूल दृष्टिकोण न केवल प्रकृति की पवित्रता का सम्मान करता है बल्कि सद्भाव को भी बढ़ावा देता है। ज्योतिषीय रूप से भगवान को चढ़ाए गए फूलों की खाद शनि की परिवर्तनकारी ऊर्जा का प्रतीक मानी जाती है और इसका इस्तेमाल घर के बगीचे में करने से शनि की कृपा दृष्टि बनी रहती है।

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मंदिर से मिले फूलों को वृक्ष के पास रखें

कई बार आपको यात्राओं के दौरान किसी मंदिर से प्रसाद के रूप में फूल या माला मिलते हैं जिससे और उन्हें यात्रा के दौरान संभालकर रख पाना मुश्किल हो जाता है। आपको उन फूलों को अपने सीधे हाथ की हथेली पर रखकर माथे से लगाना चाहिए जिससे पूरे शरीर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार हो सके।

इसके बाद आप इन फूलों को किसी पेड़ जैसे पीपल या बरगद के पास रख दें। भूलकर भी इन फूलों को ऐसे पेड़ के पास न रखें जिसके आस-पास कचरा इकठ्ठा हो। इस तरह आपको ईश्वर का आशीर्वाद फूलों के रूप में मिल जाएगा और पूजा का पूर्ण फल भी मिलेगा।

अगर आप इस तरह से मंदिर से मिले फूलों का इस्तेमाल करते हैं तो आपको ईश्वर का आशीर्वाद मिलने के साथ पूजा का फल भी मिलता है।

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Images:Freepik.com

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